14 देशों के 42आस्था संस्थाओं ( फेथ इंस्टिट्यूट) ने की जीवाश्म ईंधन से निवेश हटाने की घोषणा

Environment and climate change

Faith institutions from 14 countries announce divestment from fossil fuels

बेलआउट (सुधार) और रिकवरी (राहत) पैकेज से प्रदूषक को सशक्त नहीं करना चाहिए

अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया, बांग्लादेश, ब्राज़ील, कोलंबिया, एक्वदोर, इंडोनेशिया, आयरलैंड, इटली, केन्या, म्यांमार, स्पेन,यूनाइटेड किंगडम और यूनाइटेड स्टेट्स आदि 14 देशों के “ग्लोबल कैथोलिक क्लाइमेट मूवमेंट, ग्रीन फेथ , ग्रीन एंजलिकन चर्च, ऑपरेशन नूह और वर्ल्ड कौंसिल ऑफ़ चर्च” से जुड़े 42आस्था संस्थाओं( फेथ इंस्टिट्यूट) ने जीवाश्म ईंधन से निवेश हटाने की घोषणा की है उनका मानना है कि बेलआउट (खैरात) और रिकवरी (प्राप्ति) पैकेज से प्रदूषक को सशक्त नहीं करना चाहिए।

रोम, 18 मई 2020. कोरोनोवायरस महामारी के मद्देनजर वैश्विक अर्थव्यवस्था के सुधार के लिए राहत पैकेज दिए जा रहे हैं ऐसे में, आस्था संस्थानों का एक विविध समूह एक उचित आर्थिक सुधार की मांग कर रहा है।

आज, 14 देशों के 42 आस्था संस्थान जीवाश्म ईंधन से अपने निवेश हटाने की घोषणा की। यह विश्वास संस्थानों की जीवाश्म ईंधन से निवेश हटाने की अब तक की सबसे बड़ी संयुक्त घोषणा है। यह घोषणा अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया, बांग्लादेश, ब्राज़ील, कोलंबिया, एक्वदोर, इंडोनेशिया, आयरलैंड, इटली, केन्या, म्यांमार, स्पेन,यूनाइटेड किंगडम और यूनाइटेड स्टेट्स के संस्थानों से आती है।

जैसा कि दुनिया भर की सरकारें एक आर्थिक सुधार में पर्याप्त निवेश करती हैं, विश्वास समुदायों ने उनसे लंबी अवधि के लिए सोचने और एक ऐसी रिकवरी (राहत) पर ध्यान केंद्रित करने का आग्रह कर रही हैं, जो निम्न-कार्बन उत्सर्जन की ओर जाता हो और निष्पक्ष हो।

एक स्वतंत्र थिंक टैंक कार्बन ट्रैकर, जो एक ऊर्जा संक्रमण के वित्तीय प्रभाव का विश्लेषण करता है, के संस्थापक और कार्यकारी अध्यक्ष, मार्क कंपानाले कहते हैं,

“एक व्यापक आर्थिक सुधार का मतलब है कि दूर दृष्टि रखना, अभी बुनियादी ढांचे में निवेश करना जो आने वाले वर्षों के लिए समुदायों की सेवा करे। जीवाश्म ईंधन का इंसानी सेहत और तंदुरस्ती की हिफाज़त में कोई जगह नहीं है। ऐसे में एक बेहतर दुनिया के पुनर्गठन में जीवाश्म ईंधन का कोई हिस्सा नहीं होना चाहिए और सरकारों को इसका पालन करना चाहिए इस महीने की शुरुआत में, ऑपरेशन नूह की एक नई रिपोर्ट से पता चला कि पेरिस समझौते के लक्ष्यों का प्रमुख तेल कंपनियों में से कोई भी अनुपालन नहीं कर रही है।”

कैंटरबरी के पूर्व आर्चबिशप सेवानिवृत्त रेवरेंड डॉ. रोवन विलियम्स ने रिपोर्ट के जवाब में कहा,

“वर्तमान स्वास्थ्य संकट ने वैश्विक खतरे के सामने सुसंगत अंतर्राष्ट्रीय कार्रवाई की आवश्यकता को ऐसे प्रकाशित किया है जैसे पहले कभी नहीं किया। क्या हम जलवायु परिवर्तन के वैश्विक खतरे से सबक सीख सकते हैं और इसे लागू कर सकते हैं? ऐसा करने का अर्थ है जीवाश्म ईंधन पर हमारी घातक निर्भरता को कम करने के लिए व्यावहारिक और प्रभावी कदम उठाना।”

