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नोवेल कोरोना वायरस पर अफवाहों से बचें, जानें क्या हैं मिथक और क्या हैं तथ्य

नोवेल कोरोना वायरस के बारे में सही जानकारी | Correct information about novel corona virus in Hindi

नई दिल्ली, 19 मार्च कोरोना वायरस का प्रकोप होने के साथ ही भारत में भी अफवाहों का बाजार गर्म है, कोई गौमूत्र पार्टी कर रहा है तो कोई एल्कोहल से कोरोना भगाने की सलाह दे रहा है। लेकिन इन अफवाहों से बचें और भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी दिशा निर्देशों या विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा जारी एडवायजरी का ही पालन करें।

नोवेल कोरोना वायरस के बारे में मिथक और तथ्य | Myths and Facts about Novel Corona Virus | Coronavirus tips in Hindi

चीनी सरकार के रेडियो चाइना इंटरनेशनल ने नोवेल कोरोना वायरस पर अफवाहों (Rumors on Novel Corona Virus ) का निराकरण किया है, आप भी उन्हें पढ़ सकते हैं, हम उन्हें साभार प्रकाशित कर रहे हैं –

पहली अफ़वाह है कि नोवेल कोरोना वायरस एयरोसोल के माध्यम से फैल सकता है। इसलिए हम खिड़की खोलकर ताज़ा हवा नहीं ले सकते, नहीं तो संक्रमित होने की आशंका है।

यह शब्द गलत है। वास्तव में नोवेल कोरोना वायरस मुख्य तौर पर श्वसन मार्ग से उड़ने वाले छोटे जलकण और घनिष्ठ स्पर्श से फैलता है। एयरोसोल अत्यधिक छोटे जलकण या ठोसकण होते हैं, जो लंबे समय तक हवा में उड़ते रहते हैं। अगर लंबे समय तक खिड़की नहीं खोलें, तो बंद वातावरण में एयरोसोल का घनत्व बढ़ेगा। इस स्थिति में वायरस के एयरोसोल के माध्यम से फैलाने की आशंका बनी रहती है।

फ्लू, नोरोवायरस, सार्स और चेचक जैसे संक्रामक रोग से पैदा एयरोसोल सिर्फ़ निश्चित स्थिति में फैल सकता है। उदाहरण के लिए मरीजों को बचाने के लिए एंडोट्रैचियल इंटुबैशन के दौरान छोटे एयरोसोल मरीजों के आसपास वाले क्षेत्र में उड़ते रहते हैं। ऐसी हालत में एयरोसोल से फैलाव हो सकता है। इसलिए सिर्फ़ निश्चित स्थिति में और बड़े घनत्व वाले वातावरण में नोवेल कोरोना वायरस एयरोसोल के माध्यम से फैल सकता है। अगर हम खिड़की खोलकर ताज़ा हवा लेते हैं, तो रोगी कक्षा में वायु बड़ी मात्रा में बहती है, ऐसे में वायु में मौजूद वायरस के एयरोसोल की सघनता काफी हद तक कम होगी। इसलिए हम रोज़ाना खिड़की खोलकर कमरे को हवादार बनाना चाहिए।

दूसरी अफ़वाह है कि तंबाकू के कण नैनो आकार के होते हैं। वे समान रूप से फेफड़े के सेल के ऊपर वितरित होते हैं, जिससे रक्षा आवरण तैयार हो सकता है और वायरस को रोका जा सकता है। इसलिए सिगरेट पीने से नोवेल कोरोना वायरस की रोकथाम की जा सकती है।

यह शब्द गलत है। वास्तव में तंबाकू जलने से दो तत्व पैदा होते हैं। एक है कार्बन मोनोऑक्साइड जैसी गैस, जिसका अनुपात 90 प्रतिशत है और दूसरा है निकोटीन और टार जैसे ठोस कण। चीनी रोग रोकथाम और नियंत्रण केंद्र के अनुसार इन ठोस कण का आकार 1 से 2.5 माइक्रोन तक होता है, जो नैनो आकार नहीं होता। जबकि सभी वायरस नैनो आकार के हैं। हम जानते हैं कि 1 माइक्रोन 1000 नैनोमीटर के बराबर होता है। इसलिए तंबाकू के कण वायरस नहीं रोक सकते, जैसा कि हम जाली से पानी को छानते हैं। यह अवास्तविक है।

