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भाजपा के राज में हिंदुत्व खतरे में क्यों है?

भाजपा के राज में भाजपा, आरएसएस और बाकी दक्षिणपंथी संगठन डरे हुए नजर क्यों आते हैं?

धर्म के ठेकेदारों का डर | Fear of the contractors of religion

देशबन्धु में संपादकीय आज | Editorial in Deshbandhu today

पिछले सात सालों से देश में भाजपा का राज है। और भाजपा ने सत्ता का ये सफर धर्म की सीढ़ी पर चढ़कर ही तय किया। दावा तो यही था कि भाजपा के आने से हिंदुत्व की रक्षा (defense of hindutva) होगी, लेकिन आलम ये है कि हिंदू धर्म को लेकर भाजपा, आरएसएस और बाकी दक्षिणपंथी संगठन डरे हुए नजर आते हैं। इन लोगों को ये भरोसा ही नहीं है कि मोदीजी के राज में हिंदू धर्म सुरक्षित है, तभी तो जब-तब धर्म की रक्षा के नाम पर बवाल खड़ा होता रहता है। ताजा मामला प्रकाश झा के साथ हुई बदसलूकी का है।

वेब सीरीज आश्रम-3 की शूटिंग सेट पर बजरंग दल का उत्पात | Bajrang Dal’s fury on the shooting set of web series Ashram-3

प्रकाश झा मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में अपनी वेब सीरीज आश्रम-3 की शूटिंग के लिए पहुंचे थे, जहां रविवार को बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने उनके सेट पर खूब हंगामा मचाया। पुराने जेल परिसर में जहां शूटिंग चल रही थी, वहां बड़ी संख्या में बजरंग दल के कार्यकर्ता नारेबाज़ी करते हुए पहुंच गये, और तोड़-फोड़ शुरू कर दी। प्रकाश झा पर स्याही फेंकी गई और उस जगह मौजूद वैनिटी वैन, ट्रक और दूसरे वाहनों को नुक़सान पहुंचाया गया। शूटिंग में मौजूद स्टाफ़ को दौड़ा-दौड़ा कर मारा गया।

भाजपा सांसद सनी देओल के भाई बॉबी देओल भी मौजूद थे सेट पर

इस हंगामे में क़रीब छह कर्मचारियों को चोट भी आई है। इस घटना के वक़्त वेब सिरीज़ के अभिनेता बॉबी देओल भी मौजूद थे। याद रहे कि बॉबी देओल के पिता धर्मेन्द्र भाजपा के पूर्व सांसद रह चुके हैं और बड़े भाई सनी देओल इस वक्त भाजपा सांसद हैं।

प्रकाश झा के साथ इस वक़्त जैसा बर्ताव हुआ है, 2017 में यही बदसलूकी संजय लीला भंसाली के साथ फिल्म पद्मावती की शूटिंग के दौरान हुई थी। उस वक़्त पूरे देश में करणी सेना ने खूब हंगामा मचाया था। फिल्म को रिलीज करने से पहले वो बदलाव करने ही पड़े, जो करणी सेना को ठीक लग रहे थे। तब मोदी सरकार को आए तीन साल ही हुए थे और कहीं न कहीं ये उम्मीद बंधी हुई थी कि अभी हिंदुत्व और संस्कृति के नाम पर जो बिना बात का हंगामा खड़ा किया जा रहा है, वो दाल-रोटी के सवाल के आगे शांत हो जाएगा। लोग कब तक रोजगार के सवाल के आगे धार्मिक कट्टरता को बढ़ावा देते रहेंगे। लेकिन सात साल से अधिक हो गए हैं और धर्म के नाम पर बवाल खड़े करने की घटनाएं खत्म ही नहीं हो रही हैं।

ये कौन सा धर्म है जो लोगों को डराने की सीख दे रहा है? इस सवाल का एक ही जवाब हो सकता है, अपनी नाकामियों से लोगों का ध्यान भटकाने के लिए धर्म का डर खड़ा किया जा रहा है।

