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मोहम्मद ख़ुर्शीद अकरम सोज़
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ईद आई अजब एक उदासी लिये
कोई कैसे किसी को मुबारक कहे
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ऐ ख़ुदा शुक्र है तेरी तौफ़ीक़ से
रोज़े रमज़ान के सारे पूरे हुए
ईद का चाँद भी आ गया है नज़र
इस पे कोविड का लेकिन पड़ा है असर
अब के आई है ईद ऐसे माहौल में
ख़ौफ़ छाया कोरोना का है हर तरफ़
लाखों इंसान हैं बे-बसी में पड़े
अल-मदद ऐ ख़ुदा की सदा हर तरफ़
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हर तरफ़ दुख के बादल हैं छाये हुए
जिस तरफ़ भी किसी की नज़र जाती है
न उमंग है कोई, न कोई जोश है
हर एक रूह प्यासी नज़र आती है
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ईद आई अजब एक उदासी लिये !!!
कोई कैसे किसी को मुबारक कहे