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दिल्ली हिंसा : थाने में पुलिस ने की वकीलों की पिटाई, महिला अधिवक्ता को भी नहीं बख्शा !

Delhi Violence: Police beat up lawyers in police station, women lawyer is not spared either!

नई दिल्ली, 26 फरवरी 2020. दिल्ली में बिगड़ते माहौल के बीच एक और भयावह खबर आई है। अधिवक्ताओं के एक समूह ने आरोप लगाया है कि उन्हें जगतपुरी पुलिस स्टेशन में पुलिस द्वारा पीटा गया।

एडवोकेट अवनि बंसल, अनस तनवीर, तमन्ना पंकज, आकिफ आब्दी व प्रशांत दुबे की ओर से प्राप्त एक संदेश में कहा गया है कि

“जगतपुरी पुलिस स्टेशन में हम वकीलों में से एक समूह को पुलिस ने पीटा। हम अनुरोध कर रहे थे कि हमें उन बंदियों से मिलने दिया जाए, जिन्हें पुलिस ने खुरेजी प्रोटेस्ट साइट से गिरफ्तार किया है। उन्होंने हमें बंदियों से मिलने नहीं दिया। जैसे ही हमने वीडियो को रिकॉर्ड करना शुरू किया और फिर हमें लाठियों से पीटा, फोन छीन लिया। एक पुलिस अधिकारी ने महिला वकीलों को धक्का देना शुरू कर दिया, इस पर हमाने विरोध किया, तो और अधिक पुलिस हमें पुलिस स्टेशन के बाहर धकेलने में शामिल हो गई।”

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इससे पहले एडवोकेट तमन्ना पंकज ने फेसबुक पर लिखा था,

“हम पुलिस स्टेशन जगतपुरी में हैं, पुलिस अधिकारियों (एचसी मनोज भाटिया) ने बंदियों के साथ वकीलों की बैठक से आधिकारिक तौर पर यह कहते हुए इनकार कर दिया कि थाने में कोई अधिकारी नहीं हैं। 15 से अधिक लोगों को हिरासत में लिए जाने की सूचना है।”

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Arun Maheshwari - अरुण माहेश्वरी, लेखक सुप्रसिद्ध मार्क्सवादी आलोचक, सामाजिक-आर्थिक विषयों के टिप्पणीकार एवं पत्रकार हैं। छात्र जीवन से ही मार्क्सवादी राजनीति और साहित्य-आन्दोलन से जुड़ाव और सी.पी.आई.(एम.) के मुखपत्र ‘स्वाधीनता’ से सम्बद्ध। साहित्यिक पत्रिका ‘कलम’ का सम्पादन। जनवादी लेखक संघ के केन्द्रीय सचिव एवं पश्चिम बंगाल के राज्य सचिव। वह हस्तक्षेप के सम्मानित स्तंभकार हैं।

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