International Anti-War Day : विश्व शांति के लिए आवश्यक है साम्राज्यवाद का अंत

International Anti-War Day : विश्व शांति के लिए आवश्यक है साम्राज्यवाद का अंत

अंतरराष्ट्रीय युद्ध विरोधी दिवस पर परिचर्चा

इंदौर, 5 सितंबर 2022. युद्ध मानव जाति के लिए केवल विनाश लेकर आता है, यह किसी के लिए भी हितकारी नहीं। संसाधनों पर वर्चस्व और मुनाफ़े की हवस के साम्राज्यवादी मंसूबे हमेशा से विश्व में शांतिपूर्ण सहअस्तित्व और मानवता के लिए खतरा रहे हैं। शस्त्रों की सौदागर ताकतें अपने स्वार्थ के लिए तनाव और युद्धों को बढ़ावा देती हैं। सतत समावेशी मानव विकास हेतु विश्व शांति अपरिहार्य है।

यह बात बीती 1 सितंबर- युद्ध विरोधी दिवस (International Anti War Day 2022) के अवसर पर अखिल भारतीय शांति एवं एकजुटता संगठन, इंदौर जिला इकाई द्वारा आयोजित चर्चा में विभिन्न वक्ताओं ने कही।

साम्राज्यवाद कैसी विश्व व्यवस्था चाहता है?

End of imperialism is necessary for world peace : Discussion on International Anti-War Day in Hindi
End of imperialism is necessary for world peace : Discussion on International Anti-War Day in Hindi

चर्चा में भाग लेते हुए एप्सो (AIPSO) के राष्ट्रीय सचिव विनीत तिवारी (Vineet Tiwari) ने कहा कि युद्धों को प्रोत्साहित करने वाले पूँजीवादी देश भी जब उनके आर्थिक हितों पर युद्ध का विपरीत असर होने लगता है तो शांति का नारा लगाते हैं। अमेरिकी साम्राज्यवाद एक ध्रुवीय विश्व व्यवस्था चाहता है और दुनिया के पिछड़े हुए कमजोर देशों पर यह कहकर हमले करता है कि वह वहां प्रजातंत्र स्थापित करना चाहता है। इराक और अफगानिस्तान की बर्बादी इसके सबसे बड़े उदाहरण हैं जहां पर्याप्त आर्थिक संसाधन होने के बावजूद जनता को बेतहाशा संकट झेलने पड़े हैं।

उन्होंने हाल में श्रीलंका में फैली बदहाली और रूस-यूक्रेन, अमेरिका और चीन के बीच चल रहे सामरिक युद्ध के पीछे के उन कारणों पर भी रोशनी डाली जिन्हें मुख्यधारा का मीडिया छिपाता है।

लेनिन को उद्धृत करते हुए उन्होंने कहा कि जब दो साम्राज्यवादी देश आपस में युद्ध करते हैं तो वही समय क्रांतिकारी ताक़तों के लिए उपयुक्त होता है कि वे साम्राज्यवाद की व्यवस्था को उखाड़ फेंकें। बिना साम्राज्यवाद के अंत के युद्धों का अंत नहीं होगा।

विगत ढाई दशक में बदल गई है दुनिया

गांधीवादी विचारक और वरिष्ठ अधिवक्ता अनिल त्रिवेदी ने कहा कि पिछले 20-25 सालों में दुनिया बहुत बदल गई। युद्ध जनित विनाश और विध्वंस के स्थापित आर्थिक और राजनीतिक परिणामों (Established economic and political consequences of war-caused destruction and devastation) के अलावा भी नये-नये दुष्परिणाम देखने को मिल रहे हैं। रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण वहां मेडिकल शिक्षा के लिए गए साधारण परिवारों के 20 से 25 हजार विद्यार्थी पढ़ाई अधूरी छोड़कर सुरक्षित भारत तो आ गए, लेकिन अब उनका भविष्य अधर में लटक गया।

श्री तिवारी ने आगे कहा कि निशस्त्रीकरण तो वैश्विक स्तर पर चाहिए ही साथ ही देश में विचारों से लेकर हर क्षेत्र में आंतरिक युद्ध चल रहा है वह भी उतना ही महत्वपूर्ण है। हमें इस आंतरिक संघर्ष के लिए युद्ध स्तर पर जनता के बीच जाना होगा।

युद्ध क्यों होते हैं?

