द्वितीय विश्वयुद्ध : मानवजाति के इतिहास की सबसे बड़ी त्रासदी

द्वितीय विश्वयुद्ध : मानवजाति के इतिहास की सबसे बड़ी त्रासदी

द्वितीय विश्वयुद्ध से जुड़े तथ्‍य और जानकारियां | Facts and information related to World War II

  • द्वितीय विश्व-युद्ध के समय दुनिया में कुल कितने देश थे?
  • दूसरे विश्व युद्ध में कौन कौन से देश शामिल थे?
  • द्वितीय विश्व युद्ध में कितने लोगों की मौत हुई थी?
  • द्वितीय विश्वयुद्ध में भारत

द्वितीय विश्व-युद्ध मानवजाति के इतिहास की सबसे बड़ी त्रासदी रहा है। उस समय दुनिया में कुल 73 देश थे, जिनमें से 62 देशों ने उस दूसरी लड़ाई में भाग लिया था जो 40 देशों के इलाके में फैल गई थी। दुनिया की 80 प्रतिशत से ज़्यादा जनता द्वितीय विश्व-युद्ध से प्रभावित हुई थी। दुनिया के तीन महाद्वीपों पर और चार महासागरों में वह लड़ाई लड़ी गई थी। यह दुनिया का एकमात्र ऐसा युद्ध था, जिसमें परमाणु बमों का इस्तेमाल किया गया।

अगस्त 1945 में एक अमरीकी बमवर्षक विमान ने अमरीकी राष्ट्रपति हैरी ट्रूमैन के आदेश पर जापान के हिरोशिमा और नागासाकी नगरों पर एटम बम गिराए थे और इसके बाद इन नगरों में दो लाख से ज़्यादा लोग मारे गए थे। कुल मिलाकर दूसरे विश्व-युद्ध में 6 करोड़ से ज़्यादा लोग मारे गए थे।

पुतिन मिस्र, वियतनाम, भारत और चेक गणराज्य के नेताओं से मिलेंगे

9 मई को रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Russian President Vladimir Putin) मिस्र, वियतनाम, भारत, दक्षिणी अफ्रीका. चेक गणराज्य के नेताओं और संयुक्त राष्ट्र संघ के महासचिव से मुलाक़ात करेंगे। रूस के राष्ट्रपति के सहायक यूरी उषाकोफ़ ने बताया कि पूतिन मिस्र के राष्ट्रपति अस-सीसी, भारत के राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी, वियतनाम के राष्ट्रपति, संयुक्त राष्ट्र संघ के महासचिव बान की मून (United Nations Secretary-General Ban Ki-moon) और चेक गणराज्य के राष्ट्रपति मिलोस ज़ेमान और दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति जेकब ज़ूमा (South African President Jacob Zuma) से बातचीत करेंगे। उन्होंने बताया कि 8 से 10 मई के बीच द्वितीय विश्व-युद्ध में विजय की 70 वीं जयन्ती के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रमों में 27 देशों के नेता भाग लेंगे। इनके अलावा संयुक्त राष्ट्र संघ के महासचिव बान की मून, यूनेस्को की महानिदेशक इरीना बोकवा और कुछ अन्य अन्तरराष्ट्रीय संगठनों के प्रमुख भी इन कार्यक्रमों में सहभागिता करेंगे। 

उन्होंने कहा कि इन देशों के प्रमुखों के अलावा अन्य प्रतिष्ठित अतिथि भी कार्यक्रमों में शामिल होंगे। जैसे ब्रिटेन के भूतपूर्व प्रधानमंत्री विंस्टन चर्चिल के पौत्र (Grandson of former British Prime Minister Winston Churchill) भी, जो ब्रिटिश संसद के सदस्य हैं, रूस आएंगे। इनके अलावा इटली, फ्राँस, मोनाक्को आदि देशों के विदेश मंत्री और रक्षामंत्री भी द्वितीय विश्व-युद्ध में विजय की 70 वीं जयन्ती के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रमों में भाग लेने के लिए मास्को आएँगे।

9 मई को बान की मून मास्को पहुंचेंगे

संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून मास्को में महान देशभक्तिपूर्ण युद्ध में विजय की 70 वीं वर्षगांठ को समर्पित समारोही कार्यक्रमों में भाग लेंगे तथा वह रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मिलने की भी योजना बना रहे हैं।

भारतीय ग्रेनेडियर द्वितीय विश्व युद्ध में विजय की 70 वीं जयन्ती परेड में भाग लेंगे

भारतीय सेना का विशेष सैन्य-दल ‘ग्रेनेडियर’ के जवान द्वितीय विश्व युद्ध में विजय की 70 वीं जयन्ती के अवसर पर मास्को में आयोजित परेड में हिस्सा लेंगे। यह जानकारी भारत के रक्षा मन्त्रालय के प्रवक्ता सीतांश कर ने दी है। भारतीय सेना के 70 जवान पहली बार मास्को के लाल चौक पर मार्च करेंगे।

