क्या भारत सरकार का मतलब प्रा. लि. कम्पनी है ? 20 का तेल 80 में ! 70 साल में पहली बार पेट्रोल से महंगा डीजल

Does Government of India mean Private Limited Company? Diesel costlier than petrol for the first time in 70 years

क्या भारत सरकार का मतलब (Government of India means) प्राईवेट लिमिटेड कम्पनी है ? जिसका मुख्य लक्ष्य केवल अधिक से अधिक मुनाफा कमाना भर है ?

प्रश्न महत्वपूर्ण हैं। क्योंकि वैश्विक कोरोना त्रासदी (Global corona tragedy) के बीच भी जिस तरह से सरकार की नीतियां आम जनता के जेब से अधिक से अधिक रकम को लूटना है वो हैरान करने वाली है। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद देश के अंदर जिस लोकतांत्रिक व्यवस्था के ताने-बाने बुने गए और इस लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता के हितों को साधने के लिए भारत सरकार के रूप में जिस राजनैतिक व्यवस्था का निर्माण किया वो अगर खुद को एक निजी व्यापारिक इंस्टीट्यूटशन की तरह केवल अपने आर्थिक हितों को पूरा करने के लिए जनता को एक ग्राहक समझ कर लूट के हथकंडे अपनाने लगे तो ऐसे में विशाल लोकतांत्रिक देश के इस सरकारी व्यवस्था के क्या मायने ?

सरकार की अनियोजित आर्थिक नीतियों के कारण देश आर्थिक बदहाली के महागर्त में हिचकोले खा रहा है लेकिन पेट्रोल-डीजल का मूल्य बुलेट ट्रेन की स्पीड से सरपट भागता ही जा रहा है। पिछले 18 दिनों के अंदर डीजल की कीमतों में 10.48 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई है जबकि पेट्रोल 8.50 रुपये प्रति लीटर महंगा हो गया है। देश में पहली बार डीजल का मूल्य पेट्रोल से महँगा हो गया है।

कितनी हैरत की बात है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत (International crude oil price) औंधे मुँह पड़ी है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल का मूल्य खाड़ी युद्ध के बाद से सबसे निचले स्तर पर पहुँच गया है। इतना ही नही पिछले 18 दिनों से अधिक समय से भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमत में काफी नरमी रही है लेकिन भारत मे पेट्रोल-डीजल के मूल्य लगातार बढ़ते ही जा रहे हैं।

ऐसे समझें तेल की कीमतों का खेल | This is how the game of oil prices

वर्तमान समय में भारत सरकार की आर्थिक नीतियां किस प्रकार एक कॉरपोरेट की तरह देश को लूटने की मुनाफाखोरी वाली स्कीम पर चल रही हैं, इसे समझने के लिए इन आंकड़ों को समझना बेहद जरूरी है।

वर्तमान समय में इंडियन बास्केट कच्चे तेल की कीमत लगभग 42 डॉलर प्रति बैरल है। भारतीय करेंसी के हिसाब से एक डॉलर का मूल्य आज 75.80 रुपये हैं और एक बैरल में कुल 159 लीटर कच्चा तेल होता है।

गणितीय गणना करें तो –

42 डॉलर = 42 × 75.80 रुपए

= 3183.60 रुपए

चूँकि 159 लीटर क्रूड ऑयल का मूल्य=3183.60 रुपए

अतः 1 लीटर क्रूड ऑयल का मूल्य

3183.60 रुपए ÷ 159 = 20.02 रुपए

यानि 1 लीटर कच्चा तेल को अंतराष्ट्रीय बाजार से भारत सरकार द्वारा खरीदा गया 20.02 रुपए में और इसके बाद इसके रिफाइनरी (परिष्करण) एवं ओएमसी मार्जिन पर लगता है तकरीबन 5.32 रुपए प्रति लीटर तथा पेट्रोल पंप को कमीशन मिलते हैं लगभग 3.56 रुपए प्रति लीटर। अगर इन सबों को जोड़ दिया जाए तो कुल रकम होती है -20.02 + 5.32 + 3.56 = 28.9 रुपए। तकरीबन 29 रुपए प्रति लीटर वाले पेट्रोल के लिए जनता को चुकाने होते हैं 80 रुपए। सीधा-सीधा 51 रुपए का भारी टैक्स।

