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उप्र का बजट पूरी तरह निराशाजनक, किसानों के साथ धोखा और नौजवानों के विश्वास के साथ घात – अजय कुमार लल्लू

योगी सरकार द्वारा प्रस्तुत बजट नया जुमला, कृषक संवर्धित आयोग की चार वर्षों में एक भी बैठक नहीं, कैसे बढ़ेगी किसानों की आय – अजय कुमार लल्लू

बिजली के दामों में भारी वृद्धि, किसानों के लिए छूट का कोई प्राविधान नहीं – अजय कुमार लल्लू

सिंचाई हेतु नलकूपों के लिए सब्सिडी का प्रावधान समाप्त किया सरकार ने – अजय कुमार लल्लू

बजट में किसान, नौजवान, गरीब, छात्र, महिला और बुनकर हितों की अनदेखी – अजय कुमार लल्लू
उप्र की जनता बजट से खुद को ठगा महसूस कर रही है- अजय कुमार लल्लू

लखनऊ 22 फरवरी 2021. उप्र कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू ने आज योगी सरकार द्वारा पेश किये बजट पर प्रतिक्रिया (Feedback on budget) व्यक्त करते हुए कहा कि आज फिर नये जुमलों के साथ उप्र के बजट को पेश किया जो पूरी तरह निराशजनक, किसानों के साथ धोखा, नौजवानों के विश्वास के साथ विश्वासघात और गरीब, शोषित, वंचितों के लिए कोई योजना लाने का काम नहीं किया विकास से यह बजट कोसों दूर दिखा।

सरकार ने अपने बजट में कहा कि हम किसानों की आय 2022 तक दो गुना करेंगे गन्ने का हमने रिकार्ड तोड भुगतान किया है पिछले साल तक गन्ने के भुगतान का बकाया 8 हजार करोड़ से अधिक था और इस साल यह 10 हजार करोड़ के पार पहुंच गया। पिछले साल जब 2017 में सरकार आयी थी इन्होने कृषक संवंर्धित आयोग का गठन किया और आयोग में खुद मुख्यमंत्री अध्यक्ष और मुख्य सचिव से लेकर प्रमुख सचिव सदस्य बने। 2017 से लेकर आज तक एक भी बैठकें नहीं हुईं। किसानों के संवृद्धि के लिए जो आयोग बना ऐसी कोई भी योजना नहीं बनाई गयी जो किसानेां का भुगतान कर सके अब इस साल एक नया जुमला आत्मनिर्भर कृषि समन्वित विकास योजना लाई गई है। पिछले वर्ष जो आयोग बनाया उसकी एक भी बैठक नहीं कर पाये और अब जो आयोग बनाया है यह भी पूरी तरह दिखावा, छलावा और ब्रान्डिंग के अलावा कुछ भी नहीं है।

सरकार ने कहा कि गेहूं, धान और मक्का की रिकार्ड तोड़ खरीद की है और आगे भी खरीद कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि कहीं भी धान की खरीद नहीं हो रही है किस खरीद की बात सरकार कर रही है रिकार्ड के नाम पर केवल आंकड़ों की बाजीगरी और डाटा को पेश करने का पीआर कंपनी द्वारा प्रायोजित डाटा को उप्र की जनता के सामने रखने का काम कर रही है।

हमें उम्मीद थी कि यह सरकार किसानों के लिए कोई योजना लेकर आयेगी, किसानों के लिए विशेष पैकेज लाने की व्यवस्था करेगी। ओलावृष्टि, अतिवृष्टि, बेमौसम वर्षा, से जो किसानों की फसल बर्बाद हुई है उसके लिए एक रूपया मुआवजे के नाम पर इस सरकार ने नहीं दिया सिर्फ दिखावा किया। बिजली के बढ़े हुए दाम को भी सरकार ने किसानों के लिए निजी नलकूप में कोई छूट का प्राविधान नहीं किया। उर्वरक, खाद उपलब्ध कराने की बात की, कहीं भी पिछले समय में यह बात साफ है कि किसान यदि खाद के लिए कहीं गया तो उसे लाठी के सिवा खाद नहीं मिली। खाद और डीजल का दाम मंहगा हो गया लेकिन इस सरकार ने एक रूपया फसल में बढ़ाने का काम नहीं किया।