जानिए भारत के ग्रेनेडियर सैन्य-दल के बारे में

ग्रेनेडियर सैन्य-दल का गठन सबसे पहले 1779 में किया गया था। इस समय भारत की थलसेना में 19 ग्रेनेडियर बटालियनें हैं।

मास्को में आयोजित सैन्य परेड अब तक लाल चौक पर आयोजित परेडों के इतिहास में सबसे बड़ी परेड होगी। रूस ने इस परेड में भाग लेने के लिए 68 देशों के नेताओं को आमन्त्रित किया है। इनके अलावा यूनेस्को, संयुक्त राष्ट्र संघ, यूरोसंघ और यूरो परिषद के संचालकों को भी इस परेड के अवसर पर आमन्त्रित किया गया है।

द्वितीय विश्व-युद्ध के सैनिकों को सोची में पदक दिए गए

महान् देशभक्तिपूर्ण युद्ध में (द्वितीय विश्व-युद्ध में) विजय की 70 वीं जयन्ती के कार्यक्रम सोची में उस युद्ध में भाग लेने वाले पूर्व-सैनिकों को जयन्ती-पदक प्रदान करने से शुरू हुए। द्वितीय विश्व-युद्ध में भाग लेने वाले पूर्व-सैनिकों को जयन्ती-पदक प्रदान करने का यह कार्यक्रम रूसी पालदार जहाज़ क्रुज़ेनश्तेर्न’ (Russian cruise ship ‘Kruzenshtern‘) के डेक पर आयोजित किया गया था। इस तरह रूसी पालदार जहाज़ ‘क्रुज़ेनश्तेर्न’ ने महान् विजय की 70 वीं जयन्ती को समर्पित अपना अन्तरराष्ट्रीय ऐतिहासिक स्मरणीय अभियान सोची में पूरा किया। दो महीने तक चले इस अभियान के दौरान पालदार जहाज़ ने बेल्जियम, फ्राँस और यूनान की यात्रा की।

‘क्रुज़ेनश्तेर्न’ तीन दिन तक सोची में रुकेगा। इन तीन दिनों के भीतर सोची का कोई भी निवासी या अतिथि इस जहाज़ को देखने के लिए जहाज़ पर आ सकेगा। जहाज़ पर इस दौरान महान् देशभक्तिपूर्ण युद्ध में विजय की 70 वीं जयन्ती को समर्पित फ़ोटो-प्रदर्शनी आयोजित की गई है।

इसके अलावा जहाज़ के गाइड जहाज़ पर आने वाले दर्शकों को अपने जहाज़ के निर्माण की कहानी और उसके इतिहास से दर्शकों को अवगत कराएँगे।

सोची से यह पालदार जहाज़ नवारस्सीस्क और केर्च के रास्ते सिवस्तापोल पहुँचेगा, जहाँ विजय-दिवस 9 मई का त्यौहार मनाया जाएगा। उसके बाद यह तुलोन, रैक्याविक, मूरमन्स्क, अखऱ्न्गेल्स्क और ग्दीनो की यात्रा करेगा।

विजय दिवस परेड में रूस के नवीनतम अस्त्र दिखाए जाएंगे

आज मास्को के लाल चौक पर होने जा रही विजय दिवस परेड में 15 हज़ार लोग भाग लेंगे।

द्वितीय विश्वयुद्ध के विख्यात टी-34 टैंकों के साथ-साथ नवीनतम मिसाइल समुच्चय आरएस-24, बख्तरबंद गाड़ियां और अतिसटीक तोपें भी इस परेड में शामिल होंगी। विजय दिवस की 70वीं वर्षगांठ समारोह की प्रबंध समिति के अध्यक्ष, राष्ट्रपति कार्यालय के प्रधान सेर्गेई इवानोव ने ‘रशिया टुडे’ से भेंटवार्ता में बताया है कि ये नवीनतम शस्त्रास्त्र पहली बार परेड में दिखाए जाएंगे।

इस परेड में हम मशहूर सू-30 और सू-35 विमान भी देखेंगे। ये नवीनतम अत्याधुनिक लड़ाकू विमान हैं, इवानोव ने इंगित किया है।

उन्होंने यह भी बताया कि परेड में पंद्रह हज़ार से अधिक लोग भाग लेंगे। परेड के दो भाग होंगे : आधुनिक और ऐतिहासिक। दूसरे भाग में सैनिक विश्व युद्ध के दिनों की सोवियत वर्दी पहनकर भाग लेंगे। वे लाल सेना की विभिन्न टुकडिय़ों और मोर्चों के झंडे लेकर चौक से गुजऱेंगे।  इसके साथ ही उन दिनों की सैनिक मशीनरी — टी-34 टैंक और फौजी ट्रक भी परेड में शामिल होंगे।

2015-05-09 को देशबन्धु में प्रकाशित लेख का संपादित रूप साभार

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