अपने बुने जाल में फंस गई मोदी सरकार, कृषि विरोधी अध्यादेशों के खिलाफ किसानों का देशव्यापी प्रतिरोध आंदोलन 25 को

Kisan Sabha

Farmers nationwide resistance movement against 25 anti-agricultural ordinances on 25

रायपुर, 18 सितंबर 2020. कृषि संबंधी तीन अध्यादेशों को इस संसद सत्र में कानून का रूप दिया जा रहा है। अखिल भारतीय किसान संघर्ष समिति ने इन अध्यादेशों को कृषि विरोधी बताते हुए 25 सितम्बर को देशव्यापी प्रतिरोध आंदोलन का आह्वान किया है।

यह जानकारी छत्तीसगढ़ किसान सभा के अध्यक्ष संजय पराते और महासचिव ऋषि गुप्ता ने आज यहां दी।

उन्होंने कहा कि हमारे देश की कृषि व्यवस्था के तीन महवपूर्ण पहलू है : उत्पादन, व्यापार और वितरण। ये अध्यादेश कॉरपोरेटों के मुनाफों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य और सार्वजनिक वितरण प्रणाली की वर्तमान व्यवस्था को ध्वस्त करते है।

उन्होंने कहा कि उत्पादन के क्षेत्र में ठेका कृषि लाने से किसान अपनी ही जमीन पर गुलाम हो जाएगा और देश की आवश्यकता के अनुसार और अपनी मर्जी से फसल लगाने के अधिकार से वंचित हो जाएगा। इसी प्रकार कृषि व्यापार के क्षेत्र में मंडी कानून के निष्प्रभावी होने और निजी मंडियों के खुलने से वह समर्थन मूल्य से वंचित हो जाएगा। इस बात का भी इन अध्यादेशों में प्रावधान किया जा रहा है कि कॉर्पोरेट कंपनियां जिस मूल्य को देने का किसान को वादा कर रही है, बाजार में भाव गिरने पर वह उस मूल्य को देने या किसान की फसल खरीदने को बाध्य नहीं होगी — यानी जोखिम किसान का और मुनाफा कार्पोरेटों का!

किसान सभा नेताओं ने आरोप लगाया कि इन अध्यादेशों के जरिये सरकार कृषि के क्षेत्र में अपनी जिम्मेदारियों से छुटकारा पाना चाहती है। वह धीरे-धीरे किसान का अनाज खरीदना बंद कर देगी और सार्वजनिक वितरण प्रणाली ध्वस्त हो जाएगी।

आवश्यक वस्तु अधिनियम के दायरे से अनाज को बाहर करने से जमाखोरी, कालाबाजारी और मुनाफाखोरी बढ़ेगी। कुल मिलाकर, ये तीनों अध्यादेश कार्पोरेटों के लिए एक पैकेज बनाते हैं और यह किसानों, उपभोक्ताओं और आम नागरिकों के हितों के खिलाफ जाता है। इससे हमारी खाद्यान्न आत्मनिर्भरता खत्म होती है और खेती-किसानी के घाटे का सौदा बनने से किसानों का जमीन से अलगाव बढ़ता है। इससे किसान आत्महत्याओं में और ज्यादा वृद्धि होगी।

किसान संघर्ष समन्वय समिति से जुड़े संगठनों ने कहा है कि भले ही सरकार अपने पाशविक बहुमत की ताकत से इन अध्यादेशों को कानूनों में बदल दें, लेकिन देश की जनता इस पर अमल नहीं होने देगी और अब संसद के अंदर लड़ी जाने वाली लड़ाई सड़कों पर लड़ी जाएगी। पूरे देश के किसान और किसान संगठन मिलकर 25 सितम्बर को प्रतिरोध आंदोलन करेंगे। इस आंदोलन के अंर्तगत रेल जाम, सड़क जाम, अध्यादेशों का दहन जैसे कार्यक्रम होंगे। पराते ने कहा कि देश की जनता से जिस प्रकार भूमि अधिग्रहण अध्यादेश को कानून बनने से रोका था, उसी प्रकार इन खेती-किसानी बर्बाद करने वाले कदमों को वापस लेने के लिए मोदी सरकार को मजबूर किया जाएगा।

 

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