माले ने दिल्ली सीमा पर जारी किसान आंदोलन के समर्थन में राज्यव्यापी प्रदर्शन किया

भाकपा (माले) ने मोदी सरकार के तीन कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग को लेकर पंजाब, हरियाणा, यूपी समेत अन्य राज्यों से दिल्ली की सीमा पर पिछले चार-पांच दिनों से डटे किसानों के आंदोलन के समर्थन में सोमवार को उत्तर प्रदेश में राज्यव्यापी प्रदर्शन किया।

The CPI (ML) held a statewide protest in support of the farmers’ movement

पार्टी केंद्रीय कमेटी सदस्य मनीष शर्मा की वाराणसी में गिरफ्तारी की निंदा की

लखनऊ, 30 नवंबर। भाकपा (माले) ने मोदी सरकार के तीन कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग को लेकर पंजाब, हरियाणा, यूपी समेत अन्य राज्यों से दिल्ली की सीमा पर पिछले चार-पांच दिनों से डटे किसानों के आंदोलन के समर्थन में सोमवार को उत्तर प्रदेश में राज्यव्यापी प्रदर्शन किया।

पार्टी ने किसान आंदोलन पर दमन की निंदा की है और मांगे पूरी होने तक किसानों के समर्थन में कंधे-से-कंधा मिलाकर संघर्ष करने की प्रतिबद्धता जताई है।

राज्य सचिव सुधाकर यादव ने कहा कि मोदी सरकार खेती-किसानी को भी कारपोरेट के हवाले कर देना चाहती है। सरकार द्वारा जो तीन कृषि कानून बनाये गए हैं, वे इसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए हैं। इससे किसान कारपोरेट के गुलाम बन जाएंगे। खेती की जमीन किसान के हाथ से निकल कर देशी-विदेशी बड़े पूंजीपतियों – अडानियों, अम्बानियों – के हाथ में चली जायेगी। वे अब कारपोरेट खेती करेंगे। प्राकृतिक संसाधनों से लेकर सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों तक मोदी सरकार पहले से ही कारपोरेट को सौंपने काम कर रही है। भारत पेट्रोलियम (बीपीसीएल) ताजा उदाहरण है।

माले नेता ने कहा कि न्यूनतम समर्थन मूल्य पर किसानों की फसल की खरीद से सरकार पल्ला झाड़ रही है। मंडी व्यवस्था समाप्त कर मोदी सरकार ने किसानों पर वज्रपात किया है। धान का सरकारी समर्थन मूल्य 1868 रु0 क्विंटल तय है, मगर सरकारी क्रय केंद्र पर धान खरीदा नहीं जा रहा है क्योंकि सरकारी खरीद व्यवस्था ध्वस्त है। मजबूरन किसानों को हजार-बारह सौ रुपये क्विंटल में अपना धान खुले बाजार में और आढ़तियों को बेचना पड़ रहा है। अन्य फसलों की खरीद का भी यही हाल है। रोज की रसोई में शामिल वस्तुओं यथा अनाज, आलू, प्याज आदि को आवश्यक वस्तुओं की श्रेणी से बाहर कर कालाबाजारियों-जमाखोरों को खुली छूट दे दी गयी है।

उन्होंने कहा कि भाजपा और मोदी सरकार अन्नदाताओं की मांगें न मानकर उनके आंदोलन को बदनाम करने का कुचक्र रच रही है। लेकिन इससे आंदोलन कमजोर पड़ने के बजाय और तेज होगा। किसानों से वार्ता के नामपर खानापूरी न कर सीधे-सीधे तीनों काले कृषि कानूनों को निरस्त करने की सरकार को घोषणा करनी चाहिए।

किसान आंदोलन के समर्थन में आज गाजीपुर, बलिया, आजमगढ़, चंदौली, सीतापुर, जालौन, रायबरेली आदि जिलों में माले और अखिल भारतीय किसान महासभा ने संयुक्त प्रदर्शन किये और गांव-गांव में मोदी सरकार का पुतला फूंका।

इस बीच, आज एक अन्य घटनाक्रम में वाराणसी में भाकपा (माले) के केंद्रीय कमेटी सदस्य मनीष शर्मा को चेतगंज थाने की पुलिस ने उनके आवास से गिरफ्तार कर लिया। संबंधित थाने की पुलिस का कहना है कि पीएम मोदी के वाराणसी दौरे के मद्देनजर उन्हें हिरासत में लिया गया है। पार्टी राज्य सचिव सुधाकर ने इस तरह से माले नेता को गिरफ्तार करने को व्यक्तिगत स्वतंत्रता का हनन और योगी सरकार की दमनात्मक कार्रवाई बताया। उन्होंने इसकी तीखी निंदा की और अविलंब बिना शर्त रिहाई की मांग की।

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उपाध्याय अमलेन्दु:
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