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माले ने दलित प्रोफेसर रविकांत पर शारीरिक हमले की कोशिश की कड़ी निंदा की

CPI(ML) strongly condemns attempt to physically attack Dalit professor Ravi Kant

उमर खालिद, शर्जील इमाम समेत देशद्रोह की धारा के सभी आरोपी रिहा हों

लखनऊ, 12 मई। भाकपा (माले) की राज्य इकाई ने लखनऊ विवि में हिंदी के प्रोफेसर रविकांत पर मंगलवार को संघ समर्थित संगठन से जुड़े तत्वों द्वारा शारीरिक हमला करने की कोशिश की कड़ी निंदा की है।

पार्टी ने इसे परिसर में भगवा गुंडागर्दी का प्रदर्शन बताते हुए कहा कि इस तरह की कार्रवाइयों को सत्तारूढ़ दल का शह प्राप्त है।

माले के राज्य सचिव सुधाकर यादव ने जारी एक बयान में कहा कि संघ और उससे जुड़े संगठन सिर्फ ‘हां में हां मिलाना’ सुनना-देखना चाहते हैं। असहमति उन्हें असहनीय है क्योंकि उनकी विचारधारा फासीवादी है। वे देश के संविधान, उसके द्वारा दी गई अभिव्यक्ति की आजादी और लोकतंत्र पर ताला लगाना चाहते हैं।

कामरेड सुधाकर ने कहा कि जिस तरह से दलित प्रोफेसर को गालियों के साथ अमर्यादित नारों का निशाना बनाया गया, वह सरासर गैर-लोकतांत्रिक और अपने आप में आपराधिक कृत्य है। परिसर में ऐसा करने वालों के खिलाफ विवि प्रशासन मौन क्यों साधे रहा और सफाई देने के बजाए कार्रवाई क्यों नहीं की। इससे अफवाहबाजी करने और माहौल बिगाड़ने वाले तत्वों को ही बल मिलता है।

माले नेता ने नामजद अभियुक्तों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और प्रोफेसर की जानमाल की रक्षा करने की मांग की।

एक अन्य बयान में, माले राज्य सचिव ने देशद्रोह की धारा 124ए पर सर्वोच्च न्यायालय द्वारा अस्थायी रोक लगाए जाने को लोकतांत्रिक संघर्षों की उपलब्धि बताते हुए उमर खालिद, शरजिल इमाम समेत इस धारा में जेल भेजे गए सभी लोगों की फौरन रिहाई की मांग की।

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