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सावधान ! कहीं आपकी टाँगों पर काले निशान तो नहीं?

अगर आप के टाँगों के निचले हिस्से पर काले रंग के चकत्तेदार निशान है या एक या दोनों पैरों की त्वचा का रंग, बाकी शरीर की त्वचा के रंग से ज्यादा गहरा है, और आपको एक घंटे से ज्यादा खड़े रहने में परेशानी होती है और चलने से पैरों में सूजन आ जाती है, थोड़ा चलने के बाद खिंचाव या आवश्यकता से ज्यादा थकान महसूस होती है, तो यकीन मानिये आप के पैरों व टाँगों में उभरे गोल-गोल या चित्तीदार काले निशान (Round or spotted black marks on the feet and legs) किसी त्वचा रोग की वजह से नहीं है बल्कि यह शिरा, यानी वेन्स का रोग है जिसे मेडिकल भाषा में क्रोनिक वीनस इन्सफीशियन्सी (Chronic venous insufficiency) यानी सी.वी.आई. कहते है।

Chronic Venous Insufficiency: Symptoms, Causes, Diagnosis

क्यों हो जाते हैं टाँगों पर काले निशान ?

शरीर के अन्य अंगों की तरह टाँगों को भी आक्सीजन की जरूरत पड़ती है। यह आक्सीजन धमनियों (यानी आरटरी) में प्रवाहित शुद्ध खून के जरिये पहुँचायी जाती है। टाँगों को आक्सीजन देने के बाद यह आक्सीजन रहित अशुद्ध खून शिराओं (यानी वेन्स) के जरिये वापस टाँगों से ऊपर फेफड़े की तरफ शुद्धीकरण के लिये ले जाया जाता है। इसका मतलब यह हुआ कि यह शिरायें टाँगों का ड्रेनेज सिस्टम (Leg Drainage System) निर्माण करती है। शिरायों यानी वेन्स की कार्यप्रणाली अगर किसी कारण से शिथिल हो जाती है तो टाँग व पैर का ड्रेनेज सिस्टम चरमरा जाता है जिसका परिणाम यह होता है कि अशुद्ध खून ऊपर चढ़ कर फेफड़े की ओर जाने की बजाय टाँगों के निचले हिस्से में इकट्ठा होना शुरू हो जाता है।

फिर शुरू होता है पैरों में सूजन व काले निशानों का उभरना। अगर समय रहते इनका समुचित इलाज किसी वैस्क्युलर सर्जन (Vascular Surgeon) से नहीं कराया गया तो टाँगों में उभरे काले निशान धीरे धीरे और गहरे व आकार में बढ़ते जायेंगे और अन्तत: लाइलाज घावों में परिवर्तित हो जायेंगें।

शिराओं का रोग यानी सीवीआई के पनपने के कई कारण हैं। इनमें सबसे ज्यादा प्रमुख हैं डीप वेन थ्रोम्बोसिस (Deep vein thrombosis) यानी डी.वी.टी. इस रोग में टाँगों की वेन्स (शिराओं) में खून के कतरे जमा हो जाते हैं। यह कतरे या तो बीमारी के बाद पूरी तरह गायब नहीं हो पाते या अगर घुल भी जाते हैं तो भी वेन के अन्दर स्थित कपाटों को नष्ट कर देते हैं। इसका परिणाम यह होता है कि शिराओं के जरिये अशुद्ध खून के ऊपर चढ़ने की प्रक्रिया बुरी तरह से बाधित हो जाती है। कुछ डी.वी.टी. के मरीजों में खून के कतरे शिराओं के अन्दर स्थायी रूप से निवास करने लगते हैं।

सी.वी.आई. का दूसरा प्रमुख कारण पैदल चलने व व्यायाम का नगण्य होना है। रेाजाना पैदल न चलने से या टाँगों की कसरत न करने से टाँगों की माँसपेशियों द्वारा निर्मित पम्प जो अशुद्ध खून को ऊपर चढ़ाने में मदद करता है, कमजोर पड़ जाता है। कुछ लोगों की शिराओं में स्थित कपाट (यानी वाल्व) जन्म से ही ठीक से विकसित नहीं हो पातें, ऐसे मरीजों में सीवीआई रोग के लक्षण, कम उम्र में ही शुरू हो जाते हैं।

टाँगों पर काले निशान होने पर कहाँ जाएं? Where to go if there are black marks on the legs?