आज की बहु-आस्था की घोषणा मेथोडिस्ट, एंग्लिकन, कैथोलिक और बौद्ध संस्थानों से होती है।

समूह में ब्रिटेन के जेसुइट्स शामिल हैं, जिन्होंने फरवरी 2020 में जीवाश्म ईंधन से अपने £ 400 मिलियन ($ 517.5 मिलियन) इक्विटी पोर्टफोलियो का निवेश हटाया।

रिकवरी (आरोग्य प्राप्ति) बांग्लादेश दुनिया के सबसे बड़े शरणार्थी शिविर का घर है, जहाँ बंगाल की खाड़ी के पास आधे मिलियन से अधिक लोग रहते हैं। बंगाल की खाड़ी जलवायु परिवर्तन के साथ आने वाले विनाशकारी तूफानों के अधिक जोखिम के लिए बेहद संवेदनशील है। एक वायरल महामारी और एक भयावह तूफान दुनिया के सबसे कमजोर समुदायों में से एक को ख़त्म कर देगा, जो ब्रेकिंग-पॉइंट के पास अर्थव्यवस्थाओं के छोड़ चुके दोषों को सुधारने और ठीक करने की आवश्यकता को दर्शाता है।

इंडोनेशिया में सेमरंग के आर्चीडीओसीज के लिए जस्टिस, पीस एंड क्रिएटिविटी ऑफ क्रिएशन कमीशन के निदेशक फादर एंड्रा वैजयंता ने कहा,

“इस कोविड-19 महामारी का समय, न केवल प्रतिबिंबित करने बल्कि कार्य करने का सटीक समय है। हमें अपने मौत के पारिस्थितिक सर्पिल को रोकना होगा। हमें अपनी पारिस्थितिक आशा को पुनर्जीवित करना होगा, मानव जाति के बड़े पैमाने पर पश्चाताप में, अधिक दीर्घकालीन जीवनयापन के पथ को चुन कर।”

विश्वास समुदायों ने लंबे समय से वैश्विक स्टार पर निवेश हटाने के आंदोलन का नेतृत्व किया है, और 1,400 से अधिक के वैश्विक कुल में 350 से अधिक प्रतिबद्धताओं के साथ, सबसे बड़ी संख्या में प्रतिबद्धताओं का योगदान दिया है, और 1,400 से अधिक के वैश्विक कुल में 350 से अधिक प्रतिबद्धताओं के साथ, सबसे बड़ी संख्या में प्रतिबद्धताओं का योगदान दिया है। विश्वास संस्थानों द्वारा आज की कार्रवाई दुनिया भर की सरकारों पर उन नीतियों को लागू करने के लिए दबाव डालती है जो एक व्यापक और लचीला रिकवरी (आरोग्य प्राप्ति) का कारण बनेंगी।

कैथोलिक भागीदारी विशेष रूप से प्रतिध्वनित होती है क्योंकि आज लॉडैटो सी’ सप्ताह की शुरुआत है, जो कि लाउडैटो सी’ की पांचवीं वर्षगांठ का वैश्विक स्मरणोत्सव है, जलवायु परिवर्तन और पारिस्थितिकी पर पोप फ्रांसिस का विश्वकोश।

पोप फ्रांसिस द्वारा लॉडाटो सी’ सप्ताह में भाग लेने के लिए आमंत्रित किए जाने के बाद, कैथोलिक लोगों ने एक साथ अधिक न्यायपूर्ण और टिकाऊ भविष्य के निर्माण के लिए इस परियोजना को अपनाया है। पिछले महीने में, 21 कैथोलिक संगठन, प्रबंधन के तहत संपत्ति में $40 बिलियन के साथ, उन कंपनियों में निवेश करने के लिए प्रतिबद्ध हुए जो कैथोलिक प्रभाव निवेश प्रतिज्ञा पर हस्ताक्षर करके अपने मूल्यों के साथ संरेखित करती हैं।

जीवाश्म ईंधन से निवेश हटाने वाले 42 संस्थानों की एक पूरी सूची और नेताओं के बयान यहां पाये जा सकते हैं।

ग्लोबल कैथोलिक क्लाइमेट मूवमेंट के कार्यकारी निदेशक टॉमस इनसुआ ने कहा :

