तब पत्रकारिता करना ध्येय था, प्रोफेशन नहीं : डॉ दिनेश शर्मा

उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा ने किया पुस्तक कालचक्र कल्पना के सहारे चलता नहींका विमोचन

लखनऊ 14 जनवरी 2020. उपमुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा (Deputy Chief Minister Dr. Dinesh Sharma) ने कहा कि पत्रकारिता में अब काफी बदलाव आ गया है, समय के साथ राजनीतिक स्वरूप भी वैसा नहीं रहा है ना ही वह पुरानी सोच और चिंतन वाली पत्रकारिता ही बची हैl

उपमुख्यमंत्री डॉ शर्मा ने कहा कि रूद्र नारायण द्विवेदी जैसे विराट व्यक्तित्व के लोग ना केवल पत्रकारिता को अमर कर जाते हैं बल्कि सैकड़ों वर्षों तक लोगों के दिलों में बसे रहते हैंl

डॉ. दिनेश शर्मा मंगलवार को प्रेस क्लब में वरिष्ठ पत्रकार रहे स्वर्गीय रूद्र नारायण द्विवेदी की स्मृतियों पर संकलित पुस्तक ‘कालचक्र  कल्पना के सहारे चलता नहीं’ का विमोचन कर रहे थे।

समारोह को संबोधित करते हुए डॉ शर्मा ने कहा कि अब चैनलों और अखबार को देखकर लोग समझने लगे हैं कि यह किस ‘आईडियोलॉजी’ का न्यूज़ चैनल या अखबार होगाl उन्होंने कहा कि स्वर्गीय आर.एन.डी दिवेदी ऐसे व्यक्तित्व के धनी थे, कि आज हम उन्हें उनके इस दुनिया से जाने के 22 वर्षों बाद भी शिद्दत से याद कर रहे हैंl

डॉ. शर्मा ने कहा कि व्यक्ति के आचरण से उसके संस्कार का पता चलता हैl हम उनके बच्चों को देखकर यह कह सकते हैं कि स्वर्गीय द्विवेदी ने अपने बच्चों को अच्छे संस्कार और अच्छी शिक्षा दी, जिससे हम उनकी यादों को संजो कर रख पाने में सक्षम हो पा रहे हैंl

वरिष्ठ पत्रकार ज्ञानेंद्र शर्मा ने स्वर्गीय रूद्र नारायण द्विवेदी को याद करते हुए कहा कि वह होते तो जैसे जवानी साथ-साथ काटी, बुढ़ापा भी साथ साथ मजे से काटतेl

श्री शर्मा ने कहा कि स्वर्गीय श्री द्विवेदी की एक बात आज के संदर्भ में बहुत ही मौजू है, वह बहुत ही सुगठित और अच्छी कॉपी यानि समाचार लिखते थे कि किसी भी सब एडिटर को उनकी कॉपी एडिटिंग करने में कोई दिक्कत नहीं होती थी बल्कि हम यूं कहें कि कई बार सब एडिटर को कुछ करना ही नहीं पड़ता था। उनकी खबर में समाचार का मूल तत्व बहुत ही अच्छे ढंग से लिखा होता था, इसलिए उस खबर को पढ़ने में काफी आसानी होती थी।

श्री शर्मा ने आज की पत्रकारिता पर तंज करते हुए कहा कि अब आज जिसकी खबर लिखनी है उसी की टांग भी तो खींचनी है, ऐसे में हमें उस व्यक्ति से बनाकर भी रखना होता है। स्वर्गीय द्विवेदी इस बात को अच्छी तरह से समझते थे, कि किसी नेता से कितनी नजदीकी और कितनी दूरी के संबंध रखने चाहिए।

वरिष्ठ साहित्यकार शेष नारायण सिंह ने कहा कि रूद्र नारायण द्विवेदी का निधन 57 वर्ष की उम्र में हो गया था, उनकी दोनों बेटियों विनीता द्विवेदी और स्निग्धा द्विवेदी ने उनका सपना पूरा किया।  स्वर्गीय द्विवेदी ने 1974 से 1999 तक यूएनआई की सेवा की।  इस दौरान भारत के 25 साल का इतिहास उन्होंने अपनी आंखों से देखा था।

श्री सिंह ने कहा कि उन्होंने इनिशिएटिव लेकर उनकी पुण्यतिथि के आज के दिन यानी 14 जनवरी की तारीख को ‘लार्जर देन लाइफ’ जीने वाले रूद्र नारायण द्विवेदी के जीवन को सेलिब्रेट करने की सोच कर इस कार्यक्रम का आयोजन किया है, आप सभी ने हमारा साथ दिया, इसके लिए आप सभी का बहुत-बहुत धन्यवाद।

सुश्री स्निग्धा द्विवेदी के संचालन में चले समारोह में दैनिक जागरण के पूर्व संपादक दिलीप अवस्थी, एनडीटीवी के स्थानीय संपादक कमाल खान, नवभारत टाइम्स के स्थानीय संपादक सुधीर मिश्रा, वॉइस आफ लखनऊ के संपादक रामेश्वर पांडे, मान्यता समिति के अध्यक्ष हेमंत तिवारी, वरिष्ठ पत्रकार रामदत्त त्रिपाठी समेत पत्रकारिता जगत की कई जानी-मानी हस्तियां मौजूद थीं।

पैनल चर्चा में पत्रकारों ने रखी अपनी बेबाक राय

यू एन आई के ब्यूरो चीफ रहे स्वर्गीय  रूद्र नारायण द्विवेदी  की स्मृतियों पर आधारित पुस्तक ‘कालचक्र कल्पना के सहारे चलता नहीं’ के विमोचन के बाद आर एन द्विवेदी स्मारक पत्रकारिता सेमिनार का आयोजन किया गया। ‘पत्रकारिता की वर्तमान चुनौतियां’ और समकालीन पत्रकारिता पर आयोजित सेमिनार में पैनल चर्चा पर सीएनबीसी  आवाज के पूर्व संपादक आलोक जोशी, नवभारत टाइम्स के स्थानीय संपादक सुधीर मिश्रा, एनडीटीवी के स्थानीय संपादक कमाल खान और वॉयस ऑफ लखनऊ के स्थानीय संपादक रामेश्वर पांडे और देशबंधु  समाचार पत्र के राजनीतिक संपादक शेष नारायण सिंह रहे।  पैनल चर्चा का संचालन सीएनबीसी आवाज़ के पूर्व संपादक आलोक जोशी ने किया।

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उपाध्याय अमलेन्दु:
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