विदेशी राजनयिक कश्मीर का दौरा कर सकते हैं, लेकिन भारतीय राजनीतिज्ञ नहीं-भीम सिंह

Prof. Bhim Singh

Foreign diplomats can visit Kashmir, but not Indian politicians – Bhim Singh

नई दिल्ली, 09 जनवरी 2019. नेशनल पैंथर्स पार्टी के सुप्रीमो एवं वरिष्ठ अधिवक्ता प्रो. भीम सिंह ने भारत के राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद पर जोर दिया कि वे सभी मान्यताप्राप्त क्षेत्रीय एवं राष्ट्रीय राजनीतिक दलों के कम से कम एक प्रतिनिधि की बैठक बुलाकर जम्मू-कश्मीर के राज्य दर्जे की बहाली के साथ-साथ लोकतंत्र और कानून के शासन की बहाली के लिए उनकी राय लें, जिससे सरकार को अनापत्ति प्रमाणपत्र के लिए विदेशियों को जम्मू-कश्मीर का दौरा कराने की आवश्यकता नहीं रहेगी।

मोटरसाइकिल पर शांति मिशन के तहत वर्षों तक विश्वयात्रा करने वाले एवं लंदन विश्वविद्यालय से कानून में स्नाकोत्तर प्रो. भीम सिंह ने भारत सरकार से इस सवाल का जवाब मांगा कि यूरोपियन संघ देशों, अरब लीग और इस्लामिक देशों (बांग्लादेश को छोड़कर) के राजनयिक कश्मीर के दौरे पर क्यों नहीं आये? उन्होंने भारत के राष्ट्रपति और राजनीतिक दलों का ध्यान जम्मू-कश्मीर के रहने वाले भारतीय नागरिकों की स्थिति की ओर दिलाया, जो 5 अगस्त, 2019 के बाद परेशानी से जूझ रहे हैं, जहां सैंकड़ों लोगों को कानूनी वैधता खो चुके जनसुरक्षा कानून के तहत गैरकानूनी रूप से हिरासत में लिया गया है, जो भारतीय संविधान से राष्ट्रपति द्वारा अनुच्छेद 35-ए को हटाए जाने के बाद जम्मू-कश्मीर में अपनी कानूनी वैधता खो चुका है।

Review of current status of Jammu and Kashmir

उन्होंने जम्मू-कश्मीर की वर्तमान स्थिति की समीक्षा के लिए भारत सरकार द्वारा 16 विदेशी दूतावासों, जो नई दिल्ली में काम कर रहे हैं, के राजनयिकों के जम्मू-कश्मीर के दौरे पर आश्चर्य प्रकट किया। उन्होंने राष्ट्रपति से अपील की कि कश्मीर को पहले सभी भारतीय नागरिकों के लिए खोले जाने का निर्देश दें। उन्होंने काले कानून, पीएसए के तहत गत पांच महीनों से बंद सभी लोगों की रिहाई की मांग की। उन्होंने कहा कि आश्चर्य की बात है कि तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों सहित सैंकड़ों वरिष्ठ राजनेताओं को निष्फल हो चुके पीएसए के तहत जेलों में बंद रखा गया है।

उन्होंने भारत सरकार से सवाल किया कि कश्मीर में विदेशियों को बर्फबारी के सुहावने मौसम देखने की तो अनुमति दी गयी है, लेकिन उन्हें जेलों में बंद राजनीतिक कैदियों से मुलाकात की अनुमति क्यों नहीं? जम्मू-कश्मीर में जो लोकतंत्र की स्थिति का नायाब चेहरा है।

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