अनदेखी न करें छाती की चोट की

Health News in Hindi

Do not ignore chest injury

आजकल आये दिन सड़क दुर्घटनाओं में लगी छाती चोट (chest injury in Hindi) एक आम बात होती जा रही है। एक तरफ वाहनों की संख्या में बेतहाशा वृद्धि व ट्रैफिक नियमों की अवहेलना (Violation of traffic rules) छाती चोट होने का एक प्रमुख कारण (A major cause of chest injury) बन रही है, तो दूसरी तरफ आये दिन सड़कों पर वाहनों को लेकर अनर्गल बहस व मारपीट, छाती चोट से घायल नागरिकों की संख्या में बेतहाशा वृद्धि कर रही है। लोग जरा सी गहमा गहमी में मानसिक संतुलन खो बैठते हैं और आवेश में आकर चाकू, छुरी व पिस्टल से हमला बोल देते हैं और ऐसे अवसरों पर शरीर के अन्य अंगों की तुलना में छाती को ज्यादा चोट लगती है।

जान लेवा हो सकती है छाती चोट | Chest injury can be fatal

आज के आधुनिक युग में एक तरफ सड़कों पर अत्याधिक वाहनों का जमाव व गाड़ी चलाते वक्त सहनशीलता का अभाव छाती चोट की संख्या में वृद्धि कर रही है तो दूसरी तरफ ज्यादातर अस्पतालों में छाती चोट के सही इलाज़ (Correct treatment of chest injury) की सुविधा का अभाव होना छाती चोट से घायल व्यक्ति की जान जाने का सबब बन जाती है। हालत यह है कि करीब 75 प्रतिशत छाती की चोटों में जान बचाई जा सकती है, पर घायल व्यक्ति के रिश्तेदारों की अज्ञानता व छाती चोट को लेकर उनकी समझ, दोनों ही छाती चोट से घायल व्यक्ति को मौत के मुँह में ढ़केल देती हैं।

लोग यह नहीं जानते कि छाती चोट लगने पर कहाँ और किसके पास जायें (Where and to whom do you go in case of chest injury)। इसी उहा पोह की स्थिति में सही निर्णय नहीं हो पाता है और जान बचाने का बहुमूल्य समय नष्ट हो जाता है।

छाती चोट की गंभीरता को समझें | Understand the severity of chest injury

लोग यह नहीं समझते कि छाती चोट में पसली के टूटने पर छाती के अन्दर स्थित फेफड़ा भी जख्मी हो जाता है और जख्मी फेफड़े में की गई इलाज़ की लापरवाही से जानलेवा जटिलतायें उत्पन्न हो जाती हैं और घायल व्यक्ति की जान जाने में  देर नहीं लगती।

होता यह है कि पसली के फ्रैक्चर (Rib fractures) व उसमें होने वाले दर्द पर सारा ध्यान केन्द्रित कर दिया जाता है और उसी का इलाज चलता रहता है और घायल फेफड़े को नजरंदाज कर दिया जाता है और जब समस्या गम्भीर हो जाती है, तो महानगरों के बड़े अस्पतालों को एम्बुलेंस में डालकर ट्रांस्फर कर दिया जाता है। तब ऐसी परिस्थितियों में दस में से सात छाती चोट से घायल मरीज़ दम तोड़ देते हैं। इसलिये घायल व्यक्ति के परिवार वालों को चाहिये कि छाती की चोट लगने पर उसे गम्भीरता से लें और शुरूवाती दिनों में ही किसी अनुभवी थोरेसिक सर्जन (thoracic surgeon near me) की निगरानी में प्रभावी इलाज़ करवायें।

छाती चोट लगने पर क्या करें? | What to do if you have a chest injury?

सड़क दुर्घटना में या बम विस्फोट में या चाकू छुरी से आक्रमण में या गोली लगने पर अगर छाती चोट या पसली का फ्रैक्चर हो जाये, तो घायल व्यक्ति के परिवार वालों  को चाहिये कि बगैर समय व्यर्थ किये ऐसे बड़े शहरों के अस्पतालों में ले जायें जहाँ एक अनुभवी थोरेसिक सर्जन यानि चेस्ट सर्जन (Chest surgeon) की उपलब्धता हो और किट्रीकल  केयर का महकमा हो। लोग अक्सर ऐसी परिस्थितियों में मरीजों को छोटे प्राथमिक सेवा केन्द्र व छोटे अस्पतालों में ले जाते हैं और वहाँ प्राथमिक उपचार दिलवाने का प्रयास करते है और इन सब में कीमती वक्त नष्ट हो जाता है और त्वरित व प्रभावी इलाज़ के अभाव में मरीज़ की जान चली जाती है। छाती चोट से घायल व्यक्ति के सम्बंधियों को चाहिये कि वह मरीज़ को तुरन्त एम्बुलेंस में डालकर सही अस्पताल में पहुचायें। जिससे मरीज की जान बचाई जा सके ।

अगर छाती चोट का इलाज न करायें, तो क्या होगा? | What if I do not treat chest injury?

