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Akhilendra Pratap Singh

नागरिकता पूछना ही भारतीयों का अपमान – अखिलेन्द्र

नागरिक बोध ही राष्ट्रवाद की पहचान Citizenhood is the hallmark of nationalism

कृपाशंकर पनिका अध्यक्ष व तेजधारी मंत्री चुने गए

ठेका मजदूर यूनियन का 17 वां जिला सम्मेलन पिपरी में हुआ

Swami Vivekananda had said that one should not distinguish a refugee on the basis of religion.

रेनूकूट, सोनभद्र, 13 जनवरी 2020, उस समय जब देश में राष्ट्रीय चेतना भी विकसित नहीं हुई थी तब स्वामी विवेकानंद ने कहा था कि धर्म के आधार पर शरणार्थी में भेद नहीं करना चाहिए (Swami Vivekananda’s quote on refugees)। तब धर्म के आधार पर नागरिकता कानून बनाना और रजिस्टर तैयार कर नागरिकता पूछना आरएसएस-भाजपा की मोदी सरकार द्वारा भारतीयों का अपमान है। यह नागरिकता संशोधन कानून की फालतू की खुराफात है। अंग्रेजों से माफी मांगकर आजादी के आंदोलन में गद्दारी करने वाले सावरकर को राष्ट्रनायक बनाने की संघ की सनकभरी योजना का हिस्सा है। जिसमें बेकार में देश की जनता का पैसा बर्बाद किया जायेगा।

यह बातें कल ठेका मजदूर यूनियन के सत्रहवें जिला सम्मेलन के मुख्य अतिथि स्वराज अभियान के राष्ट्रीय नेता अखिलेन्द्र प्रताप सिंह ने पिपरी नगर पंचायत के सभागार में कहीं।

श्री सिंह ने कहा कि वास्तव में रोजगार, शिक्षा, खेती किसानी, स्वास्थ्य समेत हर मोर्चे पर नाकाम रही यह सरकार देश में विभाजन की राजनीति कर रही है। जिसे जन संवाद और शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक आंदोलन से परास्त किया जायेगा।

उन्होंने कहा कि आज देश में विशेषकर उत्तर प्रदेश में लगातार लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला किया जा रहा है। हालत यह हो गयी है कि अब आंदोलन की अपील करना भी गुनाह हो गया है। मजदूर किसान मंच के अध्यक्ष और प्रख्यात अम्बेडकरवादी पूर्व आईपीएस एस. आर. दारापुरी को महज फेसबुक पर सीएए और एनआरसी का विरोध करने पर योगी सरकार ने जेल भेज दिया, जबकि वह इसके विरोध प्रदर्शन में शामिल तक नहीं हुए थे।

स्वराज भियान नेता ने कहा कि राजनीतिक नेता ही नहीं अब तो स्टीफन कालेज जैसे प्रतिष्ठित कालेज के छात्र और छात्राएं तक यह बात महसूस कर रही हैं कि देश में लोकतंत्र को खत्म कर फासीवादी निजाम थोपा जा रहा है। इस तानाशाही के खिलाफ देश का नागरिक समाज लड़ रहा है जो स्वागत योग्य है। इसके साथ ही जमीनी स्तर पर गांव के अंतिम आदमी और उद्योग में काम करने वाले मजदूर तक इस तानाशाही के विरूद्ध जागृति लानी होगी। जिसे यूनियन के कार्यकर्ता करेंगें यह हमारा विश्वास है।

सम्मेलन में एक वर्ष के कामकाज की रिपोर्ट रखी गयी जिस पर प्रतिनिधियों ने अपनी राय रखते हुए सर्वसम्मति से रिपोर्ट को पारित किया। सम्मेलन ने आरएसएस-भाजपा की फासीवादी राजनीति, मजदूर अधिकारों पर हो रहे हमले और बिजली, कोयला समेत सार्वजनिक उद्योगों को बेचने, ठेका मजदूरों के नियमितीकरण पर जन जागरण अभियान चलाने का निर्णय लिया।

सम्मेलन ने कृपाशंकर पनिका को अध्यक्ष व तेजधारी गुप्ता को मंत्री चुना। इसके अलावा तीरथराज यादव उपाध्यक्ष, मोहन प्रसाद संयुक्त मंत्री, अंतलाल खरवार प्रचार मंत्री, गोविंद प्रजापति कोषाध्यक्ष व चंद्रशेखर पाठक कार्यालय मंत्री समेत पंद्रह सदस्यी कार्यकारिणी को सर्वसम्मति से चुने गए।सम्मेलन को एटक के नेता लल्लन राय, श्रम बंधु व वर्कर्स फ्रंट अध्यक्ष दिनकर कपूर, युवा मंच के संयोजक राजेश सचान, मजदूर किसान मंच नेता अजय राय, पूर्व सभासद नौशाद मिंया, पिपरी सभासद मलर देवी, का0 मारी, स्वराज अभियान संयोजक कांता कोल, राजेन्द्र गोंड़, अमल कुमार मिश्रा आदि ने सम्बोधित किया।

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