जानिए हमारी आँखें क्यों फड़कती हैं, क्या है इसका विज्ञान?

जानिए हमारी आँखें क्यों फड़कती हैं, क्या है इसका विज्ञान?

Know why our eyes twitch? | Eye Twitching in Hindi

क्या होता है मायोकेमिया

आँख फड़कने को चिकित्सक आम तौर पर मायोकेमिया कहते हैं। इसमें हमारी आँखों की पलकें, सामान्यतया ऊपर वाली, लगातार झपकती है और इस पर हमारा कोई बस नहीं चलता। लेकिन इससे हमारी निचली पलकें भी प्रभावित हो सकती हैं। ध्यान करने वाली बात यह भी है कि ऐसे में एक बार में एक आँख ही प्रभावित होती है। आँख फड़कने की भी एक पूरी रेंज है। कभी तो इसे मुश्किल से ही नोटिस कर पाते हैं तो कभी यह हमें मुश्किल में डाल देती है।

आँखों का फड़कना (eye twitching) अक्सर बहुत थोड़े समय में ही अपने-आप बन्द हो जाता है। पर कभी यह कई घण्टे, दिन या उससे भी ज़्यादा देर तक बना रह सकता है। आँखों के फड़कने से वैसे तो कोई दर्द नहीं होता पर ज़्यादा देर तक ऐसा होना खीझ पैदा करता है।

आखिर क्यों फड़कती हैं आंखें ?

आँखों के कभी-कभार फड़कने के कारणों का हर बार कोई पक्का अन्दाज़ा नहीं लगाया जा सकता। पर हाँ, कुछ कारणों से आँखों का फड़कना शुरू हो सकता है जैसे, शराब का सेवन करने पर, बहुत चमकदार रोशनी होने पर, कैफीन के अधिक सेवन पर, अधिक थकावट, आँखों या भीतरी पलकों में जलन होने पर, अतिरिक्त शारीरिक श्रम, धूम्रपान, तनाव और हवा लगने की स्थिति में।

नेत्रच्छदाकर्ष, ब्लेफेरोस्पाज्म, वर्त्माकर्ष, पलकों का उद्वेष्ट

आँखों का फड़कना कभी-कभी दोनों आँखों की पलकों के तेजी से झपकने से शुरु होता है और समापन पलकों को भींचकर बन्द होने से होता है। इस किस्म से आँख फड़कने को ब्लेफेरोस्पाज्म (blepharospasm in Hindi) के नाम से जाना जाता है।

ब्लेफेरोस्पाज्म बहुत असाधारण या गम्भीर नहीं है। इस तरह की समस्या से जूझने वालों की आँखें भी सामान्य ही हैं (इनकी दृष्टि में कोई दोष नहीं है)। पर यह आपके रोज़मर्रा के जीवन को गम्भीर रूप से प्रभावित कर सकती है। पलकों में जकड़न इस हद तक हो सकती है कि पलकें कई घण्टों के लिए बन्द रह जाएँ।

क्यों होता है ब्लेफेरोस्पाज्म?

ब्लेफेरोस्पाज्म आँखों के इर्द-गिर्द की मांसपेशियों में कोई गड़बड़ी से होता है। हालाँकि हमें ठीक-ठीक नहीं पता कि ब्लेफेरोस्पैजम किस वजह से होता है (what causes blepharospasm) पर हाँ, यह है कि यह कभी भी और बिना किसी पूर्व-चेतावनी के शुरू हो जाता है। आँखों के फड़कने में कमी आती है या फिर वह पूरी तरह बन्द भी हो जाता है जब हम नींद में हों या अपने काम में तल्लीन हों। यह महिलाओं और पुरुषों, दोनों में समान रूप से हो सकता है।

हेमिफेशियल स्पाझम या हेमीफेसियल ऐंठन

एक और तरह का आँखों का फड़कना जिसे हेमिफेशियल स्पाझम (hemifacial spasm in Hindi) कहते हैं काफी दुर्लभ होता है। इसमें पहले पलकें प्रभावित होती हैं और फिर धीरे-से मुँह के चारों तरफ की मांसपेशियाँ भी इसके प्रभाव में आ जाती हैं।

क्यों होता है हेमिफेशियल स्पाझम?

