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दो पहिया वाहन के कारण पारसनाथ पर्वत पर डोली मजदूर भुखमरी के कगार पर

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hastakshep
07 Mar 2021
दो पहिया वाहन के कारण पारसनाथ पर्वत पर डोली मजदूर भुखमरी के कगार पर

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झारखंड का पारसनाथ पर्वत जैन धर्मावलम्बियों का सबसे बड़ा तीर्थ स्थल

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झारखंड का पारसनाथ पर्वत (Parasnath Mountains of Jharkhand) पिछले कई सालों से सुर्ख़ियों में इसलिए है कि, जहां यह पर्वत जैन धर्मावलम्बियों का सबसे बड़ा तीर्थ स्थल (The biggest pilgrimage site for Jain religions) है, वहीं इस पर्वत की तलहटी में बसे दर्जनों गांवों के हजारों लोगों की आजीवीका का साधन है, जिसपर समाज के कुछ दबंगों की काली नजर हमेशा बनी रही है।

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जानिए पारसनाथ पर्वत के बारे में

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बता दें कि झारखंड के गिरिडीह जिला मुख्यालय से दूर 1350 मीटर (4430 फुट) ऊंचा पहाड़ है पारसनाथ पर्वत जिसके तलहटी में बसा है मधुबन, जहां जैनियों के 35-36 संस्थाएं है, जो अलग-अलग ट्रस्टों द्वारा संचालित होती हैं। कहना ना होगा कि इन ट्रस्टों के ट्रस्टी सिर्फ दिखावे के होते हैं, ट्रस्ट का अध्यक्ष या सचिव इस संस्था के मुख्यत: मालिक होते हैं, जो अपनी संस्था के जरिए काफी पैसा अर्जित करते हैं।

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मधुबन स्थित इन तमाम संस्थाओं में लगभग 5 हजार कर्मी स्थायी व अस्थायी तौर पर काम करते हैं। दरअसल इस पर्वत की चोटी पर जैन धर्मावलम्बियों के सर्वोच्च तीर्थस्थल है। यह पर्वत श्री सम्मेद शिखरजी के नाम से जाना जाता है। जैन धर्मावलम्बियों में मान्यता है कि यहां उनके 24 में से 20 तीर्थांकरों (सर्वोच्च जैन गुरूओं) ने मोक्ष की प्राप्ति की थी।

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पर्वत की तलहटी मधुबन से पर्वत के शिखर तक की दूरी कितनी है ?

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यहां बताना जरूरी होगा कि पर्वत की तलहटी मधुबन से पर्वत के शिखर तक की दूरी 9 किमी है। शिखर पर ही जैन धर्मावलम्बियों के उक्त 20 तीर्थंकर के मंदिर (20 Tirthankara Temples) हैं। जिसके दर्शनार्थ व वंदना के लिए देश—विदेश से लाखों जैन तीर्थयात्री आते हैं, जिन्हें पर्वत पर स्थित मंदिरों की परिक्रमा व वंदना कराने के काम में लगभग 10 हजार डोली मजदूर लगे हुए हैं।

बता दें कि पर्वत की चढ़ाई 9 किलोमीटर, पर्वत पर स्थित मंदिरों की परिक्रमा 9 किलोमीटर और पहाड़ से उतराई 9 किलोमीटर, यानी कुल 27 किलोमीटर की यात्रा को इन डोली मजदूरों द्वारा जैन तीर्थयात्रियों को अपनी डोली पर बैठाकर करवाना पड़ता है। ऐसे में मधुबन के आस-पास के गांवों के लाखों लोगों का जीवनयापन का जरिया इन यात्रियों से जुड़ा हुआ है।

लेकिन पिछले कुछ सालों से इन डोली मजदूरों की रोजी—रोटी पर ग्रहण सा लगने लगा है। कारण है, इलाके के कुछ दबंगों द्वारा आने वाले जैन तीर्थयात्रियों को मोटरसाइकिल (दोपहिया वाहन) से बिठा कर पर्वत पर स्थित मंदिरों की परिक्रमा व वंदना कराना। जिस पर डोली मजदूरों द्वारा पुरजोर विरोध व आंदोलन के बाद जिला प्रशासन व जिला पुलिस ने प्रतिबंध लगा कर क्षेत्र के कई जगहों पर इस आशय का बोर्ड लगा दिया। मगर इन दबंगों द्वारा प्रशासन के इस प्रतिबंध और आदेश का कोई असर नहीं हुआ और उनका काम बदस्तूर जारी रहा। जिसको लेकर डोली मजदूरों का नेतृत्व कर रही ट्रेड यूनियन झारखण्ड क्रांतिकारी मजदूर यूनियन द्वारा पिछले 6 मार्च को पारसनाथ पर्वत के मुख्य द्वार पर एकदिवसीय धरना दिया गया।

