पूर्व आईजी दारापुरी ने भीम आर्मी प्रमुख रावण और कपिल मिश्रा की केमिस्ट्री पर उठाए सवाल

Former IG Darapuri raised questions on the chemistry of Bhim Army chief Ravan and Kapil Mishra

नई दिल्ली, 26 फरवरी 2020. क्या भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर रावण (Bhim Army chief Chandrashekhar Ravan) और भाजपा नेता कपिल मिश्रा (BJP leader Kapil Mishra) के बीच किसी जुगलबंदी या किसी की महत्वाकांक्षा का पुरिणाम है दिल्ली में हिंसा ? इस तरह के कोई ठोस प्रमाण तो नहीं हैं, लेकिन अवकाशप्राप्त आईजी एसआर दारापुरी (retired IG SR Darapuri) ने अपनी एक फेसबुक पोस्ट में कुछ सवाल उठाए हैं।

श्री दारापुरी ने लिखा

“23 FEB 2020

भारत बंद की शुरुआत जाफराबद सीलमपुर दिल्ली से

चंद्र शेखर आजाद के ट्वीट के मुताबिक,

‘ऐतिहासिक भारत बंद की शुरुआत जाफराबद सीलमपुर दिल्ली से कर दी गई है, दिल्ली के साथी जाफराबाद पहुंचें। आज संवैधानिक दायरे में रहते हुए पूरा भारत बंद किया जाएगा। बीजेपी सरकार को बहुजनों की ताकत का अहसास करवाया जाएगा।’

यह मालूम हो कि कपिल मिश्रा ने भी उसी दिन भारत बंद के जुलूस तथा धरने के विरुद्ध ज़फराबाद में ही आ कर धमकी दी थी।

अत: विचारणीय है कि क्या 23 फरवरी को दिल्ली में टकराव/हिंसा की शुरुआत उपरोक्त बंद के दौरान ही हुई थी?

यदि हां तो इसके लिये कौन जिम्मेदार है?

क्या आम लोगों को “भारत बंद” जैसे व्यक्तिगत आवाह्न से बचना नहीं चाहिये?

कृपया इस पर ठंढे दिमाग से सोचिये और अपनी प्रतिक्रिया दीजिये।“

उधर चर्चित एंकर बुशरा खानम (noted anchor Bushra Khanam) ने भी 24 फरवरी को ही फेसबुक पोस्ट में भीम आर्मी प्रमुख पर सवाल उठाए थे। उन्होंने लिखा था,

“सब सिर्फ़ इस्तेमाल करते हैं मुसलमानों का.. केजरीवाल को वोट चाहिए थे.. मुसलमानों ने झोली भर कर दिए.. चंद्रशेखर को लाइमलाइट चाहिए थी मुसलमानों ने चाँद पर बिठा कर बना बनाया स्टेज दिया..और अब जो हो रहा है वो आप सबके सामने है..मुसलमानों के पीसफुल प्रोटेस्ट को हाइजेक करके उनका इस्तेमाल किया गया..”

कश्मीरनामा के लेखक अशोक कुमार पाण्डेय ने भी कल फेसबुक पोस्ट के जरिए सवाल उठाया था। उन्होंने लिखा,

“ओवैसी हैदराबाद में हैं। वारिस पठान अपने घर मे हैं। कपिल मिश्रा अपने घर मे हैं। चंद्रशेखर आज़ाद को दिल्ली में हिंसाग्रस्त इलाक़ों में जाने के लिए पहले परमिशन और सुरक्षा का आश्वासन चाहिए इसलिये वह सुरक्षित स्थान पर हैं।

बताया जा रहा है कल कुछ लोग सिसोदिया जी के घर गए थे। घंटे भर बाद समय मिला और जब लोगों ने कहा कि आपको उन इलाक़ों में जाना चाहिए तो उन्होंने साफ़ मना कर भगा दिया। कुछ विधायक इलाक़ों में हालात संभालने की जगह एल जी के यहां गए बाद में कहा गया धरना है। आज मुख्यमंत्री गए राजघाट। गाँधी जी होते तो शायद आज डंडा ही चला देते। बाक़ी लोगों ने ट्वीट कर दिया है अब घर मे हैं।

बाक़ी दिल्ली का एक हिस्सा गुंडों के हवाले है। शांति की अपील न जलाने वाले पढ़ सकते हैं न जलने वाले। एकाध जगह शांति जुलूस निकले हैं। एकाध जगह लोगों ने एक दूसरे को बचाया है। अगले चुनाव पांच साल बाद हैं।

मैं मर चुका हूँ।”


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उपाध्याय अमलेन्दु:
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