अच्छा मर भी गए तो क्या होगा ? इतनी बड़ी जनसंख्या है, आप विदेशी संबंध निभाइये

यमलोक में भी दीये जलाकर दिया जा रहा है एकजुटता का परिचय!

Even in Yamlok, lamps are being burnt, showing solidarity!

रात मुझे सपना आया कि जो लोग कोरोना से मरे हैं (People who died from Corona) वे यमलोक में भी दीये जलाकर एकजुट हैं। यमलोक में भेजने पर प्रधानमंत्री का आभार व्यक्त कर रहे हैं। उनका कहना है कि प्रधानमंत्री जी मान गए आपकी दरियादिली को। भारतीयों के स्वागत के लिए तो वे तैयार बैठे हैं। आप विदेशियों का बचाकर विश्वविजेता बनिये।

उनका कहना है कि उन्हें इस बात की पीड़ा हो रही है कि अमेरिका को आप कोरोना से निपटने में कारगर साबित हो रही मलेरिया रोधी दवा हाइड्रो क्लोरोक्वीन (Anti-malarial drug hydroxychloroquine) को देने के लिए खुद नहीं जा रहे हैं। दवा के साथ ट्रंप के गले में हाथ डालकर आपका फोटो वे देख लेते तो उन्हें बहुत सुकून पहुंचता।

दिल्ली से पैदल जाते हुए जो मजदूर आगरा में मरा है, वह कह रहा था कि मोदी सरकार में भूखा रह-रह कर मैं बहुत मजबूत हो गया था। पैदल ही चला तो अपने गांव के लिए था पर मोदी का चेहरा मेरी नजरों के सामने आते ही मुझमें इतनी ताकत आ गई कि यमलोक में ही छलांग लगा दी।

इन लोगों का कहना है कि उन्हें खुशी है भले ही यह दवा उनके काम न आई पर अमेरिका के लिए काम जरूर आ जायेगी।

दीयों के जगमगाते प्रकाश में ये लोग कह रहे हैं कि हमारे प्रधानमंत्री बहुत दयालु हैं। त्याग बलिदान के मामले में उनका कोई जवाब नहीं। हम तो शहीद हुए हैं और भी हो जाएंगे तब भी गम नहीं। हमारे प्रधानमंत्री की अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मित्रता निभाने में यदि हमारे पूरे परिवार को भी शहादत देनी पड़ गई तब भी वे खुश ही होंगे।

उनका कहना है कि इससे यमलोक में उनकी एकजुटता और बढ़ जाएगी। ये लोग इस बात पर गुस्सा भी जाहिर कर रहे थे कि यह दवा ट्रंप ने हमारे विश्वविजेता होने जा रहे प्रधानमंत्री को धमकाकर ली है।

इन लोगों ने मोदी को आश्वस्त किया है कि हमारे परिजन, परिचित, रिश्तेदार और दूसरे भरतीय तो थाली बजाकर और दीये जलाकर एकजुटता के बल पर भी जिंदा रह लेंगे। अमेरिका के लोगों का बचना जरूरी है। इनका कहना था कि मोदी जी अभी तो हमारे यहां बहुत कम लोग मरे हैं। जब अमेरिका के बराबर हो जाएंगे तब देख लेंगे। विश्वविजेता बनना है तो यह त्याग तो करना ही होगा। किट के अभाव में हमारे डॉक्टर मरे सो मरे, अपने देश के लोगों को दवा मिले या न मिले। विदेशियों को जरूर मिलनी चाहिए।

CHARAN SINGH RAJPUT, CHARAN SINGH RAJPUT, चरण सिंह राजपूत, लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं।

ये लोग मोदी की तारीफ करते हुए कह रहे थे कि प्रधानमंत्री जी आपने साबित कर दिया कि आप भारतीय संस्कृति से ओतप्रोत हैं। अपनों को तो बाद में भी बचा लेंगे। मर भी गए तो क्या होगा? इतनी बड़ी जनसंख्या है। थोड़ी सी कम हो जाएगी कौन सा आसमान टूट जाएगा। हमारे लिए तो दूसरे पहले रहे हैं। यह आपने कोरोना फैलने के शुरुआती दिनों में भी किया। जो भारतीय मूल के लोग हमारे संसाधनों, हमारी संस्कृति को दरकिनार कर विदेश चले गए थे। उनको आप ससम्मान अपने देश में ले आये।

ये लोग कह रहे थे कि उन्हें इस बात का भी दुख नहीं है कि वे विदेशियों से संक्रमित होकर यहां यमलोक पहुंचे हैं।

इनका कहना था कि प्रधानमंत्री ने बड़ा दिल दिखाकर देश की राजधानी दिल्ली में लॉक डाउन के बावजूद तब लीगी जमात का कार्यक्रम होने दिया। कार्यक्रम में विदेशियों को भी आने दिया।

ये लोग कह रहे थे कि जब देश में मलेरिया फैलेगा और मरीजों को दवा भी न मिल सकेगी। और जो हमारे साथी यमलोक आएंगे तो हम सब मिलकर फिर थाली बजा लेंगे। फिर से दीये जलाकर एकजुटता का परिचय दे देंगे आप विदेशी संबंध निभाइये।

चरण सिंह राजपूत

Donate to Hastakshep
नोट - हम किसी भी राजनीतिक दल या समूह से संबद्ध नहीं हैं। हमारा कोई कॉरपोरेट, राजनीतिक दल, एनजीओ, कोई जिंदाबाद-मुर्दाबाद ट्रस्ट या बौद्धिक समूह स्पाँसर नहीं है, लेकिन हम निष्पक्ष या तटस्थ नहीं हैं। हम जनता के पैरोकार हैं। हम अपनी विचारधारा पर किसी भी प्रकार के दबाव को स्वीकार नहीं करते हैं। इसलिए, यदि आप हमारी आर्थिक मदद करते हैं, तो हम उसके बदले में किसी भी तरह के दबाव को स्वीकार नहीं करेंगे। OR
उपाध्याय अमलेन्दु:
Related Post
Leave a Comment
Recent Posts
Donate to Hastakshep
नोट - हम किसी भी राजनीतिक दल या समूह से संबद्ध नहीं हैं। हमारा कोई कॉरपोरेट, राजनीतिक दल, एनजीओ, कोई जिंदाबाद-मुर्दाबाद ट्रस्ट या बौद्धिक समूह स्पाँसर नहीं है, लेकिन हम निष्पक्ष या तटस्थ नहीं हैं। हम जनता के पैरोकार हैं। हम अपनी विचारधारा पर किसी भी प्रकार के दबाव को स्वीकार नहीं करते हैं। इसलिए, यदि आप हमारी आर्थिक मदद करते हैं, तो हम उसके बदले में किसी भी तरह के दबाव को स्वीकार नहीं करेंगे। OR
Donations