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2030 तक सर्दियों में दिल्ली का प्रदूषण एयरशेड स्तर के नियंत्रण से किया जा सकता है कम – टेरी

एयरशेड स्तर के नियंत्रण से 2030 तक दिल्ली की सर्दियों में प्रदूषण 35% तक किया जा सकता है कम : TERI

जब देश की राजधानी में एक बार फिर सांस फूलने लगी है, तब द एनर्जी एंड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट (TERI) के अज जारी अध्ययन से कुछ उम्मीद बंधती है। इस अध्ययन में PM2.5 की सांद्रता को कम करने के तरीकों (Ways to reduce the concentration of PM2.5) के साथ भविष्य के विभिन्न परिदृश्यों को प्रस्तुत किया गया है।

Cost-effectiveness of interventions for control of air pollution in Delhi

दिल्ली में वायु प्रदूषण के नियंत्रण के लिए हस्तक्षेपों की लागत-प्रभावशीलता‘ के शीर्षक से आज जारी और ब्लूमबर्ग फिलान्थ्रोपीज़ द्वारा समर्थित यह अध्ययन कई हस्तक्षेपों की लागत प्रभावशीलता की भी जांच करता हैं और PM2.5 सांद्रता में कमी ला सकने में इनकी प्रासंगिकता का भी आकलन करता है।

मूल रूप से यह अध्ययन भविष्य के तीन अनुमान लगाता है – अल्पावधि में 2022 के लिए, मध्यम अवधि में 2025 और विभिन्न हस्तक्षेपों के लिए वायु गुणवत्ता और लागत परिदृश्यों के आकलन के लिए लंबी अवधि में 2030 के लिए। अगर हम इसी गति पर रहे तो, इस अध्ययन के आधार वर्ष 2019 की तुलना में, साल 2022, 2025 और 2030 में सर्दियों में PM2.5 की सांद्रता क्रमशः 9%, 21% और 28% गिरेगी ऐसी उम्मीद है। अध्ययन में नोट किया गया है कि हालांकि PM2.5 की सांद्रता वर्षों में मामूली रूप से गिर सकती है, लेकिन स्तर 60μg per m³ के राष्ट्रीय मानकों से काफी ऊपर बने रहेंगे।

वर्ष 2019 में, दिल्ली में PM2.5 सांद्रता ने वार्षिक औसत मानकों का लगभग तीन गुना उल्लंघन किया।

परिवहन (23%), बिजली संयंत्रों सहित उद्योग (23%), और बायोमास बर्निंग (14%) 2019 के दौरान दिल्ली में सर्दियों के समय प्रचलित PM2.5 सांद्रता में प्रमुख योगदानकर्ता थे।

अगर NCR और बाकी एयरशेड – एक भौगोलिक क्षेत्र है जिसके भीतर हवा सीमित है-  में सर्दियों के मौसम में PM2.5  के स्तर को नीचे लाया जाना है तो उत्सर्जन को रोकने के लिए और अधिक कड़े नियंत्रण की बात की गई है।

बड़ी बात यह है कि एयरशेड स्तर के नियंत्रण से वर्ष 2030 तक सर्दियों के मौसम में PM2.5 सांद्रता को 35% तक कम किया जा सकता है।

पूरे साल एक समस्या के रूप में वायु प्रदूषण पर ध्यान हो केवल सर्दियों के मौसम में ही नहीं

TERI की महानिदेशक डॉ विभा धवन कहती हैं,

“वायु प्रदूषण पर केवल सर्दियों के मौसम में ही नहीं, बल्कि पूरे साल एक समस्या के रूप में इस पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए। एनसीआर में वायु गुणवत्ता (Air Quality in NCR) में सुधार के लिए पूरे एयरशेड में सख्त कार्रवाई की जरूरत है। आवश्यक गतिविधियों पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने के बजाय, स्वच्छ विकल्पों पर स्विच करना महत्वपूर्ण है।”

Air pollution level in Delhi

TERI में फेलो और सह-परियोजना अन्वेषक डॉ अंजू गोयल बताती हैं “दिल्ली में वायु प्रदूषण का स्तर क्षेत्रीय स्रोतों से और ज़्यादा खराब होता है जो शहर के भीतर स्थानीय स्रोतों को जोड़ते हैं। क्षेत्र में वायु गुणवत्ता के प्रभावी नियंत्रण के लिए एयरशेड-आधारित क्षेत्रीय पैमाने पर वायु गुणवत्ता नियंत्रण की आवश्यकता होती है”।

ब्लूमबर्ग फिलैंथ्रोपी में भारत के जलवायु और पर्यावरण कार्यक्रमों का नेतृत्व करने वाली प्रिया शंकर कहती हैं,

“वायु प्रदूषण संकट की गंभीरता और पैमाने को देखते हुए, हमें सरकार, व्यवसाय, नागरिक समाज और नागरिकों में बहु-स्तरीय कार्रवाई और सहयोग की आवश्यकता है। इस विश्लेषण से पता चलता है कि मज़बूत और निरंतर मिटिगेशन प्रयासों से दिल्ली की वायु गुणवत्ता में सुधार संभव है।”

अध्ययन में परिवहन, बायोमास और उद्योगों जैसे क्षेत्रों में विभिन्न नीतिगत हस्तक्षेपों से उत्सर्जन और PM2.5 सांद्रता में कमी की संभावनाओं का अनुमान लगाया गया है। यह वायु प्रदूषण को संबोधित करने के लिए एक एयरशेड दृष्टिकोण के स्वास्थ्य और आर्थिक सह-लाभों का भी आकलन करता है, और अगर 2022-2030 के बीच क्षेत्रीय PM2.5 नियंत्रण रणनीतियों को लागू किया जाता है तो 430 अरब रुपये (6.2 अरब डॉलर) के अतिरिक्त आर्थिक लाभ जैसे प्रत्यक्ष और संबद्ध लाभों की गणना करता है।

यह उम्मीद की जाती है कि एयरशेड क्षेत्र में वाहनों के विद्युतीकरण, थर्मल पावर प्लांटों के पर्यावरण मानकों के कार्यान्वयन, बेड़े के आधुनिकीकरण, सार्वजनिक परिवहन में शिफ़्ट आदि सहित हस्तक्षेपों से वार्षिक औसत मानक को पूरा किया जा सकता है। लेकिन सर्दियों के दौरान राष्ट्रीय परिवेशी वायु गुणवत्ता मानकों को प्राप्त करने के लिए अतिरिक्त नियंत्रण, जैसे कि खेतों में अमोनिया की रिलीज़ को रोकना, कचरा जलाने पर पूर्ण प्रतिबंध लागू करना, कोयला आधारित बिजली संयंत्रों को स्वच्छ ऊर्जा में परिवर्तित करना, सबसे कठोर धूल दमन नियंत्रण, ईंट भट्ठों के लिए और स्वच्छ प्रौद्योगिकी, इंडक्शन कुक-स्टोव का उपयोग, और निर्माण गतिविधियों से धूल के सख्त नियंत्रण की आवश्यकता है।

अध्ययन के अनुसार, सामान्य की तरह व्यवसाय परिदृश्य में पूरे एयरशेड में वैकल्पिक नियंत्रण रणनीतियों के कार्यान्वयन से 2022 में 14,000 से अधिक मौतों और 2030 में दिल्ली NCR में 12,000 मौतों से बचा जा सकता है।

इस टाली गई मृतकों की संख्या के परिणामस्वरूप वर्ष 2022-2030 में लगभग 480-430 बिलियन ($6.9 – $6.2 बिलियन) का आर्थिक लाभ हो सकता है।

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