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दिल के दौरे के खतरे को कम करता है बिनौला तेल !

Cottonseed oil reduces the risk of heart attack

Cottonseed Oil Benefits & Side Effects In Hindi

नई दिल्ली, 10 अप्रैल 2021. एक खबर के मुताबिक केंद्रीय कपास प्रौद्योगिकी अनुसंधान संस्थान मुंबई (ICAR-Central Institute for Research on Cotton Technology) के वैज्ञानिकों का दावा है कि कपास के बिनौले का तेल (cottonseed oil in Hindi) अनेक विशिष्ट गुणों से भरपूर है जो मानव स्वास्थ्य के लिए बहुत ही उपयुक्त है तथा इसके नियमित उपयोग से दिल का दौरा पड़ने का खतरा बहुत कम हो जाता है।

संस्थान के वैज्ञानिकों ने अपने एक अध्ययन में कहा है कि बिनौले का तेल एक उच्चकोटि का खाद्य तेल (Edible oil) है जो परिष्कृत करने के बाद मानव स्वास्थ्य के लिए अति उपयोगी है। इसका खाने में इस्तेमाल से दिल के दौरे के खतरा (Risk of heart attack) बहुत कम हो जाता है।

अन्य खाद्य तेलों की तुलना में बिनौले का तेल बेहतर क्यों होता है

दिन प्रतिदिन के आहार में बिनौले का तेल का उपयोग (Use of cottonseed oil) किया जा सकता है। चाहे वह तेल के मिश्रण के तौर पर हो या फिर वनस्पति या कैप्सूल के रूप इसका उपयोग स्वास्थ्यवर्द्धक है। बिनौले के तेल में संतृप्त वसा अम्ल कम होता है जिसके कारण इसे अन्य खाद्य तेलों की तुलना में बेहतर माना जाता है। 

संतृप्त वसा अम्ल को हृदय के लिए हानिकारक माना जाता है। यह उन विशेष तेलों में से है जिसे अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन ने ओके फूड की सूची में दर्ज किया है।

बिनौले का तेल तेल में 50 प्रतिशत से अधिक लीनोलिक वसा अम्ल (Linoleic fatty acids) पाया जाता है जो मनुष्य के स्वास्थ्य के लिए बहुत जरूरी है।

लीनोलिक वसा अम्ल शरीर के हारमोन्स को संश्लेषित करने के लिए बहुत जरूरी है जो हमारे शरीर के आंतरिक अवयवों की कार्यक्षमता बढ़ाती है। यह अम्ल मनुष्य के शरीर में नहीं बन सकता है। इस अम्ल की दूसरी विशेषता यह है कि कोलेस्ट्रोल की वजह से केरोनरी धमनियों में होने वाले रक्त प्रवाह के अवरोध को रोकता है।

बिनौले के तेल में पोषक तत्व

बिनौले के तेल में नौ कैलोरी ग्राम पोषक तत्व होते हैं। तेल की पाचन क्षमता करीब 97 प्रतिशत है और इसकी तुलना किसी भी उच्चकोटि के तेल जैसे मूंगफली, सरसों या नारियल के तेल से की जा सकती है। बिनौले के अधिकांश किस्मों में गासीपाल नामक एक तत्व पाया जाता है जो एक अमाशय वाले जीवों के लिए हानिकारक है। गासीपाल को रासायनिक प्रक्रियाओं द्वारा आसानी से अलग कर दिया जाता है जिसके बाद इसका रंग सुनहरा होता है और विटामिन ई से युक्त होता है।

एक किलो बिनौले में कितना तेल निकलता है?

देश में सालाना लगभग 110 लाख टन बिनौले का उत्पादन होता है जिसके 95 प्रतिशत हिस्से का उपयोग तेल निकालने के लिए किया जाता है। बिनौले में तेल की मात्रा 17 से 25 प्रतिशत तक होती है लेकिन वैज्ञानिक तरीके से तेल नहीं निकालने के कारण इसमें से 10 से 12 प्रतिशत ही तेल निकल पाता है। सही तरीके से तेल नहीं निकाले जाने के कारण सालाना सात लाख टन तेल के नुकसान होने का अनुमान है। देश में वैज्ञानिकों ने आधुनिक विधि से बिनौला से अधिक से अधिक मात्रा में तेल निकालने की तकनीक विकसित कर ली है।

Can cottonseed oil cause acne?

क्या बिनौले का तेल मुँहासे का कारण बन सकता है?

मुँहासे के कारण के बारे में कई मिथक हैं। कुछ लोग अपने मुँहासों के लिए खाद्य पदार्थों को दोषी मानते हैं। कुछ लोग सोचते हैं कि गंदी त्वचा के कारण मुँहासे होते हैं। कुछ लोग सोचते हैं कि बिनौले का तेल खाने से मुँहासे होते हैं। लेकिन इस बात के बहुत कम सबूत हैं। ज्यादातर लोगों के मुंहासों पर इन बातों का ज्यादा असर नहीं पड़ता है।

मुँहासे सभी जातियों और उम्र के लोगों को होते हैं। 11 और 30 साल की उम्र के बीच हर 5 में से 4 लोगों पर किसी न किसी मौके पर मुँहासों का प्रकोप होता है। यह किशोरों और युवा वयस्कों में सबसे आम है।

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