एप्सो ज़िला इकाई के उपाध्यक्ष विजय दलाल ने कहा कि प्रथम महायुद्ध से लेकर जितने भी युद्ध हुए सभी के मुख्य कारण आर्थिक, खासतौर से साम्राज्यवादी देशों द्वारा अपने बाजार विस्तार की भूख व वैश्विक प्रतिस्पर्धा के कारण शस्त्रों का व्यापार रहा है, इसलिए वो हमेशा दुनिया में तनाव चाहते हैं और हरेक देश द्वारा अपने बजट का सेनाओं पर अधिक से अधिक खर्च हो यह चाहते हैं ताकि हथियारों की मांग बनी रहे और उनकी खपत होती रहे। यह दुनिया बगैर युद्धों के होती तो आज इस दुनिया में एक भी व्यक्ति भूखा नहीं सोता।

उन्होंने कहा कि सोवियत संघ के बिखराव का एक बहुत बड़ा कारण अमेरिका से शस्त्रों और स्पेस की प्रतिस्पर्धा में होने वाला बजट का बड़ा हिस्सा, जो उस देश की आबादी के विकास पर खर्च होना था व्यर्थ जाना था।

माकपा राज्य सचिव मंडल सदस्य कैलाश लिम्बोदिया ने कहा कि रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध साम्राज्यवादी अमेरिका और नाटो समूह द्वारा थोपा गया है। इस युद्ध से रूस और चीन को कमजोर करने के मंसूबे थे मगर अमेरिका उसमें कामयाब नहीं हो सका।

उक्त चर्चा में सोशलिस्ट पार्टी (Socialist Party) के रामस्वरूप मंत्री, किसान मोर्चा (Kisaan Morcha) के अरुण चौहान, सीटू(CITU) के भगीरथ कछवाय, महिला फ़ेडरेशन (NFIW) की सारिका श्रीवास्तव, प्रलेस (PWA) के केसरी सिंह चिडार, वित्त निगम (FC) के सुनील चंद्रन, एमपीबीईए (MPBEA) के मोहन कृष्ण शुक्ला, बी एस सोलंकी, योगेन्द्र महावर, एटक (AITUC) के भारत सिंह ठाकुर, दिलीप कौल सहित बड़ी संख्या में सदस्य उपस्थित थे।

संचालन रूद्रपाल यादव ने किया और आभार प्रदर्शन विवेक मेहता ने किया।

परमाणु संयंत्र के इर्दगिर्द असैन्य क्षेत्र बनाने और युद्ध को संवाद के ज़रिए हल करने का प्रस्ताव पारित

अंतरराष्ट्रीय शांति दिवस पर एप्सो, इंदौर द्वारा आयोजित बैठक में एप्सो के राष्ट्रीय सचिव विनीत तिवारी ने यह प्रस्ताव पेश किया कि यूक्रेन स्थित जपोरिशिश्या परमाणु संयंत्र के आसपास सैन्यविहीन क्षेत्र बनाया जाना चाहिए। यह परमाणु संयंत्र विश्व के दस सबसे बड़े परमाणु संयंत्रों में से एक है और यूरोप का सबसे बड़ा परमाणु संयंत्र है। यह संयंत्र सोवियत संघ द्वारा बनाया गया था। अगर रूस यूक्रेन युद्ध की कोई चिंगारी इस परमाणु संयंत्र तक पहुँची तो परमाणु विकिरण से होने वाली तबाही का अंदाजा लगाना भी मुश्किल है। इसलिए रूस और यूक्रेन दोनों देशों की सरकारों पर यह अन्तरराष्ट्रीय दबाव बनाया जाना चाहिए कि परमाणु संयंत्रों के इर्दगिर्द किसी तरह की सैन्य कार्यवाही न हो।

इस दबाव के अलावा विश्व के सभी शांतिप्रिय संगठनों और व्यक्तियों को दोनों देशों के बीच जारी युद्ध को जल्द से जल्द संवाद के माध्यम से समाप्त करना चाहिए ताकि मानवता का और अधिक नुकसान न हो।

यह प्रस्ताव सर्वसम्मति से सभा द्वारा पारित किया गया।

युद्ध और महामारी लुटेरे शासकों के लिए हमेशा मुफीद और फायदेमंद होती है

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