सीवीआई रोग के शुरूआती लक्षणों में शाम ढ़लने तक टाँगों व पैरों में सूजन का आ जाना, और सुबह उठने के वक्त सूजन का गायब होना है। पर जैसे-जैसे यह मर्ज बढ़ता जाता है, टाँगों में हल्का दर्द, खिंचाव व थकान की शिकायत होने लगती है। आगे चलकर टाँगों व पैर पर काले काले चित्तीदार निशान उभर आते हैं। धीरे-धीरे यह काले निशान आकार में बढऩे लगते हैं। फिर आगे चलकर इन्हीं काले निशानों पर एक्जिमा व घाव बन जाते हैं।

अज्ञानतावश मरीज एक्जिमा का असली कारण समझे बगैर चर्मरोग विशेषज्ञों से इलाज कराना़ शुरू कर देते हैं। मरीज को चाहिये कि वह किसी वैस्क्युलर सर्जन से सलाह लें।

इन काले निशानों का कारण जानना बहुत जरूरी है। इसके लिये वेनस डॉपलर स्टडी (Venous doppler study), एम. आर. वेनोग्राम (M. R Venogram), व कभी कभी एंजियोग्राफी का सहारा लिया जाता है। खून की विशेष जाँच कर यह पता लगाना पड़ता है कि रक्त का कतरा या थक्के में परिवर्तित होने की प्रक्रिया कही असाधाण व दोषयुक्त तो नहीं है। इन विशेष जाँचों के आधार पर ही सीवीआई के इलाज का सही दिशा निर्धारण होता है। ज्यादातर मरीजों मे दवा व विशेष व्यायाम की ही जरूरत होती है। पर कुछ मरीजों में आपरेशन की आवश्यकता पड़ती है। आज के युग में वेनस वाल्वुलोप्लास्टी, एक्ंजीलरी वेन ट्रान्सफर या वेनस बाईपास सर्जरी जैसी आधुनिकतम तकनीक की मदद से रोग को नियंत्रण करने में लाभ मिला है। वेनस बाईपास सर्जरी आजकल काफी लोकप्रिय हो रही है। इसके लिये कभी कभी विदेशों से आयतित क्रत्रिम नलियों का इस्तेमाल किया जाता है। कभी कभी इन्डोस्कोपिक वेनस सर्जरी यानी सेप्स या फिर लेसर द्वारा सर्जरी का सहारा लेना पड़ता है।

