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शीतलहर और पाला : फसलों को हो सकता है नुकसान, विशेषज्ञों ने दिए सुझाव

मध्य प्रदेश में जारी है शीतलहर, विशेषज्ञों ने जताई पाला से फसलों को नुकसान पहुंचने की आशंका

Fear of damage to crops due to cold wave and frost in Madhya Pradesh

शीतलहर और पाला का फसलों पर असर | Cold wave and frost affect crops

भोपाल, 21 दिसम्बर, 2021: मध्य प्रदेश में शीतलहर और पाला का फसलों पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है। कृषि विभाग के विशेषज्ञों (Agriculture department experts) ने किसानों को शीतलहर और पाला से बचाव के लिए एहतियाती कदम उठाने की सलाह दी है।

जारी है शीतलहर का प्रकोप

बीते कुछ दिनों से मध्य प्रदेश में शीतलहर का प्रकोप (Outbreak of cold wave in Madhya Pradesh) बना हुआ है। सतना, रीवा, छिंदवाड़ा, जबलपुर, मंडला, सिवनी, टीकमगढ़, बैतूल, इंदौर, धार,खंडवा, खरगोन, रतलाम, दतिया, गुना में शीतलहर तो उमरिया, खजुराहो, सागर, भोपाल,रायसेन में तीव्र शीतलहर का असर है। इसके चलते फसलों को नुकसान हो रहा है। कई स्थानों पर तो पाला भी गिरा है। यह स्थिति किसानों की समस्या बढ़ाने वाली है।

पाला से फसलों के बचाव के लिए क्या करें? | What to do to protect crops from frost?

प्राप्त जानकारी के मुताबिक विशेषज्ञों का कहना है कि

  • पाला से बचाव के लिए फसलों में हल्की सिंचाई करें। पर्याप्त नमी होने से फसलों में नुकसान की आशंका कम होती है..
  • पाला होने की स्थिति में शाम के समय खेत की मेड़ पर धुआँ करें..
  • सिंचाई शाम – रात्रि के समय करें इसके अलावा सल्फर का दो मि.ली. प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें या पाला लगने के तुरंत बाद यानी अगले दिन प्रात: काल ग्लूकोन डी 10 ग्राम प्रति लीटर पानी के हिसाब से छिड़काव करें।

किसान कल्याण तथा कृषि विकास के संयुक्त संचालक बी.एल.बिलैया के मुताबिक सर्दी के मौसम में पानी का जमाव हो जाता है जिससे कोशिकायें फट जाती हैं, एवं पौधे की पत्तियां सूख जाती हैं परिणास्वरूप फसलों में भारी क्षति हो जाती है। पाला से पौधों तथा फसलों पर प्रभाव पाले के प्रभाव से पौधों की कोशिकाओं में जल संचार प्रभावित होता है। प्रभावित फसल अथवा पौधे का बहुभाग सूख जाता है जिससे रोग एवं कीट का प्रकोप बढ़ जाता है। पाले के प्रभाव से फल और फूल नष्ट हो जाते हैं। पाले के प्रभाव से सब्जियां अधिक प्रभावित होती हैं एवं पूर्णत: नष्ट हो जाती हैं।

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