क्या गहलोत को सीएम बनाना कांग्रेस का गलत फैसला था ?

Did making Gehlot as CM prove to be a wrong decision of Congress?

नई दिल्ली, 20 फरवरी। राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Rajasthan Chief Minister Ashok Gehlot) यूं तो जमीन से जुड़े राजनेता हैं, जादूगर कहे जाते हैं, लेकिन लगता है अब उनकी हालत उस जादूगर जैसी हो गई है जो आदमी को कबूतर बनाकर वापिस आदमी बनाने का मंत्र भूल गया। दरअसल गहलोत जब से इस पारी में मुख्यमंत्री बने हैं, तब से उनका पूरा ध्यान अपने निजी एजेंडे सैट करने पर है और उनके कई कदम ऐसे साबित हुए हैं जो कांग्रेस के लिए दुखदायी साबित होने वाले हैं।

कोटा के अस्पताल में बच्चों की असमय मौत पर गहलोत की तर्कहीन बयानबाजी से कांग्रेस को नुकसान हुआ जबकि राहुल गांधी गहलोत की इस बयानबाजी पर नाखुश थे। लोकसभा चुनाव के दौरान भी गहलोत पर आरोप लगते रहे कि वे अपने बेटे को स्थापित करने के लिए कांग्रेस का बंटाधार कर रहे हैं और देखने में आया कि उन्हें राजस्थान में कांग्रेस के सभी प्रत्याशी हार जाने का कोई अफसोस नहीं था, बल्कि वह अपने बेटे को लेकर सचिन पायलट पर दोषारोपण कर रहे थे।

इसी तरह गहलोत को आलोचना का शिकार होना पड़ा था जब सुपरिचित कथाकार एवं जनवादी लेखक संघ के सचिव संदीप मील को सीकर स्थित सीपीएम के दफ़्तर में गिरफ्तार किया गया!।

एक अन्य घटना में एक रिपोर्टर को टिड्डियों से फसल का नुकसान दिखाने पर किसान को जेल भेजने की धमकी का आरोप लगा और किसान नेता रमनदीप सिंह मान ने इस बावत लगातार कई ट्वीट किए। उस प्रकरण में भी गहलोत की किरकिरी हुई।

अब ताजा मामला सामने आया है, जिसमें गहलोत की प्रशासनिक क्षमता को लेकर सवाल उठ रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक राजस्थान के नागौर जिले में दो दलित युवकों के साथ बर्बरता का वीडियो सामने आया जिसमें बाद में पुलिस ने पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। घटना 16 फरवरी की बताई जा रही है और 19 फरवरी को पांचोड़ी थाने में मामला दर्ज हुआ है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पीड़ितों को जान से मारने की धमकी दी जा रही थी। डर के मारे वो मामला दर्ज नहीं करवा पा रहे थे। बीते बुधवार को किसी तरह पीड़ितों ने हिम्मत दिखाते हुए पांचोड़ी थाने में मामला दर्ज करवाया, जिसके बाद पुलिस ने एक्शन लेते हुए आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कुछ लोग युवकों को पहले चमड़े की बेल्ट से बरी तरह पिटाई की। इसके बाद भी जब मन नहीं भरा तो युवक के प्राइवेट पार्ट्स में पेट्रोल डाल दिया। घटना खींवसर के करणु गांव की बताई जा रही है।

जेएनयू के प्रोफेसर पुरुषोत्तम अग्रवाल ने ट्वीट किया है कि,

“नागौर में हुए घृणित अमानवीय अपराध के दोषियों को सजा ऐसी मिलनी चाहिए कि मिसाल बने। @ashokgehlot51 सरकार को फ़ौरन अपराधियों को गिरफतार कर फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट के हवाले करना चाहिए.”

गहलोत को लेकर कांग्रेस समर्थकों में भी अब असंतोष के स्वर मुखर हो रहे हैं। +कांग्रेस समर्थक समझे जाने वाले राजनीतिक विश्लेषक दुष्यंत नागर ने कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी, केसी वेणुगोपाल और अविनाश पांडे को टैग करते हुए ट्वीट किया है कि,

“कोटा में बच्चो की मौत…दलित उत्पीड़न..या किसानों की बिजली का मामला है..या किसानों की कर्जा माफ़ी हो, हर मोर्चे पर @ashokgehlot51  सरकार फेल साबित हुई है…आपसे विनम्रता पूर्वक अनुरोध है @kcvenugopalmp

@avinashpandeinc @priyankagandhi इस्तीफा लेकर इस नाटक को खत्म करिये. @AICCMedia.”

अब सवाल उठ रहे हैं कि क्या गहलोत को मुख्यमंत्री बनाना कांग्रेस का गलत फैसला था ?

 

 

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उपाध्याय अमलेन्दु:
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