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बेंगलुरू में भाजपा की कैद में कांग्रेस विधायकों से मिलने पहुंचे दिग्विजय सिंह, गिरफ्तार, डीसीपी ऑफिस में अनशन पर बैठे

Digvijay Singh arrives in Bengaluru to meet Congress MLAs imprisoned by BJP

नई दिल्‍ली. कथित रूप से भाजपा की कैद में कांग्रेस के विधायकों से मिलने के लिए वरिष्‍ठ नेता दिग्विजय सिंह बेंगलुरु (Digvijay Singh reached Bengaluru) पहुंच गए। उन्‍होंने रमाडा होटल में रुके सभी विधायकों से मिलने की कोशिश की जिसपर पुलिस ने उन्‍हें रोका। इसके बाद वह अन्‍य नेताओं और पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ वहीं बैठ गए। पुलिस ने उन्‍हें गिरफ्तार कर लिया। दिग्विजय सिंह के साथ कर्नाटक कांग्रेस के प्रमुख डी शिवकुमार थे।

श्री सिंह ने ट्वीट किया, ‘मैं बेंगलुरू के रमाडा होटल पहुंच गया हूं। पुलिस हमें रोक रही है।’

बता दें कि मध्‍य प्रदेश के पूर्व मुख्‍यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर कर प्रदेश में फ्लोर टेस्‍ट कराने की मांग की थी। इस पर सुनवाई करते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने मध्‍य प्रदेश की कमलनाथ सरकार, विधानसभा अध्यक्ष और कांग्रेस को नोटिस जारी कर जवाब मांगा। इस मामले पर बुधवार 18 मार्च को सुनवाई होगी.

बेंगलुरू में मीडिया से बातचीत में दिग्विजय सिंह ने कहा,

‘मैं मध्य प्रदेश से राज्यसभा का उम्मीदवार हूं, 26 मार्च को मतदान होना है। मेरे 22 विधायक यहां रुके हुए हैं। वह लोग मुझसे बात करना चाहते हैं। उनके फोन छीन लिए गए हैं। पुलिस वाले उनसे बात भी नहीं करने दे रहे हैं कहते हैं कि इनकी सुरक्षा को खतरा है।’

दिग्विजय सिंह ने कहा –

“विधायक निजी नागरिक नहीं हैं। वो लाखों जनता/ वोटरों के प्रतिनिधि हैं।

विधायक को अगर कोई संकट है तो संवैधानिक व्यवस्था है कि वे स्पीकर को मिलें, या सदन पटल पर बोलें या पार्टी के अधिकृत प्रतिनिधियों से कहें।

अन्य कोई भी तरीक़ा लोकतंत्र का अपहरण है।“

उन्होंने ट्वीट किया

“बेंगलुरु में तो BJP की सरकार है। यहाँ की पुलिस BJP सरकार के अधीन है। मैं यहाँ गांधीवादी तरीक़े से अपने विधायकों से मिलने आया हूँ।

मुझे तो BJP के राज में भी, उनकी पुलिस के बीच भी डर नहीं लग रहा है।

लेकिन BJP नेता कह रहे हैं कि विधायकों को डर है। तो डर किससे है?

खुद BJP से न?”

श्री सिंह ने कहा

“बेंगलुरु पुलिस का कहना है कि हमारे जो विधायक यहाँ हैं, उनकी privacy के चलते हम उनसे नहीं मिल सकते हैं।

निगरानी के लिए पुलिस 24 घंटे उनपर नज़र रखे है। प्राइवेसी की रक्षा का ये ग़ज़ब उदाहरण है!

हर संवैधानिक अधिकार, हर संवैधानिक व्यवस्था की स्वार्थी व्याख्या BJP से सीखें।”

“कर्नाटक पुलिस हमें स्थानीय DCP ऑफ़िस लायी है।

उन्होंने ट्वीट किया,

“हमारी माँग है कि BJP की क़ैद में रह रहे हमारे विधायकों से हमें मिलने दिया जाए।

जब तक हमारी मुलाक़ात अपने विधायकों से नहीं होगी, मैं अनशन की घोषणा करता हूँ।

हमारे देश में लोकतंत्र है, डिक्टेटरशिप नहीं।”

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पलाश विश्वास जन्म 18 मई 1958 एम ए अंग्रेजी साहित्य, डीएसबी कालेज नैनीताल, कुमाऊं विश्वविद्यालय दैनिक आवाज, प्रभात खबर, अमर उजाला, जागरण के बाद जनसत्ता में 1991 से 2016 तक सम्पादकीय में सेवारत रहने के उपरांत रिटायर होकर उत्तराखण्ड के उधमसिंह नगर में अपने गांव में बस गए और फिलहाल मासिक साहित्यिक पत्रिका प्रेरणा अंशु के कार्यकारी संपादक। उपन्यास अमेरिका से सावधान कहानी संग्रह- अंडे सेंते लोग, ईश्वर की गलती। सम्पादन- अनसुनी आवाज - मास्टर प्रताप सिंह चाहे तो परिचय में यह भी जोड़ सकते हैं- फीचर फिल्मों वसीयत और इमेजिनरी लाइन के लिए संवाद लेखन मणिपुर डायरी और लालगढ़ डायरी हिन्दी के अलावा अंग्रेजी औऱ बंगला में भी नियमित लेखन अंग्रेजी में विश्वभर के अखबारों में लेख प्रकाशित। 2003 से तीनों भाषाओं में ब्लॉग

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