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इन 33 फीसद अपराधी जनप्रतिनिधियों का एनकाउंटर कौन करेगा ?

इन 33 फीसद अपराधी जनप्रतिनिधियों का एनकाउंटर कौन करेगा ?

महिलाओं के साथ अपराधी करने वाले 33 फीसद जनप्रतिनिधियों का एनकाउंटर कौन करेगा ?

Crimes with women mostly involved leaders from different parties.

नई दिल्ली। देश की जिम्मेदार संस्थाओं में बैठे जो लोग हैदराबाद एनकाउंटर पर खुशी (Happiness at Hyderabad encounter) मना रहे हैं वे यह नहीं समझ पा रहे हैं पर इस एनकाउंटर पर जनता का जश्न मनाना उनकी विफलता का प्रतीक है। इस जश्न में जो विभिन्न दलों के नेता शामिल हो रहे हैं वे यह समझने को तैयार नहीं कि महिलाओं के साथ होने वाले अपराधों में अधिकतर विभिन्न दलों से जुड़े नेता ही शामिल हैं। जिनमें बड़े स्तर पर जनप्रतिनिधि हैं। हां यह कहा जा सकता है कि इस एनकाउंटर पर जिस तरह से जनता खुशी जाहिर की है उससे यह तो साबित हो चुका है कि अब जनता सत्ता और कानून से विश्वास उठ गया है।

देश में बने इस तालिबानी माहौल के लिए न केवल न्यायपालिका बल्कि विभिन्न राज्यों में चल रही सरकारें भी शामिल हैं। यह संविधान की सुरक्षा के लिए बनाए गए तंत्रों पर उठता विश्वास ही है कि अब लोग महिलाओं से जुड़े अपराध मामले में बंद कमरे में नहीं बल्कि बीच सड़क पर न्याय (Justice on the road) चाहते हैं।

यदि देश की जनता ने अब सड़क पर न्याय चाहने का मन बना ही लिया है तो उसे यह भी समझने की जरूरत है कि महिलाओं के साथ अपराध के सबसे अधिक मामले राजनीतिक दलों से जुड़े नेताओं पर हैं। यदि देश की जनता महिलाओं की सुरक्षा चाहती हैं। विभिन्न प्रताड़ना की शिकार हुईं महिलाओं को न्याय मिले तो विभिन्न राजनीतिक दलों में जो हवस के भूखे भेड़ियें बैठे हैं उनके खिलाफ सड़कों पर उतरकर मोर्चा खोलना होगा।

जमीनी हकीकत यह है कि महिलाओं के साथ होने वाले अधिकतर अपराधों में या तो राजनीतिक दलों से जुड़े नेता सीधे सक्रिय होते हैं या फिर उनसे संपर्क रखने वाला व्यक्ति इस तरह का दुस्साहस करता है।

यह अपने आप में शर्मनाक है कि महिलाओं के साथ होने वाले अपराधों में देश के सबसे बड़े सदन में पहुंचे जनप्रतिनिधि भी शामिल हैं।

यदि बात आंकड़ों की करें तो देश के 48 सांसद और विधायकों पर महिलाओं के होने वाले अपराध के केस दर्ज हैं और इसमें भाजपा नेताओं की संख्या सबसे ज्यादा 12 है। यह आंकड़ा कोई मौखिक रूप से नहीं है।

देश में बढ़ती रेप  की घटनाओं के खिलाफ बढ़ते गुस्से के बीच एसोसिएशन फार डेमोक्रेटिक रिफार्म (एडीआर) ने हाल ही में यह रिपोर्ट जारी की है। रिपोर्ट के मुताबिक देश के 33 फीसदी यानी 1580 सांसद-विधायक ऐसे हैं, जिनके खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें से 48 महिलाओं के खिलाफ अपराध के  आरोपी हैं, जिनमें 45 विधायक और तीन सांसद हैं। इन जनप्रतिनिधियों पर महिला उत्पीड़न, अगवा करने, शादी के लिए दबाव डालने, बलात्कार, घरेलू हिंसा और मानव तस्करी जैसे अपराध दर्ज हैं।

यदि पार्टियों के लिहाज से बात की जाए तो केंद्र की सत्ता में काबिज भाजपा के सबसे ज्यादा 12 सांसद-विधायकों के खिलाफ केस दर्ज हैं। इसके बाद शिवसेना के सात और तृणमूल कांग्रेस के छह जनप्रतिनिधि महिलाओं के साथ होने वाले अपराध के दागी हैं।

