Home » Latest » मध्य प्रदेश में खाद की किल्लत : 11 अक्टूबर को प्रदेश भर में होगा किसान आंदोलन

मध्य प्रदेश में खाद की किल्लत : 11 अक्टूबर को प्रदेश भर में होगा किसान आंदोलन

किसानों का आह्वान

Fertilizer shortage in Madhya Pradesh: On October 11, there will be a farmers’ movement across the state

भोपाल, 8 अक्तूबर 2021. मध्य प्रदेश में खाद की किल्लत चरम पर है। केंद्र व राज्य सरकार की अदूरदर्शिता के चलते लगभग प्रतिवर्ष रबी की फसल के सीजन में डीएपी खाद की कमी व किल्लत हमेशा बनी रहती है। हालत यह है कि किसान सुबह से ही मंडियों में और सोसाइटीज़ पर लाइन में लग जाते हैं, शाम तक कुछ किसानों को परमिट मिल पाते हैं, कुछ दूसरे दिन सुबह 5:00 बजे से फिर लाइन में लगते हैं। किसान परेशान है। बदहाल है। दाने दाने खाद के लिए मोहताज है। सरकार कानो में तेल डाले बैठी है।

रबी की फसल के सीजन में किसानों को डीएपी खाद की जरूरत होती है। लेकिन सरकार द्वारा फ़र्टिलाइज़र कारखानों से जरूरत से आधा भी खाद खरीद करके नहीं रखा गया है। जिसके चलते किसानों को यह परेशानी उठानी पड़ रही है। एक ओर खाद की कमी दूसरी ओर किसानों की लूट भी जारी है। सोसाइटीज पर डीएपी खाद की रेट ₹1200 प्रति बैग है। लेकिन उपलब्ध नहीं होने से किसानों को बाजार से ₹1500 में लेना पड़ रहा है और ऊपर से उसमें भी नकली खाद की भरमार है। सोसाइटीज पर एक आधार कार्ड पर मात्र दो बैग डीएपी खाद दिया जा रहा है। जबकि एक हैक्टेयर गेहूं की फसल के लिए लगभग पांच बैग डीएपी और सरसों चना में लगभग 2 बैग डीएपी खाद की जरूरत होती है। इसकी वजह यह है कि सरकार सोसाइटीज को पर्याप्त सप्लाई नहीं कर पा रही है। केंद्र व राज्य सरकार दोनों ही इसके लिए उत्तरदायी हैं। किसानों की इस लूट के लिए भाजपा सरकार, कॉरपोरेट कंपनियों तथा बड़े व्यापारी और राजनेताओं का गठबंधन उत्तरदायी है। खाद की किल्लत प्रदेश व्यापी है।

यही हालत एनपीके खाद की भी है। जिसकी कीमत ₹1185 प्रति बैग है। वह भी बाजार में ₹1500 प्रति बैग मिल रहा है। अब एनपीके की रेट बढ़ कर ₹1700 प्रति बैग हो गई है। नियमानुसार 75% खाद सोसाइटीज से व 25% मार्केट से बेचा जाता है। अब उसे भी बदलकर 50 – 50% कर दिया है। अब किसानों को परेशान करके बाजार की ओर धकेलने का कुत्सित प्रयास सरकार कर रही है। मजबूरन किसानों को महंगे दामों पर बाजार से खाद खरीदना पड़ रहा है। यह मध्यप्रदेश में तीनों कृषि विरोधी काले कानूनों को लागू करने की रिहर्सल है।

अखिल भारतीय किसान सभा के संयुक्त सचिव बादल सरोज, मध्य प्रदेश किसान सभा अध्यक्ष रामनारायण कुररिया, उपाध्यक्ष अशोक तिवारी ने यह जानकारी देते हुए केंद्र व राज्य सरकारों को खाद के कमी के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए मांग की है कि – किसानों को पर्याप्त मात्रा में डीएपी खाद और बाद में यूरिया खाद उपलब्ध कराया जाए, फिलहाल डीएपी खाद के लिए तहसील मुख्यालयों पर कम से कम प्रति तहसील मुख्यालय 25 काउंटर लगाए जाए। समुचित मात्रा में खाद का आवंटन व उठाव सुनिश्चित किया जाए, आधार कार्ड से दो बैग खाद देने के बजाय जरूरत के मुताबिक किसानों को जमीन के रकबे के अनुसार भू अधिकार पुस्तिका के आधार पर उपलब्ध कराया जाए, थोक व खेरीज व्यापारियों से स्टॉक किया हुआ खाद निकलवाया जाए और उसे सरकारी रेट से किसानों को दिलाया जाए। इसके लिए आवश्यकतानुसार आवश्यक वस्तु अधिनियम के प्रावधानों को लागू किया जाए और जमाखोरों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।

किसानसभा नेताओं ने कहा है कि सरकार को यह कदम तत्काल उठाना चाहिए। किसानों को आवश्यकतानुसार खाद मुहैया कराना चाहिए। जरूरत के हिसाब से खाद का खरीदना व आवंटन करना सुनिश्चित किया जाए। प्रदेश में किसानों की इस दुर्दशा के खिलाफ खाद की किल्लत के विरोध में मध्य प्रदेश किसान सभा ने प्रदेश भर में 11 अक्टूबर को विरोध कार्रवाईयां आयोजित करने का आह्वान किया है। इस दिन प्रदेश भर में किसानों व्दारा तहसील व जिला मुख्यालयों पर धरना, प्रदर्शन, आंदोलन किए जाएंगे। सरकार और प्रशासन को खाद की कमी को दूर करने के लिए, किसानों को खाद मुहैया कराने के लिए बाध्य किया जाएगा।

पाठकों से अपील

“हस्तक्षेप” जन सुनवाई का मंच है जहां मेहनतकश अवाम की हर चीख दर्ज करनी है। जहां मानवाधिकार और नागरिक अधिकार के मुद्दे हैं तो प्रकृति, पर्यावरण, मौसम और जलवायु के मुद्दे भी हैं। ये यात्रा जारी रहे इसके लिए मदद करें। 9312873760 नंबर पर पेटीएम करें या नीचे दिए लिंक पर क्लिक करके ऑनलाइन भुगतान करें

 

हमारे बारे में उपाध्याय अमलेन्दु

Check Also

covid 19

दक्षिण अफ़्रीका से रिपोर्ट हुए ‘ओमिक्रोन’ कोरोना वायरस के ज़िम्मेदार हैं अमीर देश

Rich countries are responsible for ‘Omicron’ corona virus reported from South Africa जब तक दुनिया …

Leave a Reply