हेमिफेशियल स्पाझम, चेहरे की मांसपेशियों को संचालित करने वाली तंत्रिका के ऊपर से गुजरने वाली धमनी के दबाव पड़ने से होता है। आँखों का फड़कना कुछ अन्य स्वास्थ्य परिस्थितियों में भी देखने को मिलता है जैसे ग्लूकोमा, कॉर्नियल अब्रेशन, पलकों की सूजन, सूखी आंखें आदि।

तंत्रिका तंत्र की तकलीफ की वजह से भी हो सकता है आँखों का फड़कना

आँखों का फड़कना तंत्रिका तंत्र की कुछ असाधारण तकलीफ की वजह से भी हो सकता है जैसे टॉरटेज़ सिंड्रोम, मल्टिपल स्क्लेरोसिस, पार्किंसन्स डिसीज़ (Tourette’s Syndrome, Multiple Sclerosis, Parkinson’s Disease) आदि। जब भी आँखों का फड़कना उपर्युक्त वजहों से होगा तो इन बीमारियों के कुछ अन्य लक्षण भी देखने में आएँगे।

आँखों के फड़कने की एक और सम्भावना बनती है दवाओं के साइड इफेक्ट से। खास तौर पर उन दवाओं के साइड इफेक्ट से जो एपीलेप्सी और साइकोसिस के इलाज में इस्तेमाल होती हैं।

आँखों के फड़कने सम्बन्धित अन्धविश्वास

आँखों के फड़कने के क्षणिक और खास प्रभाव होने और इसका कोई ठीक-ठीक कारण ज्ञात न होने की वजह से ही शायद इसके बारे में तरह-तरह की अटकलें लगाई जाती रही हैं। और यही तो रास्ता है अन्धविश्वास की दुनिया का। आपने यह अवश्य ही सुना होगा कि जब आँख फड़कती है तो उस वक्त कोई आपको याद कर रहा होता है।

महिलाओं की दाई आंख फड़कने से क्या होता है?

औरतों की दाईं आँख का फड़कना (women’s right eye twitching) अपशकुन माना जाता है, खास तौर पर जब आप शादी-शुदा हों और एक माँ भी। मान्यता यह है कि ऐसे में आपके पति या बच्चों को कोई तकलीफ हो सकती है। दुनिया-भर में आँख फड़कने को लेकर ऐसे कई भय व्याप्त हैं।

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Photo by Ali Pazani on Pexels.com
आँख फड़कना कैसे रोकें? कैसे रोकें आँख का फड़कना?

ज़्यादातर लोग कुछ करते नहीं बल्कि आँख फड़कना खुद-ब-खुद रुकने का इन्तज़ार करते हैं। कभी-कभी कुछ महिलाएँ अपनी दाईं आँख फड़कने से रोकने के लिए घास का छोटा तिनका खोजती हैं जिसे वे पलकों पर रख सकें। तिनका न मिलने की स्थिति में कागज का एक टुकड़ा अपनी जीभ से गीला कर पलक के ऊपर इस आशा में रखती हैं कि फड़कन दूर हो जाएगी। लेकिन फड़कती आँख को शान्त करने के सुरक्षित और आसान तरीके भी हैं – आँखों को हल्के हाथों से मसाज करें, उन्हें ठण्डे पानी से धोएँ, या आँखों पर आलू या खीरे के टुकड़े रखें।

अन्त में, उन लोगों के लिए जो लगातार कम्प्यूटर पर काम करते हैं, टेबलेट, मोबाइल फोन का अधिक इस्तेमाल कर रहे हैं, हम बता दें कि इन वजहों से भी आँखों की फड़कन सम्भव है। चिकित्सक ऐसे लोगों के लिए 20-20-20 की सलाह देते हैं यानी कि 20 मिनट लगातार काम करने के बाद करीब 20 मीटर दूर की वस्तु को लगभग 20 सेकण्ड के लिए देखना। इससे आँखों की मांसपेशियों को कुछ देर के लिए आराम मिलेगा, आँखें लम्बे समय के लिए सुरक्षित रहेंगी। इस तरह से अगली बार जब आँख फड़के तो हो सकता है हमें उसका पक्का कारण पता न चल पाए पर अगर ऊपर बताई गई कुछ खास परिस्थितियाँ न हों तो यह कोई विशेष चिन्ता की बात नहीं है।

रुद्राशीष चक्रवर्ती

(देशबन्धु में प्रकाशित लेख का संपादित रूप)

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