युवा रोजगार के नाम पर इस सरकार ने एक शेर के माध्यम से बात कहीं, अंतिम शब्द था-हम जो चाहेंगे वह होने दो, यह सरकार रोजगार को तो चाहती ही नहीं 14 लाख प्रतिवर्ष का वादा था 56 लाख के सापेक्ष मुख्यमंत्री ने अपने टिव्टर के माध्यम से बताया कि 4 लाख दे पाये हैं। यूपीएसी की भर्ती 24 में 22 भर्ती अटकी पड़ी है रोज आन्दोलकारी सड़कों पर हैं, चाहे वह शिक्षक भर्ती हो, पुलिस भर्ती हो, बीडीओ, सिपाही, दरोगा भर्ती हो अधर में लटकी पड़ी है भर्ती के नाम पर सरकार ने नौजवानों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने का काम किया है।

बुनकरों को, कारपेट उद्योग, चमड़ा उद्योग, पीतल उद्योग, चूड़ी उद्योग, लकड़ी उद्योग तथा 75 हजार बंद (एमएसएमई), लघु उद्योग, कुटीर उद्योग जो केवल गाजियाबाद और नोएडा में था एक भी प्रोत्साहन या पैकेज इन तमाम उद्योगों के लिए कोई भी बजट में किसी तरह के फण्ड की व्यवस्था नहीं थी और जो किया भी है वह जरूरत के सापेक्ष बहुत ही कम राशि है। पूर्वांचल, बुन्देलखण्ड और मध्यांचल में उद्योग लगाने की बात जो की है इन्वेस्टर्स समिट हुआ, डिफेन्स एक्सपो हुआ, एक भी अब तक कोई भी उद्योग चाहे वह बुन्देलखण्ड, पूर्वांचल हो मध्यांचल हो एक भी नहीं लगा पायी।

सरकार ने मत्स्य को बढ़ाने की बात की है जो हमारे निषाद भाई है कांग्रेस की सरकार में उन्हें नदियों पर पट्टे का अधिकार था, उनकी जमीन का अधिकार था, बालू पर अधिकार था इस सरकार ने उनके बालू का अधिकार और उनके पट्टे का अधिकार छीन लिया उनकी जमीन से जो उनकी जीविका उपार्जक थी छीन ली। यह स्पष्ट दिखा कि यह सरकार निषाद परिवार के लोगों के लिए पूरी तरह उदासीन है और उसके लिए कोई योजना नहीं है।

श्रमिकों के लिए सरकार ने कहा कि 30 लाख लोगों को एक-एक हजार रूपये भरण पोषण दिया और एक करोड़ रोजगार श्रमिकों को दिया। मुख्यमंत्री जी, ब्रांडिंग, होर्डिंग, पोस्टर और पीआर से उत्तर प्रदेश नहीं चल सकता। उप्र को इस सरकार ने पूरी तरह छलने, ठगने और धोखा देने का काम किया है।

सुपोषण की व्यवस्था की बात इस सरकार ने की है। देश में सबसे ज्यादा अगर कुपोषण का शिकार कोई है तो उप्र है और सुपोषण की योजना केवल कागजी है जमीनी हकीकत से यह सरकार कोसों दूर दिखी।

गौ वंश के लिए जो योजना बनाने की बात की। सरकार ने कहा कि 74 हजार गौ वंश लोगों को वितरित किये। जितने भी अवारा पशु हैं उनके लिए योजना बनाकर जगह-जगह गांवों में उसके रखरखाव और चारे एवं अन्य व्यवस्था की है। स्पष्ट है कि किस तरह बुन्देलखण्ड में अन्ना जानवर जो गाय हमारी माता है जिसे हम मां की संज्ञा देते हैं वह कैसे तड़प तड़प कर मरीं। जो मैनपुरी, ललितपुर, आगरा आदि जनपदों में वीडियो वायरल हुए थे, आज तक इस सरकार ने आवारा पशुओं के लिए कुछ नहीं किया। अलग-अलग टीन शेड बनाकर गांवों में योजना बनाने की बात की है किन्तु बजट में जो योजना बनाई है जितने रूपये लगने चाहिए उसके मुकाबले वह ऊँट के मुंह में जीरे के समान है।

पूरी तरह यह सरकार किसान विरोधी, नौजवान, गरीब विरोधी, पिछड़ा विरोधी है और पूरी तरह इस सरकार में केवल पीआर के भरोसे आंकड़ें और जितने ब्रान्डिंग प्रस्तुत किये जा सकते थे, वही किया गया। उप्र की जनता स्वयं को इस बजट से पूरी तरह ठगा और छला समझ रही है।

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