ऐसा भी नहीं है कि यह रिपोर्ट विभिन्न थानों से एकत्र की गई है। यह रिपोर्ट देश के कुल 4845 जनप्रतिनिधियों के चुनावी एफिडेविट के विश्लेषण पर आधारित है। इसमें कुल 776 सांसदों में से 768 सांसद और 4120 विधायकों में से 4077 विधायकों के हलफनामे हैं।

यह अपने आप में दिलचस्प है कि जो पार्टियां हैदराबाद एनकाउंटर पर पुलिस की तारीफ करती नहीं थक रही हैं वे ही राजनीतिक पार्टियां महिलाओं के खिलाफ अपराध के आरोपियों को टिकट थमा दे रही हैं।

राज्यवार देखें तो महाराष्ट्र के सबसे ज्यादा 12 सांसद और विधायक आरोपी हैं। इसके बाद पश्चिम बंगाल के 11, ओडिशा और आंध्र प्रदेश के पांच-पांच जनप्रतिनिधि महिलाओं के साथ होने वाले अपराधों में शामिल हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक पिछले पांच साल में रेप के आरोपी 28 नेताओं को विभिन्न दलों ने टिकट दिये हैं।

रेप के आरोपी 14 नेताओं ने निर्दलीय लोकसभा, राज्यसभा और विधानसभा के चुनाव लड़े। वहीं पिछले पांच साल में महिलाओं के साथ होने वाले अपराध के दागी 327 को टिकट मिला और 118 ऐसे नेताओं ने निर्दलीय चुनाव लड़ा।

हैदराबाद एनकाउंटर मामले में भाजपा और बसपा ने सबसे अधिक पुलिस की तारीफ की है। वह बात दूसरी है कि इन्हीं पार्टियों ने सबसे अधिक आरोपिायें का टिकट दिये हैं।

गत पांच साल में महिलाओं के खिलाफ अपराध के आरोपी 47 नेताओं को भाजपा ने और 35 को बसपा ने टिकट दिया है। कांग्रेस ने 24 को टिकट दिया है।

ऐसे में प्रश्न उठता है कि जो राजनीतिक दल हैदराबाद एनकाउंटर पर खुश हो रहे हैं या फिर जनता की सहानुभूति बटोरने की कोशिश कर रहे हैं क्या वे अपने ही पार्टी के रेप के आरोपी नेताओं का एनकाउंटर कराने का दम रखते हैं। जवाब न ही आएगा।

CHARAN SINGH RAJPUT, चरण सिंह राजपूत, लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं। हां अब जब देश में माहौल बना है तो जनता को विभिन्न दलों में बैठे उन नेताओं के एनकाउंटर की मांग करनी चाहिए जो किसी न किसी मामले में महिलाओं के साथ अपराध करने में जुड़े हैं।

लोगों को यह भी समझना होगा कि इस तरह के एक या दो एनकाउंटर से देश का भला नहीं होने वाला है। पॉवर और रुतबा लेकर बैठे प्रभावशाली लोगों के खिलाफ जब तक इस तरह का अभियान नहीं छेड़ा जाएगा। प्रभावशाली और रुतबे वाले अपराधियों का एनकाउंटर नहीं होगा तब तक इस तरह के मामले नहीं रुकने वाले हैं। यदि देश के आजाद होने से लेकर अब तक का सर्वे किया जाए तो न कितने नेताओं पर महिलाओं के साथ गंभीर से गंभीर अपराध करने के आरोप लगे हैं तो हर अभियान को राजनीतिक दलों के खिलाफ छेड़ने की जरूरत है। यही नहीं चलेगा कि जिस पार्टी से आपका हित जुड़ा है उसके एजेंडे पर काम करने लगें।

महिलाओं के साथ अपराध करने वाले नेता हर दल में मौजूद हैं। वह बात दूसरी है कि ये लोग समय देखकर मेढक की तरह अपना रंग बदल लेते हैं। यदि वास्तव में समाज की गंदगी दूर करनी है तो ऊपर से करनी होगी जो प्रभावशाली लोग अपनी पॉवर और रुतबे का इस्तेमाल करके बहू बेटियों की इज्जत से खिलवाड़ करते हैं, उनके खिलाफ मोर्चा खोलने की जरूरत है। राजनीतिक ही नहीं किसी सरकारी या निजी कार्यालय का भी सर्वे कर लिया जाए तो वहां से ही सब माजरा समझ में आ जाएगा।

चरण सिंह राजपूत

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