जीवाश्म ईंधन में निवेश किया गया प्रत्येक डॉलर पीड़ा के लिए एक वोट है। ये संस्थाएँ अधिक न्यायपूर्ण और टिकाऊ भविष्य की दिशा में प्रकाश डालने के लिए भविष्यवाणियां और प्रेरित कार्रवाई कर रहें हैं क्योंकि अब, पहले से कहीं ज्यादा, हमें अपने समुदायों की रक्षा करने और एक साथ एक ठीक रिकवरी (आरोग्य प्राप्ति) बनाने की जरूरत है। ”

जेम्स बुकानन, ऑपरेशन नोह में उज्ज्वल अब अभियान प्रबंधक, ने कहा :

“हम अब जो निर्णय लेते हैं वह हजारों वर्षों तक मानवता के भविष्य को प्रभावित करेंगे। ये विश्वास संस्थान जलवायु संकट के जवाब में मजबूत नेतृत्व दिखा रहे हैं, और हम दुनिया भर की सरकारों से आग्रह करते हैं कि वे जीवाश्म ईंधन के समर्थन को समाप्त करने और भविष्य की स्वच्छ प्रौद्योगिकियों में निवेश करने में इस अगुवाई का पालन करें।”

प्रो. डॉ. इसाबेल अपावो फिरी, चर्चों की विश्व परिषद, उप महासचिव, ने कहा :

“हम जलवायु परिवर्तन और संपूर्ण सृष्टि पर इसके प्रतिकूल प्रभावों के संबंध में दुनिया भर के ईसाइयों की तत्काल चिंताओं को दोहराते हैं। जीवाश्म ईंधन से निवेश हटाने की नैतिक अनिवार्यता और आर्थिक, सामाजिक, और पारिस्थितिक भलाई और पूरी सृष्टि के लिए स्थिरता साकार करने के लिए कम कार्बन वाले मार्ग में निवेश करना पहले से कहीं ज्यादा जरूरी है।”

रेवरेंड राशेल मैश, ग्रीन एंग्लिकन कि समन्वयक (दक्षिणी अफ्रीका के एंग्लिकन चर्च) ने कहा :

“COVID-19 संकट हमें दिखाता है कि हमारा वर्तमान जीवन जीने का तरीका अस्थिर है, हम बीमार हैं क्योंकि पृथ्वी बीमार है। हम वापस सामान्यता कि ओर नहीं जा सकते हैं, हमें नए तरीके से सतत जीवन की तरफ बढ़ना होगा। जैसा कि हम एक पोस्ट कवीड-19 युग में आगे बढ़ते हैं, हमें ऊर्जा के स्रोतों से दूर जाना चाहिए जो जलवायु परिवर्तन और वायु प्रदूषण में योगदान करना चाहिए।”

350.org के वैश्विक वित्त अभियान प्रबंधक, योसी केडन ने कहा :

“एक बार फिर, विश्वास समूहों ने आगे बढ़ना जारी रखा और बढ़ने का रास्ता दिखते हुए दुनिया के बाकी हिस्सों को स्पष्ट रूप से संकेत दिया कि भविष्य के किसी भी निवेश या प्रोत्साहन राशि को जीवाश्म ईंधन को छोड़ना होगा और दीर्घकालिक संरचनात्मक उत्सर्जन में कमी करनी चाहिए। आर्थिक संकट के समाधान जलवायु संकट के समाधान हैं। आर्थिक मंदी निम्न और शून्य कार्बन की ओर आवश्यक संक्रमण में तेजी लाने के लिए एक अवसर होना चाहिए और निवेशकों सहित किसी भी वित्तीय हस्तक्षेप को लोगों और उनकी आजीविका को सामने और केंद्र में रखने की जरूरत है। ”

पाठकों सेअपील - “हस्तक्षेप” जन सुनवाई का मंच है जहां मेहनतकश अवाम की हर चीख दर्ज करनी है। जहां मानवाधिकार और नागरिक अधिकार के मुद्दे हैं तो प्रकृति, पर्यावरण, मौसम और जलवायु के मुद्दे भी हैं। ये यात्रा जारी रहे इसके लिए मदद करें। 9312873760 नंबर पर पेटीएम करें या नीचे दिए लिंक पर क्लिक करके ऑनलाइन भुगतान करें