सरकार का काम तो इस तरह की व्यवस्था का निर्माण करना है जिसमें आम जनता को सुविधाजनक जीवन जीने के साधन मुहैया कराए जा सकें। लेकिन सरकार की नीतियां केवल आम जनता को लूटने पर लगी हैं।

अब कुछ और अहम आँकड़े को जानने बेहद आवश्यक हैं ताकि सरकार की व्यवस्था के पीछे छुपे लूट की स्कीम को आवरणहीन किया जा सके।

सरकार ने सबसे महँगे दर पर कच्चे तेल की खरीद की थी 1 जनवरी 2020 को जब एक बैरल का कच्चे तेल का मूल्य था 67 डॉलर। और उस समय डॉलर का मूल्य था लगभग 71.32 रुपये। यानि उस समय भी एक लीटर कच्चे तेल को खरीदने में सरकार को 30 रुपये के आसपास ही खर्च करने पड़े।

भारत सरकार ने कच्चे तेल को अंतरराष्ट्रीय बाजार में सबसे न्यूनतम मूल्य पर खरीदा 6 मई 2020 को जब क्रूड ऑयल का मूल्य था मात्र 27 डॉलर प्रति बैरल। इस समय डॉलर का मूल्य था 76.17 रूपये। यानि इस समय एक लीटर कच्चे तेल को खरीदने में सरकार को खर्च करने पड़े मात्र 12.93 रुपये।

याद कीजिए वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव के पूर्व के समय को, किस प्रकार विपक्ष पेट्रोल-डीजल के बढ़ते मूल्य को लेकर सरकार को घेरती रहती थी। बीजेपी और मोदी जी के बड़े समर्थक व प्रचारक व्यापारी बाबा रामदेव जी बीजेपी सरकार बनने पर 35 रुपये प्रति लीटर पेट्रोल देने का ऐलान टीवी चैनलों पर बड़े शान से करते थे।

वर्ष 2014 में नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में बीजेपी की सरकार का गठन हुआ। नवम्बर 2014 में पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी 9.20 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी 3.46 रुपये प्रति लीटर था जो पूर्ववर्ती यूपीए सरकार द्वारा निर्धारित था। इस समय सरकार ने पहली बार पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी बढ़ाने का संकेत दिया था।


वर्ष 2017 में प्रधानमंत्री मोदी जी 15 अगस्त को ऐतिहासिक लाल किला के प्राचीर से राष्ट्र को संबोधित कर रहे थे और इधर पेट्रोल-डीजल की एक्साइज ड्यूटी ऐसा जम्प लगाया जिसका अंदाजा शायद ही किसी को रहा होगा। पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी 9.20 रूपये प्रति लीटर से बढ़ाकर सीधे 21.48 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी 3.46 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 17.33 रुपये प्रति लीटर बढ़ा दिया गया। सरकार का यह कदम उस दिशा में उठाया गया पहला कदम था जो यह सुनिश्चित कर दिया कि आने वाले दिनों में डीजल का मूल्य पेट्रोल से भी आगे निकल जाएगा। आज दिल्ली में डीजल की मूल्य पेट्रोल से आगे निकल चुकी है।

दया नन्द
(स्वतन्त्र टिप्पणीकार एवं शिक्षाविद)

5 मई 2020 को सरकार ने पेट्रोल की एक्साइज ड्यूटी बढ़ाकर 32.98 रुपये प्रति लीटर और डीजल की एक्साइज ड्यूटी बढ़ाकर 31.83 रुपये प्रति लीटर कर दिया।

अब जरा सोचिए कि आख़िर देश किस आर्थिक व्यवस्था की तरफ जा रहा है? जनता पर अधिक से अधिक टैक्स लाद देना या सरकार के द्वारा मुनाफाखोरी के ऐसे हथकंडे अपनाना लोकतांत्रिक व्यवस्था को कहाँ तक जायज ठहराया जा सकता है ? वो भी उस स्थिति में जब आम जनता के सामने रोजी-रोटी का भयावह संकट खड़ा है। क्या वाकई सरकार का मतलब एक पब्लिक लिमिटेड कंपनी या कॉरपरेट हो चुका है जिसका एक मात्र लक्ष्य मुनाफाखोरी रह गया हैं भले ही देश की आम जनता की जेब लूट लिया जाए ?

दया नन्द

(स्वतन्त्र टिप्पणीकार एवं शिक्षाविद)

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उपाध्याय अमलेन्दु:
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