रोजाना बेकिंग सोडा पीना रूमेटाइड अर्थराइटिस जैसे ऑटोइम्यून (स्वप्रतिरक्षा) बीमारी से लड़ने में मददगार हो सकता है !

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Drinking baking soda could be an inexpensive, safe way to combat autoimmune disease

Baking soda: A safe, easy treatment for arthritis?

Best water for autoimmune disease | Benefits of baking soda | ऑटोइम्यून बीमारी के लिए सबसे अच्छा पानी | बेकिंग सोडा के फायदे

नई दिल्ली। वैज्ञानिकों का कहना है बेकिंग सोडा की एक दैनिक खुराक रुमेटीइड गठिया (Rheumatoid arthritis) जैसे ऑटोइम्यून रोगों की विनाशकारी सूजन को कम करने में मदद कर सकती है, ।

सामान्य रूप से प्रतिरक्षा प्रणाली हमें बीमारी व संक्रमण से बचाती है, जबकि ऑटोइम्यून वाले व्यक्ति में प्रतिरक्षा प्रणाली गलती से शरीर की स्वस्थ कोशिकाओं पर हमला करती है।

एक शोध में कहा गया कि बेकिंग सोडा या सोडियम बाइकॉर्बोनेट पीने से प्लीहा आसानी से प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया देता है। प्लीहा प्रतिरक्षा प्रणाली का हिस्सा है।

अमेरिका के जॉर्जिया के अगुस्ता विश्वविद्यालय के शोध के सह लेखक पॉउल ओ कोन्नोर के मुताबिक, निश्चित तौर पर बाईकॉर्बोनेट पीना प्लीहा पर असर डालता है और हमारा मानना है कि यह मीसोलिथल कोशिकाओं के जरिए होता है।

शोध के निष्कर्षों को ‘जर्नल ऑफ इम्यूनोलॉजी’ में “Oral NaHCO3 Activates a Splenic Anti-Inflammatory Pathway: Evidence That Cholinergic Signals Are Transmitted via Mesothelial Cells” शीर्षक से प्रकाशित किया गया है।

इसमें कहा गया है कि जब चूहे या स्वस्थ लोग बेकिंग सोडा का घोल पीते हैं तो यह अगली भोजन की खुराक को पचाने के लिए ज्यादा अम्ल बनाते हैं। यह प्लीहा पर मौजूद मीसोलिथल कोशिकाओं से यह कहता है कि सुरक्षात्मक प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया की कोई जरूरत नहीं है।

ओ कोन्नोर के मुताबिक इसका मूल संदेश है- इससे जीवाणु संक्रमण की संभावना नहीं होती।

क्या है रूमटाईड आर्थराइटिस

Rheumatoid arthritis रूमटाईड आर्थराइटिस जोड़ों को प्रभावित करने वाला एक ऑटोइम्यून विकार autoimmune disorder है। यह आमतौर पर जोड़ों पर आक्रमण करता है। अकसर इसमें जोड़ों में सूजन होती है, जोड़ लाल पड़ जाते हैं, जोड़ों में जलन व गर्मी होती है तथा दर्द होता है।

यह सिनोविअल झिल्ली synovial membrane की सूजन से शुरू होता है और धीरे-धीरे आसपास के मुलायम ऊतकों और जोड़ों पर हमला शुरू कर देता है।

रूमेटोइड आर्थराइटिस एक क्रोनिक डिसऑर्डर है, जो तीव्र उत्तेजना के साथ कई वर्ष तक बना रहता है। भारत में इसका उपचार काफी महंगा है और इसके विशेषज्ञों की भी अभी कमी है।

रूमेटोइड आर्थराइटिस की जांच के लिए टेस्ट

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