कोरोना डायरी : किस्से में बदल जाओगे तुम ‘कोरोना’

Corona diary: ‘Corona’, you will turn into a story

तुम सिर्फ लोगों की ही नहीं मार रहे हो, तुम देश की अर्थव्यवस्था से लेकर सामाजिक ताने-बाने को भी छिन्न-भिन्न कर रहे हो कोरोना।

आने वाली पीढ़ी के लिए किस्सा बनकर दुनिया में जिन्दा रहोगे तुम ‘कोरोना।’ हमने नहीं देखा स्पैनिश फ्लू, प्लेग, चेचक, हैजा, मलेरिया जैसी विकराल महामारियों को, जिसने लाखों-लाख लोगों को काल के गाल में समां दिया। किस्से पढ़े और सुने जरूर हैं अपने बड़ों से। गाँव के गाँव चंद दिनों में खत्म होने की दास्तां सुनने भर से रुह कांप उठती है। आज कोरोना के चलते वो सब त्रासदी साक्षात होती हुई दिख रही है।

यह महाप्रलय कहाँ जा कर थमेगी, अभी कहना असंभव है। लेकिन जिन्दगी जीतेगी, इसका भरोसा है। किसी चमत्कार से नहीं, बल्कि विज्ञान के बल पर दुनिया फिर से रंगीन और गुलजार होगी। सब कुछ सामान्य होने पर सुनाये जायेंगे नयी पीढ़ी को कोरोना के किस्से।

रूपेश कुमार सिंह
समाजोत्थान संस्थान
दिनेशपुर, ऊधम सिंह नगर

टूटती जिन्दगी की आह, भूख से उठती पेट की कराह, मासूम को कोख में खोने की पीड़ा, पीठ पर पड़ी एक-एक लाठी का दर्द, निरंकुश होती पुलिस, आपा खोती सरकार, उजड़ती दुनिया, जुगाली करते हुकमरान, बिना उपकरणों और ठोस तैयारी के कोरोना से जंग, सैकड़ों किमी का पैदल सफर, रेंगता समय, नफरत की घिनौनी राजनीति, गाँव को लौटते मजूदर, खाली होते शहर, सुनसान सड़कें, वाहनों के थमे पहिए, स्वच्छ हवा, बेमौसम बरसात, प्रदूषण से दूर खुला आसमान, मदद पहुँचाते लोग, घरों में सिमटे लोग, शराब की दुकान पर चालिस दिन बाद लोगों की सुनामी, एक ही दिन में सबसे सबसे ज्यादा शराब बिकने का रिकार्ड, अच्छे और बुरे न जाने कितने अनुभव बनकर तुम बतलाये जाते रहोगे हमेशा-हमेशा, पीढ़ी दर पीढ़ी। स्वाईन फ्लू, वर्ड फ्लू, सार्स, एन्थ्रेक्स, डेंगू को तो हमने देखा है और देख भी रहे हैं। लेकिन तुम बहुत खतरनाक हो। तुम सिर्फ लोगों की ही नहीं मार रहे हो, तुम देश की अर्थव्यवस्था से लेकर सामाजिक ताने-बाने को भी छिन्न-भिन्न कर रहे हो।

हर व्यक्ति अलग अनुभव कर रहा है कोरोना काल में। सबको अपने अनुभव और गतिविधि साझा करनी चाहिए।

-रूपेश कुमार सिंह

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उपाध्याय अमलेन्दु:
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