छाती चोट में फेफड़े के जख्मी होने से छाती के अन्दर हवा भर जाती है जो फेफड़े को दबा देती है और फेफड़ा फूल नहीं पाता जिससे मरीज की साँस फूलने लगती है और बगैर इलाज़ के मरीज़ की मौत हो जाती है।

दूसरा हवा के साथ-साथ छाती के अन्दर फेफड़े के चारों ओर खून का जमाव हो जाता है और फेफड़ा दबाव के कारण पूरा फूल नहीं पाता तब मरीज़ की हालत बिगड़ने लगती है और सही इलाज के मरीज़ की मौत हो जाती है।

छाती में खून भर जाने से एक तो शरीर में खून की मात्रा कम हो जाती है तो दूसरी तरफ फेफड़े के सही काम न करने के कारण रक्त में आक्सीजन की मात्रा गिर जाती है।

कभी-कभी छाती का कुछ हिस्सा टूट कर निकल जाता है और फेफड़ा दिखने लगता है। यह अवस्था काफी खतरनाक होती है।

छाती चोट लगने पर कुछ बातें हमेशा याद रखें | Always remember a few things when a chest injury occurs

छाती चोट लगने पर एक तो देरी न करें और घायल व्यक्ति को तुरन्त किसी बड़े अस्पताल में थोरेसिक यानि चेस्ट सर्जन की निगरानी में इलाज़ करायें जिससे मरीज़ की छाती चोट के बाद जीवित रहने की सम्भावना बढ़ाई जा सके और फेफड़े को घातक जटिलताओं व नष्ट होने से बचाया जा सके। ऐसा न करने पर छाती चोट से घायल व्यक्ति की जान तो जायेगी ही और उसके साथ-साथ धन व समय की बर्बादी भी होगी। एक परिवार के सदस्यों को कितनी मानसिक वेदना होती है जब कोई जवान सदस्य दुर्घटना में चोट लगने के बाद दम तोड़ देता है।

सीट बेल्ट बाँधना न भूलें कार चालक Do not forget to pair a car driver seat belt

आप शायद इस बात से अवगत न हों कि सीट बेल्ट एक कार चालक के लिये जीवन रक्षक है (Seat belts are life saving for a car driver)। सीट बेल्ट बाँधने से, सौ में से पिच्चानवे मामलों में जान बचने की संभावना रहती है। इससे यह बात समझ में आती है कि कार चलाते वक्त सीट बेल्ट न बाँधना एक कार चालक के लिये आत्म हत्या करने के समान है। मेरा आपसे निवेदन है कि पुलिस व जुर्माने से बचने के लिये नहीं, बल्कि अपनी ज़ान की हिफ़ाजत के लिये कार चलाते वक्त सीट बेल्ट बाँधिये।

छाती चोट की इलाज की विधाएँ | Methods of treatment of chest injury

ज्यादातर  छाती चोट के मामलों में, छाती में नली डालकर, छाती के अन्दर इकट्ठा हुआ खून व हवा निकाल दी जाती है जिससे फेफड़े पर दबाव कम होने लगता है और वह धीरे-धीरे फूलना शुरू कर देता है। अगर फेफड़ा ज्यादा जख्मी नहीं है तो वह अपनी यथा स्थिति में पुन: लौटने में एक हफ्ते से ज्यादा समय नहीं लगायेगा।

अगर फेफड़ा क्षत-विक्षत हो गया है तो सर्जरी की जरूरत पड़ जाती है और नष्ट हुये फेफड़े के हिस्से को निकालना पड़ता है।

कभी -कभी छाती व पेट के बीच की दीवार छाती चोट से फट जाती है, जिसके परिणामस्वरूप पेट की ऑंतें, छाती में प्रवेश कर जाती हैं और फेफड़े को दबा देती हैं। यह स्थिति बड़ी भयावह होती है, इसमें तुरन्त ऑपरेशन की आवश्यकता होती है।

कभी-कभी छाती चोट में अगर असीमित रक्तस्राव होता है, तो तुरन्त छाती खोल कर, ब्लीडिंग पर नियंत्रण करना पड़ता है। इसलिये आपसे निवेदन है कि छाती चोट में तुरन्त किसी अनुभवी थोरेसिक सर्जन, यानी चेस्ट सर्जन से सम्पर्क किया करें।

डॉ. के. के. पाण्डेय

सीनियर वैस्क्युलर एवं कार्डियो थोरेसिक सर्जन,

इन्द्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल, नई दिल्ली

(Dr. K. K. Pandey

Senior Vascular and Cardio Thoracic Surgeon,

Indraprastha Apollo Hospital, New Delhi)

नोट – यह समाचार किसी भी हालत में चिकित्सकीय परामर्श नहीं है। आप इस समाचार के आधार पर कोई निर्णय कतई नहीं ले सकते। स्वयं डॉक्टर न बनें किसी योग्य चिकित्सक से सलाह लें। स्रोत – देशबन्धु)

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