इलेक्ट्रॉन से हिग्स पार्टिकल तक : पार्टिकल फ़िज़िक्स की दीर्घ शताब्दी

From the Electron to the Higgs: The Long Twentieth Century of Particle Physics

• रवि सिन्हा

सन 1897 में जे जे थॉमसन ने कैवेंडिश लेबोरेटरी में इलेक्ट्रॉन की खोज जिस कैथोड रे ट्यूब नाम के उपकरण से की, वह एक छोटे से टेबल पर रक्खा जा सकता था.

सन 2012 में जिस लार्ज हेड्रॉन कोलाइडर में हिग्स पार्टिकल की खोज हुई वह संसार का विशालतम वैज्ञानिक उपकरण है. यह पार्टिकल एक्सेलरेटर 27 किलोमीटर के घेरे वाली भूगर्भीय टनल में स्थित है और इसके निर्माण और संचालन का बजट अरबों डॉलर का है. 

इलेक्ट्रॉन की खोज से यदि पार्टिकल फ़िज़िक्स का उद्घाटन हुआ तो हिग्स पार्टिकल की खोज एक तरह से पार्टिकल फ़िज़िक्स के 115 सालों के इतिहास का चरम बिन्दु है.

13 दिसंबर को आयोजित इस व्याख्यान में हम पार्टिकल फ़िज़िक्स की इस लम्बी सदी पर नज़र डालेंगे और उन स्तब्धकारी उपलब्धियों की कथा कहेंगे जिसमें प्रोटॉन की, एन्टी-पार्टिकल की और क्वार्क्स (quarks) की खोज की कहानियाँ शामिल हैं.  यह प्रकृति के मूलभूत नियमों और पदार्थ के मूलभूत कणों के सन्धान की वह महागाथा है जिसे इस मुकाम तक पहुँचने में ढाई हज़ार साल लगे हैं लेकिन जिसे पिछली सदी में ही अंजाम दिया जा सका है.

इस शृंखला के अन्य व्याख्यानों की ही तरह यह व्याख्यान भी हाइ स्कूल के विद्यार्थियों और जिज्ञासु आम लोगों के लिए बोधगम्य रहेगा. 

The 9th lecture (in Hindi) in the Umang Library popular science series will happen this Sunday, December 13, at 5 PM IST.

Theme : From the Electron to the Higgs: The Long Twentieth Century of Particle Physics -13 th Dec 6 PM (IST)

Speaker : Dr Ravi Sinha

The series is aimed at creating awareness about science in the Hindi belt of India.

About Dr. Ravi Sinha:

Dr Ravi Sinha is a physicist, author, scholar and activist. Trained as a theoretical physicist, he obtained his doctoral degree in theoretical nuclear physics from MIT, Cambridge, the USA in 1982. He worked as a physicist at University of Maryland, College Park, USA, at Physical Research Laboratory, Ahmedabad, and at Gujarat University, Ahmedabad.  Midway through his professional career, he resigned from his job as a physicist and University faculty to devote full time to organizing and theorizing.

He is also a science communicator writing and giving popular lectures on science, history and philosophy of science and on the present frontiers of theoretical physics. His Hindi booklet, “Quantum ke Sau Saal” (“One Hundred Years of the Quantum”) written around the turn of the millennium became quite popular with the Hindi audiences.

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उपाध्याय अमलेन्दु:
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