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Arun Maheshwari - अरुण माहेश्वरी, लेखक सुप्रसिद्ध मार्क्सवादी आलोचक, सामाजिक-आर्थिक विषयों के टिप्पणीकार एवं पत्रकार हैं। छात्र जीवन से ही मार्क्सवादी राजनीति और साहित्य-आन्दोलन से जुड़ाव और सी.पी.आई.(एम.) के मुखपत्र ‘स्वाधीनता’ से सम्बद्ध। साहित्यिक पत्रिका ‘कलम’ का सम्पादन। जनवादी लेखक संघ के केन्द्रीय सचिव एवं पश्चिम बंगाल के राज्य सचिव। वह हस्तक्षेप के सम्मानित स्तंभकार हैं।

कोरोना एक नए युग की महामारी है

Coronavirus Outbreak LIVE Updates

Corona epidemic is the biggest challenge of today

कोरोना महामारी का असर (Corona epidemic effect) बताता है कि आज की दुनिया किस कदर आपस में गुँथ चुकी है। तमाम आबादियों के बीच अविभाज्य संपर्क तैयार हो चुके हैं। राष्ट्रीय राज्यों की सीमाएँ वास्तव में टूट चुकी हैं। दुनिया का कोई कोना अब पहले के जमाने की तरह अलग-थलग, कटा हुआ नहीं रह गया है।

महामारियों ने मनुष्यों के बीच आपसी व्यवहार और सभ्यता के इतिहास पर पहले भी बड़ा असर डाला है, लेकिन कोरोना के असर की गहराई और व्यापकता से पहले की किसी भी महामारी से इसीलिये तुलना नहीं की जा सकती है, क्योंकि आज की दुनिया एक बदली हुई दुनिया है। परस्पर निर्भरशीलता इस दुनिया की एक ठोस सचाई है।

इसीलिये कोरोना के आर्थिक-सामाजिक प्रभावों का अभी कोई भी पूरा अनुमान नहीं लगा सकता है। मानव सभ्यता के सामने अस्तित्व के इस नए संकट में ही वैश्विक मनुष्य की श्रेष्ठ नैतिकता और संहिता को सामने आना है। यह आज के काल की सबसे बड़ी चुनौती है।

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