विलुप्त हो चुका है निष्पक्ष मीडिया

विलुप्त हो चुका है निष्पक्ष मीडिया : हंगरी में निष्पक्ष पत्रकारों का सामूहिक त्यागपत्र

Fair media is extinct: mass resignation of impartial journalists in Hungary

Freelance journalists are being killed all over the world or are being punished in jails.

पिछली शताब्दी के अंत से दुनियाभर में हत्यारी पूंजीवादी व्यवस्था का उदय होना शुरू हुआ. इस पूंजीवाद ने सबकुछ को हड़प लिया, लोकतंत्र और तानाशाही में अंतर मिटा दिया, सभी संसाधनों पर वर्चस्व कायम कर लिया, सरकारों का आना और जाना तय करने लगे और मीडिया हाउस तो बहुत बना लिए पर स्वतंत्र पत्रकारिता को विलुप्तीकरण के कगार पर पहुंचा दिया. अब हालत यहाँ तक पहुँच गई है कि दुनिया के सभी बड़े मीडिया हाउस केवल पूंजीपतियों के इशारे पर चल रहे हैं. जाहिर है, स्वतंत्र और निष्पक्ष मीडिया हाउस इतिहास के पन्नों में सिमटते जा रहे हैं. इतने के बाद भी बचे खुचे स्वतंत्र पत्रकार दुनियाभर में मारे जा रहे हैं या फिर जेलों में ठूंसे जा रहे हैं.

लेकिन पिछले सप्ताह हंगरी के एक निष्पक्ष मीडिया हाउस में जो कुछ हुआ, वह अभूतपूर्व था, पत्रकारों की ऐसी एकजुटता पहले शायद ही कहीं देखी गई होगी. वहां के एकलौते निष्पक्ष मीडिया हाउस के प्रबंधन ने जब एडिटर-इन-चीफ को नौकरी से बर्खास्त कर दिया तब पूरे एडिटोरियल बोर्ड, डेस्क एडिटर्स और रिपोर्टर्स ने इस्तीफ़ा दे दिया. यह इस्तीफ़ा केवल दिखावे के लिए नहीं था, बल्कि मीडिया हाउस में एडिटर और रिपोर्टर्स की कुल संख्या 90 थी और इनमें से 70 ने हमेशा के लिए उस मीडिया हाउस को छोड़ने का फैसला कर लिया.

हंगरी के सबसे बड़े मीडिया हाउस में से एक, इंडेक्स, के एडिटोरियल बोर्ड ने निष्पक्षता और प्रेस की स्वतंत्रता से कभी समझौता नहीं किया. यह तथ्य आश्चर्यजनक है क्योंकि आज के दौर में तो लोकतंत्र का नगाड़ा बजाने वाले तथाकथित देशों के मीडिया हाउस या तो सरकारी भोपू बन गए हैं या फिर बंद हो गए हैं. सभी सरकारी भोपू वाले मीडिया हाउस पूंजीपतियों के पैसे से फलफूल रहे हैं. फ्रीडम हाउस के अनुसार हंगरी की व्यवस्था तानाशाही और लोकतंत्र के बीच की है. जाहिर है, ऐसे में वहां निष्पक्ष मीडिया हाउस की चुनौतियां भी बड़ी होंगीं, पर इंडेक्स ने हरेक चुनौती के बाद भी अपना रास्ता नहीं बदला था.

हंगरी के अधिकतर मीडिया हाउस पिछले एक दशक के दौरान सरकार के नजदीकी पूंजीपतियों ने खरीद लिए, या फिर बंद हो गए. इस वर्ष के आरम्भ में ऐसे ही एक पूंजीपति ने इंडेक्स में निवेश किया और फिर इसके मालिकों पर निष्पक्षता को त्यागने का दबाव भी बढ़ने लगा. पिछले सप्ताह इसके एडिटर-इन-चीफ स्ज़बोल्क्स डल को प्रबंधन ने अपने पद से हटा दिया. इसके बाद एडिटोरियल स्टाफ दो दिनों तक स्ज़बोल्क्स डल को वापस बहाल करने की मांग करता रहा, पर जब प्रबंधन अपने रवैय्ये पर कायम रहा तब एडिटोरियल बोर्ड, डेस्क एडिटर और पत्रकारों में से अधिकाँश ने त्यागपत्र दे दिया.

पत्रकारों का आरोप है कि ऐसा राजनैतिक दबाव में किया गया है.

नौकरी छोड़ने से पहले एडिटोरियल बोर्ड ने इंडेक्स के वेबसाइट पर एक खुलापत्र भी प्रकाशित किया था, जिसमें कहा गया था कि हंगरी का यह एकलौता निष्पक्ष समाचार माध्यम था, पर अब यह ऐसा नहीं रहेगा क्योंकि यहाँ पर राजनैतिक दखलंदाजी शुरू हो चुकी है. वहां डिप्टी एडिटर रही वेरोनिका मंक ने भी त्यागपत्र दिया है, इनके अनुसार नेव्स्देश छोड़ते समय सभी पत्रकारों के आँखों में आंसू थे.

कोविड 19 के दौर में जब रोजगार की कमी है, ऐसे में इतने सारे पत्रकारों ने अपनी नौकरी छोड़ने का हौसला दिखाया. वेरोनिका मंक ने कहा कि अभी भविष्य के बारे में कोई योजना नहीं बनाई गई है, पर सभी पत्रकारों ने साथ रहकर कुछ नया करने का निश्चय किया है और जल्दी ही हम सब आगे की योजना का प्रारूप तैयार कर लेंगें. रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स के अनुसार हंगरी स्वतन्त्र पत्रकारिता के मामले में यूरोपियन यूनियन के देशों में अंतिम स्थान पर है.

The European Union is also troubled by the dictatorship of Hungary.

महेंद्र पाण्डेय Mahendra pandey
लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं।

 यूरोपियन यूनियन भी हंगरी की तानाशाही से परेशान है. हाल में ही यूरोपियन यूनियन की बैठक में कहा गया था कि केवल लोकतांत्रित मूल्यों की रक्षा करने वाले देशों को ही कोविड-19 से निपटने के लिए आर्थिक मदद दी जायेगी, और इसका विरोध हंगरी के कट्टर दक्षिणपंथी प्रधानमंत्री विक्टर ओर्बन ने किया था.

यूरोपियन कमीशन की वाईसप्रेसिडेंट वेरा जौरोवा ने भी हंगरी में और विशेष तौर पर इंडेक्स में स्वतंत्र पत्रकारिता की हत्या की निंदा (Condemnation of murder of independent journalism) की है. वेरोनिका मंक के अनुसार इंडेक्स के कर्मचारियों ने मार्च में राजधानी बुडापेस्ट में मीडिया हाउस में बढ़ते राजनैतिक दखल के विरुद्ध प्रदर्शन किया था, और पिछले महीने एडिटोरियल द्वारा इसके प्रति पाठकों को आगाह भी किया था.

वेरोनिका मंक यह भी कहतीं हैं कि एडिटोरियल टीम का प्रबंधन से अघोषित दो समझौता था, कोई बाहरी शक्ति उनके काम में दखल नहीं देगी और उनकी पूरी टीम को कभी छेड़ा नहीं जाएगा. अब प्रबंधन जब दूसरे समझौते को तोड़ चुका है, तब बेहतर यही है कि इस जगह को छोड़ दिया जाए.

महेंद्र पाण्डेय

 

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उपाध्याय अमलेन्दु:
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