उल्लेखनीय है कि पारसनाथ पर्वत पर यात्रियों को बिठाकर वंदना करवाने का दोपहिया वाहन चालकों का सिलसिला बदस्तूर जारी है जिसे देख डोली मजदूरों के भीतर आक्रोश पनप रहा है। इसी का परिणाम है कि 6 मार्च को सैकड़ों की संख्या में डोली मजदूर पारसनाथ पर्वत के मुख्य द्वार पर एकदिवसीय धरना में बैठ कर अपना आक्रोश व्यक्त किया।

डोली मजदूरों का नेतृत्व कर रही ट्रेड यूनियन 'झारखण्ड क्रांतिकारी मजदूर यूनियन' के पदाधिकारियों द्वारा एक दिवसीय धरना में बैठे डोली मजदूरों से एक एक कर विचार लिया गया। कुल मिलाकर डोली मजदूर दोपहिया वाहन चालक से खफा दिखाई पड़ रहे थे। डोली मजदूरों का नेतृत्व कर रही यूनियन के पदाधिकारियों द्वारा दोपहिया वाहन चालकों को चेतावनी देते हुए साफ-साफ कह दिया गया कि  डोली मजदूरों के साथ अन्याय को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

मोटरसाइकल द्वारा तीर्थयात्रियों को पर्वत लाने ले जाने का काम कर रहे दोपहिया वाहन के चालक तीर्थयात्री को मोटरसाइकल पर ढोना बन्द करें अन्यथा इसका परिणाम बुरा होगा।

पदाधिकारियों ने अपने वक्तव्य में बताया कि स्थानीय प्रशासन के रोक लगाने के बावजूद मोटरसाइकल चालक बाज नहीं आ रहे। प्रशासन द्वारा पर्वत के मुख्य द्वार पर सूचना पट्ट लगाया गया है, जिसमें पर्वत के ऊपर तीर्थयात्री को बिठालकर ले जाना कानून अपराध है। बावजूद मोटरसाइकल चालक मानने को तैयार नहीं हैं और लुक छिप कर पर्वत पर वाहन लेकर चढ़ जाते हैं।

बताते चलें कि पारसनाथ पर्वत पर डोली मजदूरी कर अपने परिवार का भरण पोषण करने वाले मजदूर रात भर जाग कर यात्री का इंतजार करते हैं और सुबह यात्री दोपहिया वाहन में बैठ कर पर्वत की ओर निकल पड़ते हैं, वहीं डोली मजदूर को बैरंग खाली वापस लौटना पड़ जाता है, यही वजह है कि अपनी रोजी रोटी के लिए यह डोली मजदूर न्याय की गुहार लेकर झारखण्ड क्रांतिकारी मजदूर यूनियन के पास गए, जहां से उनके समस्या को गंभीरतापूर्वक लेते हुए यूनियन द्वारा आंदोलन की रूप रेखा तैयार करते हुए शनिवार को एकदिवसीय धरना दिया गया।

doli mazdoor police

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क्या पारसनाथ पर्वत पर दो पहिया वाहन चलाना वर्जित है ?

इस बावत झारखण्ड क्रांतिकारी मजदूर यूनियन के पदाधिकारी बताते हैं कि झारखण्ड के गिरिडीह जिला अंतर्गत मधुबन के पारसनाथ पहाड़ पर जैन धर्मावलंबियों को दर्शनार्थ शुरूआती दौर से ही डोली मजदूरों के द्वारा पारसनाथ पहाड़ पर 27 किलोमीटर का परिक्रमा कराया जाता रहा है। लेकिन करीब दो साल से पुलिस-प्रशासन के सहयोग से डोली मजदूरों की जगह सैकड़ों मोटरसाइकिल चलवाया जाता रहा है, जिससे हजारों डोली मजदूर बेरोजगार हो गए हैं। इस संदर्भ में गिरिडीह उपायुक्त, एसपी एवं मधुबन थाना को लिखित ज्ञापन भी दिया गया था, जिसके उपरांत पुलिस-प्रशासन ने यह आश्वासन भी दिया था कि पारसनाथ पहाड़ पर यात्रियों को परिक्रमा कराने के लिए डोली मजदूर ही जाएंगे तथा पहाड़ के नीचे प्रशासन ने एक बोर्ड भी लगा रखा है, जिसमें लिखा हुआ है 'पारसनाथ पर्वत पर दो पहिया वाहन चलाना वर्जित है' परन्तु प्रशासन की बात भी झूठी निकली और पहाड़ में धड़ल्ले से मोटरसाइकिल चलाई जा रही है। जिसके कारण डोली मजदूरों के बीच भुखमरी की स्थिति बन गई है। हालांकि डोली मजदूरों ने बार-बार प्रशासन को आगाह करते हुए अपना विरोध दर्शाते रहे हैं और उसी संदर्भ में आज 6 मार्च को सैकड़ों डोली मजदूरों ने झारखण्ड क्रांतिकारी मजदूर यूनियन के बैनर तले दो पहिया वाहन के साथ-साथ पुलिस-प्रशासन के खिलाफ धरना प्रदर्शन एवं आमसभा किया।

विशद कुमार

Web title - Doli laborers on the verge of starvation on Parasnath mountain due to two-wheelers

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