अजय बिष्ट की सरकार घटिया राजनीति की चरमसीमा पर पहुंची देश थूक रहा है : डॉ. अभिषेक मनु सिंघवी

Dr. Abhishek Manu Singhvi, Spokesperson, AICC addressed the media via video conferencing today.

नई दिल्ली, 20 मई 2020. अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता डॉ. अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा है कि अजय बिष्ट सरकार जो कर रही है, वो घटिया राजनीति की चरमसीमा है।

डॉ. अभिषेक मनु सिंघवी आज वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए पत्रकारों से बात कर रहे थे।

श्री सिंघवी की प्रेस वार्ता के मुख्य अंश – Highlights of Press Briefing of Dr. Abhishek Manu Singhvi

आप लोगों ने पिछले कई दिनों से देखा है, विशेष रूप से पिछले 4-5 दिन, कल और आज, बसें खड़ी हैं। आज भी ऊँचा नगला जो यूपी के बॉर्डर की जगह है, वहाँ लगभग 500 से ज्यादा बसें खड़ी हैं। हमने ये घोषणा कल की, आज वापस मैं आपके सामने औपचारिक घोषणा कर रहा हूँ कि 4 बजे तक खड़ी रहेंगी। पिछले 6 दिनों से अजय बिष्ट सरकार हमें चक्कर लगवा रही है, गोल-गोल घुमा रही है, इस राजनीति का औचित्य क्या है?

मजदूरों की कोई अगर मदद करना चाहता है, तो उसमें राजनीतिक रंग आप कहाँ से ले आते हैं?

श्रीमती प्रियंका गांधी वाद्रा जी ने तो यहाँ तक कह दिया कि आपको अगर उस पर बीजेपी के बैनर लगाने हैं या उत्तर प्रदेश सरकार को कहीं सही- झूठे, कैसे भी रूप से क्रेडिट लेना है तो, लगा लीजिए। लेकिन इसका औचित्य क्या है कि मई के अंत की गर्मी, पैर में छाले, खाने-पीने की व्यवस्था नहीं है। सड़कों पर बच्चे- महिलाएँ सब रो रहे हैं और आप बसें नहीं आने दे रहे हैं, नहीं चलने दे रहे हैं। पहली बात तो यह गैर- जिम्मेवारी, अवहेलना है कि खुद आप उत्तर प्रदेश और बिहार के लोगों को प्रदेश में नहीं आने दे रहे हैं। जबकि आपको आगे बढ़कर मदद करनी चाहिए थी। आप अगर असमर्थ हैं, अगर आपका मन नहीं है, आपका कोई उद्देश्य और है, परोक्ष या सीधा, तो कम से कम श्रीमती प्रियंका गांधी वाद्रा से, कांग्रेस पार्टी से, कांग्रेस के कार्यकर्ताओं से आप इस प्रकार की मदद लेने में क्यों झिझक रहे हैं?  क्या यह सस्ती राजनीति का सबसे घटिया, सबसे एक दुर्भाग्यपूर्ण उदाहरण नहीं होगा?

ऐसी चीज की भर्त्सना करने के लिए मेरे पास कड़े से कड़े शब्द नहीं है।

मैं समझता हूँ कि इस प्रकार की घटिया राजनीति के ऊपर देश थूक रहा है और अभी भी समय है, अभी भी समय नहीं गया है, आज हम 4 बजे तक वहाँ खड़े हैं। अगर आपको जरा भी देश की शर्म है, जनता जनार्दन की शर्म है, आँख की शर्म है, इन श्रमिकों की शर्म है, बच्चे-महिलाओं के लिए शर्म है, आपके अंदर मानवता का कुछ अंश भी, लेशमात्र भी है तो तुरंत इस बात को आप बदलिए। इस प्रकार की अजीब-गरीब हरकत बंद करिए।

“जुमले पीएं, या दावे खाएं?

बताइए मोदी जी! पेट भरने हम कहां जाएं?”

 

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उपाध्याय अमलेन्दु:
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