राहत देने की मांग को लेकर पूरे प्रदेश में किसानों के हो रहे हैं प्रदर्शन

Kisan Sabha protests

किसानों और प्रवासी मजदूरों को मान-सम्मान और सामाजिक सुरक्षा देने की मांग

Demonstrations are being organized by farmers all over the state seeking relief

Demand for respect and social security to farmers and migrant laborers

रायपुर, 16 मई 2020. अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति से जुड़े 300 से अधिक संगठनों के आह्वान पर छतीसगढ़ में किसानों और आदिवासियों के बीच खेती-किसानी और जल, जंगल, जमीन से जुड़े मुद्दों पर काम करने वाले 25 से अधिक संगठनों के नेतृत्व में प्रदेश के कई गांवों में किसानों, आदिवासियों और प्रवासी मजदूरों ने अपने-अपने घरों से और गांवों में एकत्रित होकर मोदी सरकार द्वारा कोरोना संकट से निपटने के तौर-तरीकों पर अपना विरोध जाहिर किया और वास्तविक राहत देने की मांग की। राहत के कदमों में ये सभी संगठन कोरोना महामारी के खत्म होने तक ग्रामीण परिवारों को हर माह 10000 रुपये की नगद मदद करने, हर व्यक्ति को 10 किलो खाद्यान्न हर माह मुफ्त देने, खेती-किसानी और आजीविका को हुए नुकसान की भरपाई करने, किसानों को स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के अनुसार सी-2 लागत मूल्य का डेढ़ गुना न्यूनतम समर्थन मूल्य के रूप में देने, किसानों को बैंकिंग और साहूकारी कर्ज़ के जंजाल से मुक्त करने और प्रवासी मजदूरों को बिना यात्रा व्यय वसूले उनके घरों तक सुरक्षित ढंग से पहुंचाने की मांग कर रहे हैं। किसान संगठनों के अनुसार आज 15 से ज्यादा जिलों में प्रदर्शन हुए हैं और कल भी प्रदर्शन जारी रहेगा।

छत्तीसगढ़ किसान सभा के राज्य अध्यक्ष संजय पराते और किसान संगठनों के साझे मोर्चे से जुड़े विजय भाई ने बताया कि रायपुर, महासमुंद, दुर्ग, धमतरी, गरियाबंद, बिलासपुर, कोरबा, चांपा, मरवाही, जशपुर, सरगुजा, सूरजपुर तथा शंकरगढ़ आदि जिलों में किसानों द्वारा विरोध प्रदर्शन किए जाने की खबरें लगातार आ रही है। इन विरोध प्रदर्शनों में किसान नेता पारसनाथ साहू, तेजराम विद्रोही, अनिल शर्मा, सुखरंजन नंदी, कृष्ण कुमार, राकेश चौहान, रामलाल हरदोनी, विशाल वाकरे, चंद्रशेखर सिंह ठाकुर, हरकेश दुबे, शेखर नायक, आदि ने भी हिस्सा लिया है। प्रदर्शन का दायरा इतना व्यापक है कि किसानों ने अपने खेतों और मनरेगा स्थलों में भी कार्य करते हुए पदर्शन किया है और मोदी सरकार की नीतियों के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया है। बहुत सी जगहों में किसानों ने भूपेश बघेल सरकार के खिलाफ भी नारे लगाए हैं और धान खरीदी के बकाया पैसों और बोनस का भुगतान शीघ्र करने की भी मांग की है।

किसान नेताओ ने केंद्र सरकार द्वारा पिछले दो दिनों में कृषि क्षेत्र के लिए घोषित पैकेज को किसानों के साथ धोखाधड़ी बताया है और कहा है कि इसका लाभ खेती-किसानी करने वालों को नहीं, बल्कि कृषि क्षेत्र में व्यापार करने वाली कॉर्पोरेट कंपनियों को मिलेगा। उन्होंने कहा कि यह पैकेज किसानों और प्रवासी मजदूरों की रोजी-रोटी, उनकी आजीविका और लॉक डाऊन में उनको हुए नुकसान की भरपाई नहीं करती और किसानों को मान-सम्मान देने का उसका दावा केवल जुमलेबाजी है। उन्होंने प्रवासी मजदूरों की दयनीय दशा के बारे में झूठा हलफनामा देकर सुप्रीम कोर्ट को गुमराह करने का भी आरोप लगाया है।

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