तंबाकू वायरस को नहीं रोक सकता, इसके विपरीत हमारे श्वसन मार्ग को नुकसान पहुंचाता है। अनुसंधान से पता चलता है कि तंबाकू में 7000 से अधिक रासायनिक पदार्थ मौजूद हैं, जिनमें दसियों पदार्थ कैंसरजनक होते हैं। अनुसंधान यह भी बताता है कि सिगरेट पीने से फ्लू होने का खतरा भी बढ़ता है।

तीसरी अफ़वाह है कि सुपरमार्केट में जो सब्जी, फल और मांस रखे हुए हैं, लोग हाथों से इन्हें चुनते हैं। इसलिए नोवेल कोरोना वायरस सब्जी और फल जैसे खाद्य पदार्थों से फैल सकता है।

यह शब्द गलत है। वास्तव में वायरस बैक्टिरियल से अलग होते हैं। नोवेल कोरोना वायरस मुख्य तौर पर श्वसन मार्ग से उड़ने वाले छोटे जलकण और स्पर्श से फैलता है। नागरिकों को विवेकपूर्ण रूप से इसे समझना चाहिए और अत्यधिक भयभीत होने की आवश्यकता नहीं है। अभी तक ऐसा कोई सबूत नहीं है कि वायरस सब्जी, फल और मांस जैसे खाद्य पदार्थों में जीवित रह सकता है। अभी तक ऐसा कोई मामला सामने नहीं आया है कि सब्जी, फल और मांस खाने से नोवेल कोरोना वायरस निमोनिया का संक्रमण फैलता है। महामारी की रोकथाम और नियंत्रण के दौरान हमें गर्म खाना और पका हुआ भोजन खाना चाहिए, जबकि सुशी और साशिमी जैसे कच्चे या ठंडे खाने से बचना चाहिए।

चौथी अफ़वाह है कि ज्यादा शराब पीने से नोवेल कोरोना वायरस की रोकथाम की जा सकती है।

यह बात भी गलत है। वास्तव में 75 प्रतिशत अल्कोहल छिड़कने और साफ़ करने से वायरस को मारा जा सकता है, लेकिन पीना नहीं। शराब पीने के बाद यह हमारे पाचन तंत्र से गुजरती है। लेकिन नोवेल कोरोना वायरस निमोनिया श्वसन संबंधी रोग है।

चिकित्सा अल्कोहल से हमारे दोनों हाथ, मोबाइल फोन, दरवाज़े के हैंडल और लिफ्ट के बटन आदि साफ़ करने से वायरस मारने में मददगार है, लेकिन ज्यादा शराब पीने से वायरस की रोकथाम नहीं की जा सकती, बल्कि इसका हमारे शरीर को नुकसान पहुंचता है।

पांचवीं अफ़वाह है कि नोवेल कोरोना वायरस उच्च तापमान में नहीं रह सकता। इसलिए गर्म पानी से स्नान करने से वायरस को मर सकता है।

यह बात भी गलत है। वास्तव में कम से कम 56 डिग्री सेल्सीयस के वातावरण में 30 मिनट तक रखने के बाद नोवेल कोरोना वायरस को मारा जा सकता है। वस्तु का कीटाणुशोधन करते समय हम इस उपाय का प्रयोग कर सकते हैं, लेकिन अगर हम 56 डिग्री सेल्सीयस के पानी में 30 मिनट तक स्नान करते हैं, तो थर्मोप्लेजिया से ग्रस्त होंगे और जीवन के लिए खतरा होगा। क्योंकि हमारा शारीरिक तापमान आम तौर पर स्थिर रहता है। गर्म पानी से स्नान करने से शारीरिक तापमान नहीं बढ़ाया जा सकता, इसलिए वायरस की रोकथाम नहीं की जा सकती।

