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रोजगार छीनने वाली योगी सरकार का रोजगार मेला भद्दा मजाक : वर्कर्स फ्रंट

मजदूरों का अपमान है श्रमिक कल्याण दिवस

वर्कर्स फ्रंट ने पूरे प्रदेश में मजदूर अधिकार दिवस के तहत किए कार्यक्रम

लखनऊ, 24 मार्च 2021, योगी सरकार के चार साल रोजगार छीनने के साल रहे है और जिसके पूरा होने पर आज सरकार ने श्रमिक कल्याण दिवस के तहत रोजगार मेला लगाया जो मजदूरों का अपमान और प्रदेश की जनता के साथ भद्दा मजाक है। श्रमिकों के अधिकार छीनने और बेरोजगार करने के खिलाफ आज वर्कर्स फ्रंट ने पूरे प्रदेश में मजदूर अधिकार दिवस मनाया। जिसमें बेरोजगार हो चुकी 181 व महिला समाख्या की महिलाओं, आंगनबाडियों, ठेका मजदूरों और बुनकरों ने अच्छी संख्या में हिस्सेदारी की।

इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि इस सरकार ने 181 वूमेन हेल्पलाइन और महिला समाख्या को बंद कर सैकड़ों महिलाओं को बेरोजगार कर दिया, हजारों आंगनबाडियों को काम से निकाल दिया, बिजली विभाग में टेक्नीशियन के विज्ञापित पद रद्द कर दिए, कोरोना महामारी के समय बकायदा शासनादेश निकाल कर छटंनी करने और नई भर्ती पर रोक लगाने के आदेश दिए, प्रदेश में 5 लाख से ज्यादा खाली पड़े पदों पर भर्ती शुरू नहीं की। प्रदेश में नोएड़ा से लेकर बनारस तक हर जिले में चल रहे छोटे मझोले उद्योग तबाह हो गए। संसद में केन्द्र सरकार तक को मानना पड़ा कि लाकडाउन के कारण नौकरी से हाथ धो चुके पचास प्रतिशत मजदूरों को वापस काम नहीं मिला, जिसमें सबसे बड़ी संख्या उत्तर प्रदेश की है।

इन कार्यक्रमों में भेजे पत्रकों में मुख्यमंत्री से मांग की गई कि यदि आपकी सरकार श्रमिक कल्याण के प्रति ईमानदार है तो मजदूरों की गुलामी के दस्तावेज नए लेबर कोडों को निरस्त करने के लिए प्रदेश विधानसभा से तत्काल प्रस्ताव पारित कर केन्द्र सरकार को भेजे, नए उद्योगों में एक हजार दिनों तक श्रम कानूनों पर लगी रोक हटाए, 181 वूमेन हेल्पलाइन और महिला समाख्या जैसी महिला हितकारी योजनाओं को पूरी क्षमता से चलाया जाए और 181 वूमेन हेल्पलाइन कर्मचारियों के बकाए वेतन का अविलम्ब भुगतान किया जाए, चुनावी वायदे के अनुरूप आगंनबाड़ी, आशा व मिड डे मील रसोइया को प्रदेश की न्यूनतम मजदूरी दी जाए और 62 साल पर नौकरी से निकाली गई आगंनबाडियों को सेवानिवृत्ति लाभ दिए जाए, ठेका मजदूरों को नियमित किया जाए, काले कृषि कानूनों को रद्द करने और एमएसपी पर कानून बनाने के लिए केन्द्र सरकार को उत्तर प्रदेश सरकार प्रस्ताव भेजे, जनहित में बिजली के निजीकरण को हर हाल में तत्काल रोका जाए और विद्युत संशोधन विधेयक 2021 को निरस्त किया जाए।

कार्यक्रमों का नेतृत्व वर्कर्स फ्रंट अध्यक्ष दिनकर कपूर, कर्मचारी संघ महिला समाख्या अध्यक्ष प्रीती श्रीवास्तव, आइपीएफ उपाध्यक्ष उमाकांत श्रीवास्तव, शगुफ्ता यासमीन, सोनभद्र में ठेका मजदूर यूनियन अध्यक्ष कृपाशंकर पनिका, मंत्री तेजधारी गुप्ता, वर्कर्स फ्रंट नेता व पूर्व सभासद नौशाद, मजदूर किसान मंच अध्यक्ष राजेन्द्र प्रसाद गोंड़, आगरा में प्रदेश उपाध्यक्ष इंजीनियर दुर्गा प्रसाद, पटरी दुकानदार एसोसिएशन के अध्यक्ष मुकंदीलाल नीलम, 181 वूमेन हेल्पलाइन की पूजा पांडेय, रेनू शर्मा, महक खुशबु, साधना राय, अनीता पांडेय, अंजू, सीमा, नेहा राय, रेखा सिंह, गीता शुक्ला, शिल्पी श्रीवास्तव, पार्वती, बिजनौर से खुशबू, रामसखी, अजंना सिंह, मऊ में बुनकर वाहनी अध्यक्ष एकबाल अहमद आदि ने किया।

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