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Ajay Kumar Lallu with Priyanka Gandhi

बिना किसानों की हिस्सेदारी के हो गया कांग्रेस का किसान धरना

बिना किसानों की हिस्सेदारी के हो गया कांग्रेस का किसान धरना

कल यूपी के जिला मुख्यालयों पर कांग्रेस का गन्ना किसानों की समस्याओं को लेकर instant धरना (Congress’s immediate strike at the district headquarters of UP regarding the problems of sugarcane farmers) हुआ। एक दिसम्बर को आदेश जारी हुआ कि चार दिसम्बर को धरना देना है। इससे पहले भी एक दस दिनों का कार्यक्रम आया था क्या हुआ पता ही नहीं चला।

पार्टी के पदाधिकारियों ने इन तीन दिनों में कितने गांवों में गन्ना किसानों से सम्पर्क (Contact with sugarcane farmers) करके पार्टी का उनके लिये संघर्ष किये जाने को लेकर बताया होगा, आश्वस्त किया होगा और इस आंदोलन से जोड़ने का प्रयास किया होगा यह न मालूम है और न पार्टी को इन सबकी परवाह। बस फोटो अखबार में छप जाये इतना ही चाहिए।

प्रदेश अध्यक्ष जी वैसे लगते तो जमीनी हैं, पर पता नहीं कि कैसे उन्हें याद नहीं रहा कि इस समय गन्ना किसान खेत में गन्ना की छिलाई, ढुलाई को लेकर इतना व्यस्त है कि उसे अपने खाने की परवाह नहीं, वह अपना काम धंधा छोड़कर धरना देने जिला मुख्यालय पर कहां आने वाला है? ऊपर से गन्ना की पर्ची आने की समस्या अलग। लेकिन साहब धरने के आदेश हो गया तो हो गया और वह देना ही है, न तो पदाधिकारियों की नौकरी खत्म हो जायेगी।

तो साहब धरना हो गया और प्रदेश अध्यक्ष जी जा पहुंचे मेरठ, कर दी पदयात्रा, भाषण के बाद दे दिया ज्ञापन और हो गई किसानों की समस्या (Problems of farmers) हल!

लेकिन मेरठ ही नहीं यूपी के हर जिले में हुए धरना प्रदर्शन की फोटो चैक करिये देखिये कि उनमें किसानों की कितनी भागीदारी है!!!

जिन लोगों ने गरीब किसानों के हक के लिये आवाज उठाई है वे सब साधुवाद के हकदार हैं। दिल की गहराइयों से उन्हें सलाम। लेकिन जिनकी समस्या है उनको आंदोलन से कांग्रेस नहीं जोड़ पाई यह कांग्रेस की विफलता है।

पहले तो कांग्रेस का कुनबा ही बिखरा हुआ है और जिसे एकजुट करने में कांग्रेस की नाक नीची हो रही है। दूसरे जो कार्यकर्ता पदाधिकारी हैं भी उन्हें आज भी सनक से भरे आदेश जारी किये जा रहे हैं।

पीयूष रंजन यादव

(लेखक उत्तर प्रदेश कांग्रेस के प्रदेश पदाधिकारी रहे हैं)

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