मध्यप्रदेश में शिवराज सिंह चौहान ने कांग्रेस से फिर से सत्ता तो हासिल कर ली, लेकिन जनता की तकलीफों का जवाब उनकी सरकार नहीं दे पाई। कोरोना में मध्यप्रदेश में भारी तबाही मची, किसानों की हालत दिन ब दिन बिगड़ती जा रही है। कुछ महीनों पहले बाढ़ के कारण वहां जबरदस्त नुकसान हुआ था। और ऐसी हर तकलीफ के वक़्त सरकार की लापरवाही, मंत्रियों का अक्खड़पन लोगों का दर्द बढ़ाता रहा। जनता अपनी समस्याओं पर बात न कर सके, इसलिए इस तरह के हंगामे खड़े किए जाते हैं। और इस बार तो बात अब नए किस्म के सेंसर तक जा पहुंची है।

प्रज्ञा ठाकुर की चेतावनी (Pragya Thakur’s warning)

भोपाल की सांसद प्रज्ञा ठाकुर ने चेतावनी दी है कि भारत में रहकर सनातन धर्म के साथ खिलवाड़ नहीं चलेगा। उन्होंने कहा कि साधु-संत फिल्में नहीं देखते, लेकिन अब इसके लिए अलग से विभाग बनाया जाएगा। अब कोई भी फिल्म बनने से पहले यह विभाग उसकी स्क्रिप्ट पढ़ेगा, उसके बाद ही फिल्म बनाने की अनुमति दी जाएगी। यानी अब सेंसर बोर्ड का काम भी धर्म के स्वघोषित रक्षकों के मुताबिक चलेगा।

अखिल भारतीय संत समिति ने प्रज्ञा ठाकुर को एक ज्ञापन सौंपा था, जिसमें कहा गया है कि प्रकाश झा द्वारा निर्मित आश्रम-3 सनातन धर्म के विरुद्ध है, इस फ़िल्म के माध्यम से संत समाज को बदनाम किया जा रहा है।

ये नजर आ रहा है कि आश्रमों में कई बार धर्म के नाम पर जो गलत काम किए जाते हैं, उनका जिक्र कहीं हो, ये हिंदुत्व के ठेकेदारों को मंजूर नहीं है।

इन लोगों से पूछा जाना चाहिए कि आसाराम, गुरमीत राम रहीम सिंह और इन जैसे कई ढोंगी साधुओं के बारे में इनके क्या विचार हैं, जिन्होंने धर्म के नाम पर न केवल अकूत संपत्ति बनाई, बल्कि वो सारे काम किए, जिन्हें धर्म की भाषा में पाप कहा जाता है।

और आश्रम वेबसीरीज पर दिखाई जाने वाली कहानी पर कोई आपत्ति है तो उसकी शिकायत करने के कानूनी प्रावधान उपलब्ध हैं, तोड़फोड़ का हक धर्म के ठेकेदारों को किसने दिया। वैसे ये सवाल शिवराज सरकार को करना चाहिए। लेकिन फिलहाल सरकार में गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कहा है कि हमेशा हमारी भावनाओं को आहत करने वाले दृश्य ही क्यों फ़िल्माते हो। अगर हिम्मत है तो दूसरे धर्म की भावनाओं को आहत करने वाले दृश्य फ़िल्मा कर दिखाओ।’

नरोत्तम मिश्रा को आश्रम नाम रखने पर भी आपत्ति है। गृहमंत्री होने के नाते उन्हें राज्य में कानून व्यवस्था दुरुस्त रखने पर बात करना चाहिए, मगर वो प्रकाश झा पर ही सवाल उठा रहे हैं कि प्रकाश झा को भी विचार करना चाहिए कि आखिर ऐसा क्यों हुआ।

वैसे ये प्रकाश झा के सोचने की बात नहीं है, भाजपा सरकार के सोचने की बात है कि आखिर उसके शासन में धर्म की रक्षा के नाम पर कानून हाथ में लेने की हिम्मत कुछ लोगों को कैसे आ मिल गई है और कैसे सरकार ऐसा माहौल बनाए जहां स्वतंत्रता, समानता, अभिव्यक्ति का अधिकार इन सब संवैधानिक अधिकारों की रक्षा हो सके।

आज का देशबन्धु का संपादकीय (Today’s Deshbandhu editorial) का संपादित रूप साभार.

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