सामाजिक कार्यकर्ताओं को बेशर्त रिहा करने की मांग : सड़क पर उतरेंगे बुद्धिजीवी

Demand for social workers to be released unconditionally: intellectuals will hit the road

पटना, 23 नवंबर 2020. देश में हर साल 26 नवंबर को संविधान दिवस मनाया जाता है. इस खास दिन पर संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर को याद किया जाता है. इस ऐतिहासिक दिवस पर राजधानी की बुद्धिजीवी सड़क पर उतरेंगे. 11 बजे आकाशवाणी पटना से चलकर गांधी मैदान तक जाएंगे. भीमा कोरेगांव केस में  गिरफ्तार करके जेल में बंद किए गए नामचीन सामाजिक कार्यकर्ताओं को बेशर्त रिहा करने की मांग करेंगे.

राजधानी पटना में स्थित सेवा केंद्र में संविधान का संरक्षण हमारा दायित्व को लेकर बैठक की गयी. इस महत्वपूर्ण बैठक में फादर जोस, फादर अमल राज, फादर निशांत, सिस्टर दौरोथी, मंजू डुंगडुंग कंचनबाला आदि ने मिलकर नागरिक अधिकार मंच गठित की गयी. 26 नवम्बर को संविधान दिवस के अवसर पर 11 बजे आकाशवाणी पटना से चलकर गांधी मैदान तक जाएंगे. राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के भव्य प्रतिमा के पास संविधान दिवस समारोह मनाएंगे.

एकता परिषद के उपाध्यक्ष प्रदीप प्रियदर्शी ने बताया कि हाल में देश में संविधान पर हमले बढ़े हैं. सामाजिक कार्यकर्ताओं को अलग-अलग बहाने से प्रताड़ित किया जा रहा है. मानव अधिकार कार्यकर्ता फादर स्टेन स्वामी को झूठे केस में फंसाकर जेल में बंद कर दिया गया हैं. इनके साथ अन्य को पहले से भीमा कोरेगांव केस में नामचीन सामाजिक कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया जा चुका है.

उन्होंने कहा कि अवैध ढंग से कवि वरवर राव, सुधा भारद्वाज, फादर स्टेन स्वामी, आनंद तेलतुंबड़े, जी.एन. साईबाबा, गौतम नौलखा, प्रशांत राही आदि को गिरफ्तार कर जेल में कैद कर दी गयी हैं. सरकार की दोरंगी नीति जारी है. एक तरफ सरकार के द्वारा चहेतों को मेडिकल को आधार पर जेल से वेल पर रिहा कर दी जाती है. इसी आधार पर सामाजिक कार्यकर्ताओं, पत्रकारों आदि को बेल न देकर जेल में रखी जाती है. मानव अधिकार कार्यकर्ता फादर स्टेन स्वामी जो पार्किंसन और अन्य बीमारियों से पीड़ित हैं, उन पर अर्बन नक्सलाइट होने का आरोप मढ़ा गया है. झारखंड के आदिवासियों और हाशिये पर जीवनयापन करनेवाले लोगों के अधिकारों के लिए आवाज उठाने के कारण आतंकवादियों से संबंध रखने के कथित आरोपी, एक बुजूर्ग जेसुइट पुरोहित ने कहा है कि वे जेल के अपने साथियों की इंसानियत से बहुत प्रभावित हैं.

फादर स्टेन स्वामी ने जेल से अपने मित्रों को एक पत्र लिखा है जिसमें अपने कमरे के साथियों जो “अत्यन्त गरीब परिवारों” से हैं उनके बारे बतलाया है कि वे दैनिक आवश्यकताओं में उनकी मदद करते हैं. उनके लिए प्रार्थना का आग्रह करते हुए उन्होंने लिखा है, “मैं आपसे आग्रह करता हूँ कि मेरे साथियों और सहयोगियों को अपनी प्रार्थनाओं में याद करें.” राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (एनआईए) ने फादर स्टेन स्वामी को 8 अक्टूबर को झारखंड की राजधानी राँची स्थित बगैचा जेसुइट सामाजिक कार्य केंद्र से गिरफ्तार किया था. उन पर जनवरी 2018 में, महाराष्ट्र के भीमा कोरेगांव हिंसा में माओवादी विद्रोहियों के साथ सम्पर्क होने का कथित आरोप है. गिरफ्तार के बाद उन्हें महाराष्ट्र के नवी मुम्बई में तलोजा जेल में रखा गया है. 

