#कोरोनावायरसलॉकडाउन : महामारी की तुलना में पुलिस अधिक गंभीर खतरा बन गई है, प्रो सिन्हा ने एनएचआरसी को लिखा

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#CoronavirusLockdown : Police has become a more serious threat than the epidemic, Prof Sinha writes to NHRC

नई दिल्ली, 26 मार्च 2020 : मानवाधिकार संगठन पीयूसीएल के सदस्य प्रो. प्रभाकर सिन्हा ने कहा है कि लॉकडाउन के बीच पुलिस महामारी के मुकाबले अधिक गंभीर खतरा हो गई है।

प्रोफेसर सिन्हा ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को लॉकडाउन में पुलिस की आपराधिक क्रूरता पर पत्र लिखा है, जिसे उन्होंने अपनी एफबी टाइमलाइन पर भी पोस्ट किया है।

उनके पत्र का भावानुवाद निम्नवत् है

सेवा

अध्यक्ष,

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग

नई दिल्ली

उप: लॉकडाउन के वेक में पुलिस की आपराधिक क्रूरता।

महोदय,

खूंखार कोरोना के प्रसार की जांच के लिए देशव्यापी तालाबंदी का आदेश दिया गया है। तालाबंदी कर्फ्यू नहीं है। लॉकडाउन में, लोगों को किराने, सब्जियां, दवा खरीदने और बैंकों में जाने या पैसे के लिए एटीएम जाने की अनुमति है। अगर इनकी अनुमति नहीं दी जाती है तो कोरोना के कारण मरने वालों की तुलना में कई गुना अधिक लोग भुखमरी से मर जाएंगे। लेकिन पुलिस लोगों के लिए उस बीमारी से ज्यादा खतरा बन गई है, जिसके कारण लॉक डाउन हुआ है।

किराना, दवाई, दूध, सब्जी या पैसे के लिए बैंक या एटीएम जाने वाले लोगों को पुलिस द्वारा पीटा और / या अपमानित किया जा रहा है। वे लोगों के साथ ब्रिटिश शासन के तहत पुलिस से भी बदतर सुलूक कर रहे हैं।

Hailing from Muzaffarpur (Bihar), Prof. Sinha had a PG Degree in English and Ph.D. in Linguistics from Poona University (1967) studying the grammar of Lepcha language of Sikkim in relation to Bengali, Santhali, Hindi and Vajjika. He retired as Professor of English from RDS College, Muzaffarpur under Bihar University. Right from his school days in the 1950’s he was involved with the democratic movements of students and suffered fracture and other injuries when police lathi charged agitating students in Patna. He played a leading role in agitation for a judicial enquiry into the police firing on the students of Patna university and later on represented the students in the judicial enquiry headed by the Chief Justice of Patna High court .
Hailing from Muzaffarpur (Bihar), Prof. Sinha had a PG Degree in English and Ph.D. in Linguistics from Poona University (1967) studying the grammar of Lepcha language of Sikkim in relation to Bengali, Santhali, Hindi and Vajjika. He retired as Professor of English from RDS College, Muzaffarpur under Bihar University. Right from his school days in the 1950’s he was involved with the democratic movements of students and suffered fracture and other injuries when police lathi charged agitating students in Patna. He played a leading role in agitation for a judicial enquiry into the police firing on the students of Patna university and later on represented the students in the judicial enquiry headed by the Chief Justice of Patna High court .

पुलिस का कार्य, दंड का आपराधिक उत्तरदायी है और मानवाधिकारों का घोर उल्लंघन है। दिल्ली, पंजाब, यूपी के पुलिस के आपराधिक कृत्य के वीडियो फेसबुक जैसे सोशल मीडिया पर उपलब्ध हैं।

एनएचआरसी को कम से कम सरकार को निर्देशित करना चाहिए कि वह पुलिस को सड़क पर पाए जाने वाले लोगों को पीटने व अपमानित न करने के आदेश दे और कमीशन को चाहिए कि वह उचित कार्रवाई के लिए प्रासंगिक विवरण के साथ लोगों को पुलिस के पीटने और अपमानित करने के वीडियो आयोग को भेजने के लिए आमंत्रित करे।

दोषियों के खिलाफ आयोग उचित कार्रवाई कर सकता है। इस अपराध के साक्ष्य को पूरी तरह से सार्वजनिक रूप से रखने के लिए आयोग को अपनी स्वयं की एजेंसी का भी उपयोग करना चाहिए। कृपया लालफीताशाही के साथ तेजी से निपटें।

आपका आभारी,

प्रभाकर सिन्हा

सदस्य, पीयूसीएल

नेपाली कोठी।

क्लब रोड,

मुजफ्फरपुर -842002

बिहार

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