मानव विकास सूचकांक : सबसे देश में सबसे पिछड़ा है आदिवासी और दलित

Budget 2020

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मानव विकास सूचकांक में सबसे देश में सबसे पिछड़ा है आदिवासी और दलित

केंद्रीय बजट में आदिवासी व दलितों के लिए तीन प्रतिशत ही की गयी बढ़ोतरी

रांची, 05 फरवरी 2020. आसन्न आर्थिक मंदी की पृष्ठभूमि में वित्त मंत्रालय ने एक फरवरी को आम बजट (Union Budget) पेश किया। मगर केंद्रीय बजट में दलित व आदिवासियों को उपेक्षित किया गया (Dalits and Adivasis were neglected in the Union Budget) है। केंद्रीय बजट में दलित आदिवासी समुदाय के लिए क्या है?

इन्हीं मुद्दों को लेकर राष्ट्रीय दलित मानवाधिकार अभियान को दलित आर्थिक अधिकार आंदोलन-एनसीडीएचआर और भोजन के अधिकार अभियान, झारखंड द्वारा अशोक नगर रोड नं.—4 बी, स्थित अभियान कार्यालय में एक प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया।

प्रेस वार्ता में बजट पर चर्चा करते हुए बलराम ने कहा कि अगर हम केंद्रीय बजट 2020-21 में देखें तो हम पाते हैं कि अनुसूचित जाति के लिए 83,257 करोड़ रुपये आंवटित किए गए तथा अनुसूचित जनजाति के लिए 53,653 करोड़ रुपये। ये धन राशि अ.जा. की 323 स्कीमों के लिए व अ.ज.जा. की 331 स्कीमों के अंतर्गत आवंटित की गई हैं। यह राशि अनुसूचित जाति के कल्याण एवं अनुसूचित जनजाति के कल्याण के लिए दी गई हैं। सरकार लगातार दलित और आदिवासी समुदायों के विकास की आवश्यकता पर बात करती रही है। हालांकि यह वित्त वर्ष 2020-21 के बजट में प्रतिबिंबित नहीं होता है। अनुसूचित जाति के बजट में लक्षित योजनाओं का अनुपात 19.43 है यह बजट 16.174 करोड़ आवंटन है। इसी प्रकार अनुसूचित जनजाति का बजट 32.2 है, यह बजट 19,428 करोड़ है।

उन्होंने कहा कि वास्तव में ये सामान्य योजनाएं हैं जिन्हें अ.जा. और अ.ज.जा. का आवरण पहना दिया गया है। ये वास्तव में अ.जा. और अ.ज.जा. समुदाय की गुणवत्ता को पूरा नहीं करतीं। क्योंकि वास्तव में ये सामान्य स्कीमें हैं इसलिए ये अजा/अजजा के और सामान्य आबादी के फासले को कम नहीं करतीं।

दलित आर्थिक अधिकार आंदोलन-एनसीडीएचआर के राज्य समन्वयक मिथिलेश कुमार ने कहा कि अगर बजट को देखें तो हम पाते हैं कि केंद्रीय बजट में दलित आदिवासियों के लिए भेद-भाव किया गया। ऊपर से इसमें दलित व आदिवासी महिलाएं की इस बजट में प्राथमिकताएं नहीं है।

उन्होंने कहा कि दलित और आदिवासी महिलाओं को बहुत कम प्राथमिकता दी गई है या कहना चाहिए कि प्राथमिकता नहीं दी गई है। यूनियन बजट 2020-21 में दलित महिलाओं (Amount allocated for Dalit women in Union Budget 2020-21) के लिए 0.8 प्रतिशत है। यानी उनके लिए 7986.91 सीएसएस और सीएस द्वारा करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। आदिवासी महिलाओं के लिए 0.34 प्रतिशत यानी 3174 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। लड़कियों के लिए बड़ी मांग वाली पोस्ट मैट्रिक स्कोलरशिप में लड़कियों के लिए पर्याप्त आवटन नहीं किया गया है। अजा लड़कियों के लिए 251 करोड़ और अजजा लड़कियों के लिए 82 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। पिछले वर्ष की तुलना में देखा जाए तो बहुत मामूली बढ़ोत्तरी की गई है। ये महिलाएं आर्थिक संकट से भी गुजर रही हैं। खासकर ग्रामीण भारत में उनके आय के साधन सिमट गए हैं। जैसा कि एनएसएसओ की रिपोर्ट बताती है कि पिछले छह साल में 2.8 करोड़ ग्रामीण महिलाएं ग्रामीण बाजार से बाहर हो गई हैं। बजट आवंटन अजा महिलाओं के लिए 195 करोड़ और अजजा महिलाओं के लिए 87 करोड़ रुपये का आवंटन दिखाकर एक उदासीन तस्वीर पेश करता है।

Dalit and tribal communities are the most backward in the country in human index.

उन्होंने कहा कि मानव सूचकांक में देश में सबसे पिछड़ा है दलित व आदिवासी समुदाय। झारखंड नरेगा वॉच के राज्य समन्वयक जेम्स हेंरेज तथा भोजन का अधिकार अभियान के राज्य संयोजक अशर्फी नंद प्रसाद ने कहा कि इस बजट में खास कर दलित व आदिवासी समुदाय के बच्चों के साथ भी अन्याय हुआ है। क्योंकि देश में कुपोषण जैसी गंभीर समस्या है। बच्चे जो कि देश की कुल आबादी का 29.50  प्रतिशत (0-14 वर्ष) प्रतिशत होते हैं, वित्त योजना बनाने वालों की दृष्टि में उपेक्षित रहते हैं। वर्तमान वित्त बजट 2020-21 में भी उनकी उपेक्षा की गई है। उन पर बहुत कम ध्यान दिया गया है। उनकी बुनियादी आवश्यकताएं जैसे — स्वास्थ्य, शिक्षा और बच्चों के अध्किारों की सुरक्षा, बाल विवाह, बालश्रम आदि पर फोकस नहीं किया गया है। राष्ट्रीय बाल श्रम प्रोजेक्ट के अजा एवं अजजा के बच्चों के लिए सिर्फ 30 करोड़ आवंटित किया गया। यह सरकार की अजा व अजजा के बच्चों के प्रति उपेक्षा को दर्शाता है।

उन्होंने कहा कि बच्चों की जरूरत के लिए स्टेटमेंट 12 के तहत सिर्फ 96,042 करोड़ रुपयों का आवंटन किया गया है। बच्चों के लिए बजट के आवंटन का विश्लेषण करने पर पता चलता है कि अजा और अजजा के बच्चों के लिए काफी कम बजट का प्रावधन किया गया है। विभिन्न मंत्रालयों की अनुसूचित जाति के बच्चों की 20 स्कीमों का अघ्ययन करने पर पता चलता है कि उनके लिए 20,838 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं वहीं अनुसूचित जनजाति के बच्चों के लिए 12,635 करोड़ रुपये 17 स्कीमों के तहत आवंटित किए गए हैं। प्रेस वर्ता में तारामणी साहू, अकाश रंजन, राकेश रौशन किड़ो सहित कई लोग शामिल थे।

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