हर परिवार को मिले 35 किलो मुफ्त राशन – दिनकर

दिनकर कपूर Dinkar Kapoor अध्यक्ष, वर्कर्स फ्रंट

Every family should get 35 kg free ration – Dinkar

हर दैनिक वेतन मजदूर को मिले100 दिन की मनरेगा मजदूरी

मजदूर किसान मंच ने नागरिकों की जीवन रक्षा के लिए मुख्यमंत्री को भेजा पत्र

लखनऊ 1 अप्रैल 2020, कोरोना संक्रमण के कारण जारी लाकडाउन (Continued lockdown due to corona infection) में आज से शुरू हुआ खाद्यान्न वितरण सरकार द्वारा की गयी घोषणा के अनुरूप नहीं है। इस पर विरोध जताते हुए आज मजदूर किसान मंच व वर्कर्स फ्रंट की तरफ से मुख्यमंत्री को पत्र भेजा गया। पत्र में कोरोना संकट के कारण नागरिकों की जीवन रक्षा के लिए सरकार से विभिन्न मांगें की गयी हैं। वर्कर्स फ्रंट के अध्यक्ष दिनकर कपूर ने अपने पत्र में सीएम के संज्ञान में लाया है कि उनकी सरकार ने 24 मार्च को यह घोषणा की थी कि दैनिक मजदूर, निर्माण श्रमिक व मनरेगा श्रमिक को 20 किलो गेहूं और 15 किलो चावल दिया जायेगा . लेकिन आज से शुरू हुए खाद्यान्न वितरण में इसका पालन नहीं किया गया।

उन्होंने सरकार से प्रदेश के हर पात्र गृहस्थी परिवार को 35 किलो राशन, दाल, नमक, चीनी, तेल, मसाले, साबुन आदि तमाम आवश्यक खाद्य सामग्री निःशुल्क देने की मांग की है। पत्र में सरकार से हर पात्र गृहस्थी परिवार, सभी पंजीकृत निर्माण श्रमिक, मनरेगा श्रमिक व दैनिक मजदूरों को 100 दिन की मनरेगा के बराबर मजदूरी का भुगतान करने, किसानों से वसूली पर रोक लगाने, उनकी फसल की गांव स्तर पर स्वामीनाथन रपट के अनुसार तय मूल्य पर सरकारी खरीद की गारंटी करने और पीडीएस के जरिए वहीं उसका वितरण करने, किसानों व छोटे मझोले व्यापारियों के सभी कर्जे माफ करने और जिन किसानों की फसल प्राकृतिक आपदा से बर्बाद हुई है, उन्हें फसल के नुकसान के बराबर मुआवजा देने की मांग की गयी है।

पत्र में प्रदेश में कोरोना संक्रमण के सामाजिक स्तर पर फैलने से रोकने के लिए सरकारी चिकित्सा संस्थानों व अस्पतालों को साधन सम्पन्न बनाने, सभी अस्पतालों में चिकित्सीय कर्मचारियों व सफाई कर्मियों के लिए प्राणरक्षक सुरक्षा उपकरण और आवश्यक जांचें कराने और वेंटिलेटर समेत आवश्यक सभी उपकरण की युद्धस्तर पर व्यवस्था करने और प्रदेश के सारे निजी अस्पतालों को सरकार द्वारा अधिग्रहीत करने और प्रवासी मजदूरों के साथ प्रदेश में पुलिस व प्रशासन द्वारा की जा रही बर्बर दमनात्मक कार्यवाहियों पर रोक के लिए कड़े निर्देश जारी करने और इसके लिए जिलाधिकारी व पुलिस अधीक्षक की जबाबदेही तय करने की अपेक्षा की गयी है।

 

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