अदिति गुलेरी और उनकी कविताएं : बात सिर्फ बचपन की नहीं परिवार की भी है….

अदिति गुलेरी और उनकी कविताएं : बात सिर्फ बचपन की नहीं परिवार की भी है….

हाल ही में हिमाचल प्रदेश धर्मशाला से सुप्रसिद्ध परिवार की होनहार बिटिया डा. अदिति गुलेरी का प्रथम काव्य संग्रह बात वजूद की मेरे पास आया जिसे स्वयं अदिति ने भेजा और प्रतिक्रिया की उम्मीद भी रखी। किसी भी लेखक की यह मंशा हमेशा रहती है किसका पाठक उसकी किताब पर प्रतिक्रिया व्यक्त करे।

अदिति को मैं पहली बार धर्मशाला में ही मिली जब त्रिवेणी साहित्य अकादमी (Triveni Sahitya Academy) की संवाद यात्रा धर्मशाला में एक साहित्यिक आयोजन करने गई। अदिति मुझे अपने आप में एक कविता दिखी। प्यारी सी भोली मुस्कान के साथ वह मिली।

Dr. Aditi Guleri’s first poetry collection.

अदिति गुलेरी के साहित्यकार पिता प्रत्यूश गुलेरी का उन्हें सदैव प्रोत्साहन मिलता रहा व उसके भीतर का कवि पिता की रचनाएं पढ़ते पढ़ते जाग उठा। घर में साहित्यिक माहौल तो था ही। यही नहीं अदिति इस मामले में भी खुशकिस्मत रही कि उसे साहित्यिक लोगों का साथ मिला, उनका आना जाना लगा रहता जो अदिति में ऊर्जा भरता गया उन्हीं चीजों का परिणाम है पहला काव्य संग्रह ‘ बात वजूद की”।

इन कविताओं को पढ़ते हुए अदिति का चेहरा मेरे समक्ष था। जो उन्होंने अपनी इन कविताओं में रचा, वे सब उनके एहसास और उनके अपने अनुभव हैं। और यह गहरे अनुभव जो सदैव कवयित्री के संग रहेंगे, आगे जाकर निश्चय ही एक ऐसी हलचल मचायेंगे कि कवयित्री अपनी विशिष्ट जगह लेगी। अभी तो जिस सफर पर अदिति निकली है वहां अलग अलग प्रतिक्रियाएं मिलेंगी।

कवयित्री की एक रचना पृष्ठ 17 पर कवि की बेटी सचमुच अपनी पीढ़ी को सलाम किया है जो अदिति ही कर सकती थी। इन कविताओं को पढ़ते मैं अनुभव कर रही थी कि अदिति की परिपक्व सोच के पीछे भी उनके पिता का हाथ तो है साथ ही अदिति का अपना पठन-पाठन संवेदनशील होना भी मायने रखता है।

Aditi Guleri’s love poems

अदिति गुलेरी की कुछ प्रेम कविताएं भी हैं जैसे “जहां. मोहब्बत बढ़ती है”, इतनी फुर्सत कहां थी, “प्रेम का रंग”, “तुम्हारे शिकवे”. ऐसी कितनी ही कविताएं।

अदिति की एक खूबी है कि वह अनचाहा कुछ नहीं कहती। ऐसा लगता है कि अदिति की कलम में उसके व्यक्तित्व को लेकर ही शब्द उतरते हैं। उनकी एक कविता ‘मां’ बेहद संवेदनशील कविता है। अदिति गुलेरी की भाषा बेहद शिष्ट है। वह जब भी लिखती हैं एक खास वातावरण में लिखती होंगी। पारिवारिक जिम्मेदारी के चलते उनका लेखन थोड़े समय के लिए बेशक रुक गया पर दोबारा उसे मौका मिला तो उनकी कविताओं में नया निखार आया। उसी का परिणाम है यह संग्रह। आने वाले दिनों में अदिति और अच्छा साहित्य पाठकों को देंगी यह विश्वास है।

हां. पुस्तक का मूल्य खटकता है और टाइटल भी। अगर ध्यान दिया जाता तो टाइटल अच्छा हो सकता था।

डॉ. गीता डोगरा

पुस्तक का नाम – – बात वजूद की

कवयित्री – – अदिति गुलेरी

प्रकाशक. साहित्य भूमि, दिल्ली

मूल्य 400/

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उपाध्याय अमलेन्दु:
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