पोस्ट कोविड भारत में दीर्घावधि स्थिरता के लिए आर्थिक सुधार

Economic reforms for long-term stability in post covid India

तेजी से बढ़ते जलवायु संकट (Rapid climate crisis) के मद्देनजर पर्यावरण वैज्ञानिकों ने दुनिया को एक भयंकर महामारी की चेतावनी दी थी। वर्तमान महामारी ने दुनिया को भयभीत और आश्चर्यचकित कर दिया है और ये महामारी हर देश की आर्थिक प्रगति और सामाजिक सद्भाव की बुनियाद को प्रभावित करेगी। वर्ष 2008 में सारी दुनिया में आर्थिक मंदी आई थी (In 2008, there was economic recession all over the world.), जिससे संयुक्त राज्य अमेरिका, दक्षिण कोरिया और चीन जैसे देशों ने ऊर्जा-कुशल और कम कार्बन प्रौद्योगिकियों पर वैश्विक रूप से प्रतिस्पर्धी होकर निपटा था। लेकिन वर्ष 2020 का कोरोना संकट (Corona crisis of the year 2020) एक मानवीय संकट (Humanitarian crisis) है जिसका सारी दुनिया, खासकर भारत में मानवीय और सामाजिक विकास पर बहुत बुरा और गंभीर प्रभाव होगा।

Economic reforms and economic stimulus package for long-term stability in post-Covid India

भारत की पर्यावरण संस्था क्लाइमेट ट्रेंड्स (Environmental Institute Climate Trends) ने उत्तर-कोविड भारत में दीर्घावधि स्थिरता के लिए आर्थिक सुधार और आर्थिक प्रोत्साहन पैकेज के लिए एक ब्रीफिंग पेपर जारी किया है।

यह पेपर मुख्य रूप से उन क्षेत्रों के लिए राय और योजनाओं पर ध्यान केंद्रित करता है जो सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध हैं। यह कुछ मूल सुझाव भी देता है।

क्लाइमेट ट्रेंड्स की निदेशिका आरती खोसला के मुताबिक भारत के नीति-निर्माता और आर्थिक हितधारक इस ब्रीफिंग पेपर के अद्ययन से न केवल लॉकडाउन से उबर सकते हैं, बल्कि इसका उपयोग एक दुर्लभ अवसर के रूप में भी कर सकते हैं जो कि महामारी से पहले से ही बनी हुई समस्याओं को दूर करने का अवसर भी है।

पेपर में ऑटोमोबाइल, विद्युत, सतत शहरीकरण और निर्माण, स्टील और सीमेंट, तेल और गैस, कृषि और खाद्य आपूर्ति, सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के साथ नकदी बढ़ाना व अंतर्राष्ट्रीय सामान पैकेज पर ध्यान फोकस करके सुझाव दिए गए हैं, जिनसे भारत पोस्ट कोविड युग में पर्यावरण मित्र नीतियां अपनाकर अपनी अर्थव्यवस्था को पटरी पर ला सकता है।

अमलेन्दु उपाध्याय (Amalendu Upadhyaya) लेखक वरिष्ठ पत्रकार, राजनैतिक विश्लेषक व टीवी पैनलिस्ट हैं। वह हस्तक्षेप के संपादक हैं।

पेपर के मुताबिक अगले एक दशक में सूक्ष्म, स्थानीय और राष्ट्रीय स्तर पर जलवायु पर कार्रवाई की स्थिति बहुत नाजुक बनी हुई है, इसके प्रोत्साहन से सभी सामाजिक-आर्थिक वर्गों के लिए बड़े स्तर पर रोजगार सृजन भी होगा। स्थायी अर्थव्यवस्था के परिवर्तन के लिए कार्यबल को बड़े पैमाने पर तैयार करने की आवश्यकता है, यह सुनिश्चित करना कि आज का कौशल प्रशिक्षण भविष्य की नौकरियों पर आधारित हो और अनिश्चित क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर फिर से शिक्षित करने का कार्यक्रम उपलब्ध हो।

सुझाव दिया गया है कि डेस्क आधारित नौकरियों के लिए घर-से-कार्य और डिजिटल संचार को एक व्यावहारिक विकल्प के रूप में बढ़ावा दिया जाना चाहिए।

अमलेन्दु उपाध्याय

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उपाध्याय अमलेन्दु:
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