छठीं अफ़वाह है कि चाय पीने से नोवेल कोरोना वायरस की रोकथाम की जा सकती है।

यह शब्द गलत है। वास्तव में अब तक कोई सबूत नहीं मिला है कि चाय वायरस को रोकने में लाभदायक है। चाय पीने से हमारे शरीर में पानी की पूर्ति की जाती है। यह अच्छा है, लेकिन वायरस की रोकथाम से कोई संबंध नहीं होता। सबसे अच्छा उपाय है कि अकसर खिड़की खोलकर ताज़ा हवा लें, स्वच्छता पर ध्यान दें, अकसर हाथ साफ़ करें, पका हुआ भोजन खाएं और भीड़भाड़ वाली जगह पर न जाएं।

सातवीं अफ़वाह है कि लहसुन खाने से नोवेल कोरोना वायरस को मारा जा सकता है।

यह शब्द गलत है। वास्तव में लहसुन से निकाली गई वस्तु रोगाणु का नाश कर सकती है, लेकिन लहसुन और इससे निकाली गई वस्तु में बड़ा फ़र्क होता है। अब तक कोई सबूत नहीं मिला है कि लहसुन वायरस की रोकथाम कर सकता है। इसकी वायरस को मारने की संभावना भी नहीं होती।

आठवीं अफ़वाह है कि प्याज़ नोवेल कोरोना वायरस को अभिलग्र कर सकता है।

यह शब्द गलत है। वास्तव में कमरे में प्याज़ रखने से वायरस की रोकथाम नहीं की जा सकती। प्याज़ लंबे समय से रखने के बाद खराब हो जाता है। बेहतर है कि बाज़ार से प्याज़ खरीदने के बाद जल्दी से खाएं। प्याज़ खाना हमारे स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है।

 नौवीं अफ़वाह है कि नमकीन पानी से कुल्ला करने से वायरस की रोकथाम की जा सकती है।

यह शब्द गलत है। वास्तव में नमकीन पानी से कुल्ला करना मुंह और गला साफ़ करने के लिए लाभदायक है और गले की झिल्ली की सूजन दूर करने में मददगार है। लेकिन नोवेल कोरोना वायरस श्वसन मार्ग को नुकसान पहुंचाता है। कुल्ला करने से श्वसन मार्ग साफ़ नहीं हो सकता। अब तक कोई सबूत नहीं है कि नमकीन पानी नोवेल कोरोना वायरस को मार कर सकता है।

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पलाश विश्वास जन्म 18 मई 1958 एम ए अंग्रेजी साहित्य, डीएसबी कालेज नैनीताल, कुमाऊं विश्वविद्यालय दैनिक आवाज, प्रभात खबर, अमर उजाला, जागरण के बाद जनसत्ता में 1991 से 2016 तक सम्पादकीय में सेवारत रहने के उपरांत रिटायर होकर उत्तराखण्ड के उधमसिंह नगर में अपने गांव में बस गए और फिलहाल मासिक साहित्यिक पत्रिका प्रेरणा अंशु के कार्यकारी संपादक। उपन्यास अमेरिका से सावधान कहानी संग्रह- अंडे सेंते लोग, ईश्वर की गलती। सम्पादन- अनसुनी आवाज - मास्टर प्रताप सिंह चाहे तो परिचय में यह भी जोड़ सकते हैं- फीचर फिल्मों वसीयत और इमेजिनरी लाइन के लिए संवाद लेखन मणिपुर डायरी और लालगढ़ डायरी हिन्दी के अलावा अंग्रेजी औऱ बंगला में भी नियमित लेखन अंग्रेजी में विश्वभर के अखबारों में लेख प्रकाशित। 2003 से तीनों भाषाओं में ब्लॉग

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पलाश विश्वास वरिष्ठ पत्रकार, सामाजिक कार्यकर्ता एवं आंदोलनकर्मी हैं। आजीवन संघर्षरत रहना और दुर्बलतम की …