किसानों का आंदोलन : न्यायमूर्ति काटजू ने सरकार को सुझाया नाक बचाने का बीच का रास्ता

अगर सरकार न्यायमूर्ति काटजू के सुझाव को मान लेती है, तो शायद तब वह अपना सम्मान बचा सकती है। साथ ही किसान आंदोलन के दौरान किसी हिंसा से भी बचा जा सकता है।

Farmers protest: Justice Katju suggests a face-saving solution to Govt.

नई दिल्ली, 01 दिसंबर 2020. किसान संगठनों और सरकार के बीच मंगलवार को विज्ञान भवन में 3 घंटे से अधिक तक बातचीत हुई। बातचीत समाप्त होने के बाद बाहर आए किसान नेताओं ने आंदोलन जारी रखने की बात कही है। किसान नेताओं के मुताबिक फिलहाल बातचीत बेनतीजा रही है। किसान नेताओं का कहना है कि बातचीत गुरुवार को भी होगी। इस बीच सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त जज जस्टिस मार्कंडेय काटजू ने किसान आंदोलन पर एक बीच का रास्ता सुझाया है। अगर सरकार न्यायमूर्ति काटजू के सुझाव को मान लेती है, तो शायद तब वह अपना सम्मान बचा सकती है। साथ ही किसान आंदोलन के दौरान किसी हिंसा से भी बचा जा सकता है।

जस्टिस काटजू ने अपने सत्यापित फेसबुक पेज पर एक पोस्ट में लिखा कि मीडिया के माध्यम से किसानों और सरकार के बीच आज की बैठक बेनतीजा थी, और अगली बैठक 3 दिसंबर के लिए निर्धारित है।

उन्होंने सुझाव दिया कि अगर दोनो पक्ष यानी सरकार और किसान सहमत हों तो फिलवक्त बीच का रास्ता निकाला जा सकता है। उनके मुताबिक किसान कानूनों को वापस लेने की आवश्यकता नहीं है, लेकिन उन्हें तब तक लागू नहीं किया जाएगा जब तक कि भविष्य में दोनों पक्षों के बीच एक समझौता नहीं हो जाता।

जस्टिस काटजू के मुताबिक यह सरकार के लिए फेस सेविंग डिवाइस होगा, और आंशिक रूप से किसानों की मांग को पूरा करेगा। इससे हिंसा से भी बचा जा सकेगा।

अंग्रेजी में उनकी पूरी पोस्ट निम्नवत् है –

“A via media

Today’s meeting between the farmers and the govt was inconclusive, and the next meeting is fixed for 3rd December.

I think a via media solution in this next meeting can be if both sides agree that though the farmers laws need not be withdrawn, they will not be enforced till an agreement is reached after negotiations between the parties in the future.

This will be a face saving device for the govt, and will serve the farmers’ demand partially. It will also avoid violence.”

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उपाध्याय अमलेन्दु:
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