जानिए 400 साल पहले कैसे विलुप्त हो गया कबूतर परिवार का डोडो पक्षी

जानिए 400 साल पहले कैसे विलुप्त हो गया कबूतर परिवार का डोडो पक्षी

लाखों सालों से हमारी धरती पर जीवन पनप रहा है और फल-फूल रहा है। डायनासोर से लेकर मानव सभ्यता तक इस पृथ्वी पर जीव-जन्तुओं की कई प्रजातियां पैदा भी हो चुकी हैं और कई इस नीले ग्रह से गायब भी हो चुकी हैं। आज हम आपको एक ऐसे ही एक विलुप्त जीव के बारे में बता रहे हैं। इस विलुप्त जीव का नाम हैं डोडो।

डोडो का वैज्ञानिक नाम क्या है?

डोडो का वैज्ञानिक नाम रैफस कुकुलैटस है। जी हां सुनने में नाम जितना अजीब है, देखने में भी ये उतना ही अजीब था। यूं तो डोडो एक पक्षी था, लेकिन ये उड़ नहीं पाता था।

जानिए डोडो के बारे में 10 रोचक तथ्य

डोडो हिंद महासागर के द्वीप मॉरीशस का एक स्थानीय पक्षी था। यह था तो पक्षी लेकिन उड़ नहीं सकता था, इसलिए ये एक थलचर था।

डोडो कैसे लुप्त हुआ? इंसानों के शिकार की वजह से विलुप्त हो गया डोडो

आपको बता दें कि 17वीं सदी के अंत तक इस पक्षी का इंसानों ने बहुत ज्यादा शिकार किया, जिसकी वजह से डोडो धरती से विलुप्त हो गया। डोडो पक्षी का संबंध कबूतर और फाख्ता के परिवार से था।

कैसा दिखता था डोडो?

डोडो का आकार मुर्गे से लगभग एक मीटर ऊंचा और 20 किलोग्राम वजन का होता था। इसकी पूंछ कई हिस्सों में बंटी होती थी।

जमीन पर ही बनाता था अपना घोंसला

डोडो की खुराक में स्थानीय फल शामिल हुआ करते थे। डोडो मुर्गी से बड़े आकार का भारी-भरकम, गोलमटोल पक्षी था।

डोडो की टांगें छोटी व कमजोर होती थीं, जो उसका वजन संभाल नहीं पाती थीं। इसके पंख भी बहुत ही छोटे थे, जो उड़ने के लिए काफी नहीं थे, जिसकी वजह से न ही ये तेज दौड़ सकता था और न ही उड़ सकता था।

बेढंगे पक्षी डोडो का कैसे नाम पड़ा?

डोडो शब्द की उत्पत्ति पुर्तगाली शब्द दोउदो से हुई है, जिसका अर्थ होता है मूर्ख या बावला। ऐसा कहा जाता है कि पुर्तगालियों ने डोडो पक्षी को मुगल दरबार में भी पेश किया था, जहां के दरबारी चित्रकार ने इस विचित्र और बेढंगे पक्षी का चित्र भी बनाया था।

मॉरीशस द्वीप पर इंसानों के आने से पहले डोडो का कोई भी प्राकृतिक शिकारी इस द्वीप पर नहीं था। यही कारण है कि इस पक्षी ने अपने अंदर उड़ने की क्षमता विकसित नहीं की।

वोल्गवोगेल यानी वीभत्स पक्षी

डच लोग जब 17वीं शताब्दी की शुरुआत में पहली बार मॉरीशस आए, तब वहां इंसान नहीं बसते थे। उन्होंने डोडो को वोल्गवोगेल नाम दिया, जिसका मतलब होता है वीभत्स पक्षी।

इसे वीभत्स पक्षी इस लिए भी कहा गया क्योंकि इसके मांस को बहुत देर तक पकाने का बाद भी वह नर्म और स्वादिष्ट नहीं बनता था।

मांस के स्वादिष्ट न होने के बाद भी डच लोग इसका शिकार करते रहे और अन्त में 1681 तक डोडो इस द्वीप से पूरी तरह लुप्त हो गया।

जानकारी का स्रोत विकिपीडिया से साभार

वैज्ञानिक नाम: Raphus cucullatus

द्रव्यमान: 13 – 23 kg

उच्च वर्गीकरण: Raphus

रैंक : जाति

वर्ग : पक्षी

संघ: कशेरुकी (विकिपीडिया से साभार)

Web title : Know how the dodo bird of the pigeon family became extinct 400 years ago

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