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संयुक्त किसान मोर्चा के ऐलान से डरी भाजपा

नंदीग्राम में आज किसानों की महापंचायत

नई दिल्ली, 13 मार्च 2021. संयुक्त किसान मोर्चा ने बंगाल में भाजपा का खेल बिगाड़ने के लिए बिगुल फूंक दिया है, बंगाल विधानसभा चुनाव (Bengal Assembly Elections) में लिए किसान संगठनों के ऐलान ने भाजपा को बेचैन कर दिया है। आज बंगाल के नंदीग्राम में किसानों की महापंचायत होने वाली है, जिसमें हिस्सा लेने के लिए राकेश टिकैत समेत कई नेता नंदीग्राम पहुंच चुके हैं।

इसके अलावा संयुक्त किसान मोर्चा बंगाल में कई और महापंचायतें करने वाले हैं, जिसे लेकर उन्होंने अपनी तैयारी पूरी कर ली है.

तो क्या है पूरी खबर और क्यों बिगड़ने वाला है बंगाल में भाजपा का खेल ?

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भाजपा की परेशानी (BJP’s trouble in West Bengal assembly elections) बढ़ने वाली है, तीन नए कृषि कानूनों को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे किसानों का संगठन बंगाल पहुंच चुका है।

संयुक्त किसान मोर्चा के 294 सदस्यीय दल आज से बंगाल में मोदी सरकार के कृषि कानूनों को लेकर महापंचायत का बिगुल फूंकने वाला है, इसकी शुरुआत आज से नंदीग्राम विधानसभा सीट से होने जा रही है।

किसान बाहुल्य इलाका है नंदीग्राम

बता दें नंदीग्राम पूर्व मेदिनीपुर जिले में आता है। पूर्व मेदिनीपुर जिले के आसपास नादिया, पश्चिमी मेदिनीपुर, बांकुड़ा, हुगली जिलों में सबसे ज्यादा आबादी किसानों की है. इन जिलों में किसानों की आबादी लगभग 80 फीसदी से ज्यादा है। निश्चित तौर पर आज नंदीग्राम में होने वाली किसान महापंचायत का असर इन जिलों में भी पड़ेगा।

भाजपा को नुकसान ज्यादा

इसका सबसे ज्यादा नुकसान भाजपा को हो सकता है. भाजपा बंगाल में शहरों के मुकाबले ग्रामीण इलाकों में ज्यादा मजबूत नजर आ रही है। ऐसे में नंदीग्राम में संयुक्त किसान मोर्चा की होने वाली महापंचायत भाजपा के मंसूबों पर पानी फेर सकती है।

नंदीग्राम में होने वाली महापंचायत को लेकर भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने पहले ही ट्वीट कर घोषणा कर दी है, जिसे लेकर अब बंगाल में भाजपा की परेशानी बढ़ गई है।

भाजपा को इन जिलों में अब हार का डर सताने लगा है। भाजपा के कद्दावर नेता इन जिलों में ज्यादा रैलियां कर रहे हैं ताकि मतदाताओं का साधा जा सके।

बंगाल विधानसभा चुनाव में सियासत का केंद्र बन चुके नंदीग्राम से जहां एक तरफ बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी चुनावी मैदान में हैं तो दूसरी तरफ कभी उनके सबसे करीबी नेता माने जाने वाले शुभेंदु अधिकारी हैं, जो ममता बनर्जी के खिलाफ चुनावी ताल ठोक रहे हैं।

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