अगर आपकी टाँगों पर काले निशान है तो निम्नलिखित सावधानियाँ बरते:
  1. मरीज को चाहिये कि वह तुरन्त किसी वैस्क्युलर या कार्डियोवैस्क्युलर सर्जन से सलाह लें व अपनी टांगों की प्रारम्भिक जांच जरूर करवा लें।
  2. अपने टाँग व कमर के चारों ओर कसे हुए कपड़े न पहनें।
  3. ऊँची एड़ी के जूते व सैंडल का प्रयोग कतई न करें। नीची एड़ी वाले जूते टाँगों की माँसपेशियों को हमेशा क्र्रियाशील रखते है जो वेन्स व टाँगों के ड्रेनेज सिस्टम के लिये लाभदायक हैं।
  4. जौगिंग, स्किपिंग, एरोबिक्स या ऐसा कोई उछलकूद वाला व्यायाम जिसमें पैर के घुटने पर बार बार झटके लगें, कतई न करें। इस तरह के व्यायाम, वेन्स को फायदा पहुँचाने के बजाय, ज्यादा नुकसान पहुँचाते हैं। बगैर झटके दिये हुये, पैर उठाने व मोडऩे वाले व्यायाम वेन्स के लिये फायदेमन्द है।
  5. ऐसे व्यवसाय या ऐसी शारिरिक मुद्रा से बचें जिसमें लम्बे समय तक बैठना या खड़े रहना पड़ता हो। ऐसा होने से पैरों व टाँगों से खून के वापस होने या ऊपर चढऩे की क्रिया बाधित व शिथिल हो जाती है। यह अवस्था पैरों के लिये नुकसानदेह हैं। अपने ऑफिस या घर पर एक घंटे से ज्यादा लगातार न ही खड़े रहें और न ही पैर लटका कर बैठे रहें, इस तरह की परिस्थितियों में एक घंटा पूरा हो जाने पर पाँच मिनट का अंतराल ले लें। इस अंतराल में अपने दोनों पैरों को अपने सामने किसी स्टूल के सहारे ऊँचा रखें।
  6. खाने में तेल व घी का प्रयोग बहुत कम मात्रा में करें। कम कैलोरी वाले और रेशेदार खाघ्य पदार्थ, वेन्स के लिये फायदेमन्द हैं। अपने वजन पर नियत्रंण रखें। वजन कम करने से वेन्स पर पडऩे वाला अनावश्यक दबाव कम हो जाता है। किसी भी हालत में मोटापे को न पनपने दें।
  7. गर्भनिरोधक दवाओं या इस्ट्रोजन से बनी औषधियों का प्रयोग न करें क्योंकि ये औषधियाँ वेन्स की दीवारों की चौड़ाई को बढ़ा देती है।
  8. रोज नियमित प्रात:कालीन सैर करें। प्रतिदिन कम से कम चार से पॉच किलोमीटर चलें। टहलना आपके लिये सबसे उत्तम व्यायाम हैं। इससे पैरों से रक्त का ऊपर की ओर वापस जाने का प्रवाह तेज हो जाता है जो सीवीआई रोग में अत्यन्त लाभकारी सिद्ध होता हैं।
  9. कोई भी यौगिक व्यायाम, जिसमें पैरों को कुछ मिनट के लिये ऊपर रखना पडे, अत्यन्त लाभकारी होता है। शीर्षासन या सर्वगंासन भी लाभदायक है पर इनको अपने चिकित्सक की अनुमति के बाद ही करें। सरवाइकल स्पान्डीलाइटिस, रीढ़ की हड्डी के रोग या अन्य किसी न्यूरोलोजिकल समस्या से पीडि़त मरीज इस तरह के व्यायाम को न करें।
  10. अपने कार्य स्थल या घर पर ज़मीन पर लेट कर अपने पुठ्ठो को दीवार से सटा कर दोनों पैरों को दीवार के सहारे दस मिनट तक ऊपर की ओर रखें। ऐसा करने से टाँगों और पैरों को तुरन्त आराम मिलेगा और दूरगामी लाभ भी होगा।
  11. रात में सोते समय पैरों के नीचे एक या दो तकिये लगाए जिससे पैर छाती से दस या बारह इंच ऊपर रहें। ऐसा करने से पैरों में ऑक्सीजन रहित खून के इकट्ठा होने की प्रक्रिया शिथिल पड़ जाती है जो सीवीआई रोग से ग्रस्त पैरों के लिये अत्यन्त लाभकारी हैं।
Sorted pressure socks (stocking)
  1. हमेशा दिन के समय विशेष तकनीक से बने हुये क्रमित दबाव वाली जुराबें (स्टौकिंग) टाँगों में पहने रखें। इन विशेष जुराबों के पहने बगैर कभी भी न चलें। प्रात:काल बिस्तर से उठते ही इन विशेष जुराबों को अपनी टाँगों पर चढ़ा ले और दिन भर पहने रखें सोने से पहले ही उतारें। ये विशेष जुराबें पैरों में खून का प्रवाह बढ़ाती है और गुरूत्वाकर्षण से नीचे की तरफ होने वाले खून के दबाव को कम करती है और सीवीआई रोग को बढ़ने से रोकती है।

डा.के. के.पाण्डेय  

(सीनियर वैस्कुलर एवं कार्डियों थोरेसिक सर्जन,

इन्द्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल, नई दिल्ली )

देशबन्धु

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