लखनऊ में प्रदर्शनकारियों की गिरफ्तारी की भाकपा (माले) ने कड़ी निंदा की

CPI (ML) strongly condemns arrest of protesters in Lucknow

लखनऊ, 17 सितंबर। भाकपा (माले) की राज्य इकाई ने योगी सरकार के दमनकारी कानून ‘उत्तर प्रदेश विशेष सुरक्षा बल अधिनियम’ के खिलाफ गुरुवार को राजधानी के परिवर्तन चौक से जिलाधिकारी कार्यालय तक मार्च निकाल रहे पार्टी कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी और उनके बैनर-पोस्टर-झंडे छिनने को अलोकतांत्रिक बताते हुए कड़ी निंदा की है।

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राज्य सचिव सुधाकर यादव ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन की भी इजाजत न देना लोकतंत्र का गला दबाने जैसा है। यह लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला है। योगी सरकार आंदोलनकारियों, राजनीतिक विरोधियों व असहमति रखनेवालों के दमन के लिए कुख्यात होती जा रही है। लेकिन हम जनता के संवैधानिक अधिकारों पर इन हमलों के खिलाफ अपनी आवाज और ऊंची करेंगे। दमन का जवाब लोकतांत्रिक प्रतिरोध को तेज कर देंगे।

ज्ञातव्य है कि आज प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिन पर युवा संगठनों ने प्रतिवाद स्वरूप ‘देशव्यापी बेरोजगार दिवस’ का आह्वान किया था। आइसा के छात्र भी रोजगार को लेकर प्रधानमंत्री की वादाखिलाफी के खिलाफ मार्च में शामिल होने आए थे। प्रदर्शनकारी अभी इकट्ठा ही हो रहे थे कि पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया।

गिरफ्तार व्यक्तियों में भाकपा (माले) के जिला प्रभारी रमेश सिंह सेंगर, इनौस के जिला संयोजक राजीव गुप्ता, ओम प्रकाश, आइसा के राज्य सचिव शिवा रजवार, आइसा से अतुल, शिवेंद्र, तुषार, एक्टू के कुमार मधुसूदन मगन, चन्द्रभान गुप्ता, रामसुंदर निषाद, रामजीवन राणा, बाबूराम कुशवाहा, विश्वकर्मा चौहान, मूलराज, रमेश प्रजापति हैं।

राज्य सचिव ने सभी की बिना शर्त रिहाई की मांग की।

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उपाध्याय अमलेन्दु:
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