84 वर्षीय फादर स्टेन के वकील ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा कोविड-19 महामारी के मद्देनजर कैदियों को रिहा करने के प्रावधान के तहत मानवीय आधार पर बेल की अपील की थी. एनआईए ने 23 अक्टूबर को यह कहते हुए अंतरिम जमानत की उनकी याचिका को खारिज कर दिया कि वे महामारी का अनुचित लाभ उठाना चाहते हैं.तलोजा जेल में मानवता की भावना रखने वाले सबसे बुजुर्ग फादर हैं जो पार्किंसन की बीमारी से पीड़ित हैं और सुन नहीं सकते हैं एवं हर्निया का दो बार सर्जरी हो चुका है. वे खुद से धोने और खाने में बहुत कठिनाई महसूस करते हैं. उनके कमरे के साथी स्नान करने, कपड़ा धोने और भोजन करने में उनकी मदद करते हैं. जेसुइट पुरोहित के लिए ये चिन्ह हैं कि “सब कुछ के बावजूद तलोजा जेल में मानवता प्रवाहित होती है.”

फादर स्वामी बतलाते हैं कि जेल में वरवरा राव, वेरनॉन गोंजाल्विस और अरुण फरेरा जैसे दूसरे मानव अधिकार कार्यकर्ता भी हैं जिनपर भीमा कोरेगाँव हिंसा से जुड़े होने का कथित आरोप है. इस मामले में फादर स्वामी 16वें और सबसे बुजुर्ग हैं जिन्हें गिरफ्तार किया गया है.वे उनसे जेल में मनोरंजन के समय में मुलाकात करते हैं. 

दिव्यांगों के अधिकारों के लिए राष्ट्रीय मंच ने कहा है कि पार्किजन की बीमारी के कारण, फादर स्टेन स्ट्रॉ और सिपर प्रयोग करते थे क्योंकि वे अपने हाथ से ग्लास भी नहीं पकड़ सकते हैं. उन्होंने जेल में स्ट्रॉ और सिपर की मांग की थी एनआईए ने ऐसे साधारण सहायक वस्तुओं को भी देने से इंकार कर दिया.

फादर ने एनआईए से इन वस्तुओं के प्रयोग की अनुमति मांगी थी जिसपर अदालत ने 6 नवंबर को आवेदन पर जवाब दाखिल करने के लिए 20 दिन का समय मांगा है. इस मामले में सुनवाई 26 नवम्बर को होगी.

इस बीच, एनपीआरडी ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के “तत्काल हस्तक्षेप” की मांग की है ताकि फादर स्टेन स्वामी को अपेक्षित आयु और विकलांगता के उपयुक्त आवास; सहायक उपकरण, जिसमें स्ट्रॉ और सिपर शामिल हैं; और आवश्यकतानुसार मानवीय देखभाल सहायता उपलब्ध कराया जाए.मानव अधिकार के लिए उच्च आयोग के कार्यालय ने 20 अक्टूबर को गौर किया था कि 84 वर्षीय बुजुर्ग काथलिक पुरोहित   स्टेन स्वामी, जो लम्बे समय से हाशिये पर जीवनयापन करनेवाले लोगों के अधिकारों की रक्षा करने की गतिविधियों से जुड़े हुए हैं उनपर आरोप लगाकर उनकी कमजोर स्वास्थ्य हालत में जेल में रखा गया है. संयुक्त राष्ट्र के मानव अधिकार उच्च आयोग की ओर से माईकेल बैचलेट ने सरकार से अपील की थी कि वह “भारत को सुरक्षा के लिए बाध्य करने वाले बुनियादी मानवाधिकारों का प्रयोग करने के लिए गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम के तहत आरोप लगाए गए लोगों को रिहा करे.”

यह जानकारी एक प्रेस विज्ञप्ति में दी गई है।

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उपाध्याय अमलेन्दु:
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