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महामारी में गंगास्नान : मोदीजी के आत्मनिर्भर भारत में अपनी फिक्र खुद करें, क्योंकि सरकार आपदा में अवसर ढूंढने में व्यस्त है

(देशबन्धु में संपादकीय आज | Editorial in Deshbandhu today)

पूरी दुनिया पिछले एक साल से भी अधिक वक्त से कोरोना के खौफ में जी रही है। भारत दुनिया के सर्वाधिक कोरोना प्रभावित देशों में से एक है और इसकी दूसरी लहर तो देश पर बहुत भारी पड़ती दिख रही है। अब देश में रोजाना एक-डेढ़ लाख मामले सामने आ रहे हैं। अस्पतालों के बाहर मरीजों की कतारें देख कर समझा जा सकता है कि पिछले एक साल में सरकार ने स्वास्थ्य सुविधाओं की बेहतरी के लिए कोई खास मेहनत नहीं की।

वैसे भी केंद्र सरकार का ध्यान विधानसभा चुनावों पर ज्यादा है। पहले बिहार चुनाव में प्रधानमंत्री व्यस्त रहे, अब प. बंगाल उनके 17-18 कामकाजी घंटों का बहुत सा वक्त ले रहा है। उन पर देश की जिम्मेदारी के साथ भाजपा को निगम चुनावों से लेकर विधानसभा चुनावों तक जिताने की जिम्मेदारी भी है। इसलिए उनसे ये उम्मीद रखना व्यर्थ है कि वे इस कठिन समय में देश को ठीक से संभालेंगे। वैसे भी पिछले साल भर में उन्होंने स्वास्थ्य, रोजगार, उद्योग, शिक्षा, बैंक आदि तमाम क्षेत्रों के लिए जो फैसले लिए, उससे आम जनता को कोई राहत नहीं मिली, बल्कि उसकी चिंताएं बढ़ती गईं।

मोदीजी ने देश को इतना आत्मनिर्भर तो बना ही दिया कि लोग अपनी जान की फिक्र खुद करें। दिक्कत ये है कि जो लोग अपना ध्यान नहीं रख रहे हैं, उनके कारण दूसरों को भी तकलीफ होने की आशंकाएं हैं।

Mahakumbh is being organized in this terrible time in India.

कोरोना के कारण दुनिया भर में कई जरूरी आयोजन या तो रद्द हो गए हैं, या स्थगित कर दिए गए हैं या वर्चुअली आयोजित हो रहे हैं। लेकिन भारत में इस भयावह समय में महाकुंभ का आयोजन बदस्तूर हो रहा है। इसे बीमारी पर आस्था भारी जैसी चुपड़ी बातों से उपेक्षित नहीं किया जा सकता, क्योंकि इस आस्था की भारी कीमत आने वाले वक्त में देश को चुकानी पड़ सकती है।

त्रिवेन्द्र के फैसलों को तीरथ ने बदला

उत्तराखंड में पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत (Former Chief Minister Trivendra Singh Rawat in Uttarakhand) ने महामारी के बीच कुंभ के आयोजन को लेकर कुछ सख्त नियम बनाए थे और उम्मीद की जा रही थी कि इस सख्ती के कारण भीड़ काबू में रहेगी और बीमारी भी। लेकिन नए मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत (New Chief Minister Tirath Singh Rawat) ने पद संभालते ही पिछले मुख्यमंत्री के कई फैसलों को बदल दिया और कुंभ को लेकर बरती गई कई सख्तियां हटा दी गईं।

पिछले कई दिनों से हरिद्वार में श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ रही थी और सोमवार को सोमवती अमावस्या के मौके पर गंगा नदी में स्नान के लिए हजारों की संख्या की में लोग इकट्ठा हुए। पौराणिक मान्यता है कि गंगा नदी में सारे पाप धुल जाते हैं, मोक्ष की प्राप्ति होती है। लेकिन इस बार तो ये डर लग रहा है कि कहीं यहां बीमारी की प्राप्ति न हो जाए।

श्रद्धालुओं ने अपने पाप धोने के लिए डुबकी तो लगा ली, लेकिन बहुत से लोगों के लिए खतरा भी उस पानी में छोड़ दिया। गंगा नदी पहले ही इंसान की गंदगी ढो-ढोकर मैली हो चुकी है, उसके स्वच्छ जल को अब कोरोना वायरस के प्रसार का माध्यम बनाकर क्या इंसान सही कर रहा है, इस दृष्टि से भी विचार करने की जरूरत है।

सत्ता के लिए यह बहुत सुविधाजनक होता है कि जनता उससे सवाल न पूछे और किसी न किसी बात में व्यस्त रहे। धर्म औऱ आस्था में लोगों को उलझा कर बेहद आसान काम है। अभी जनता ये देखकर भले खुश हो जाए कि देश के कई हिस्सों में महामारी के कारण बहुत सी पाबंदियां लगाई जा रही हैं, लेकिन कुंभ को लेकर उसकी धार्मिक मान्यताओं के पालन में कोई पाबंदी नहीं है। पर यहीं उसे यह विचार करने की भी जरूरत है कि आखिर इस ढील का क्या नुकसान उसे और पूरे समाज को भुगतना पड़ेगा।

प्रशासन ने तो सोमवार की भीड़ के बाद कह दिया कि भारी संख्या में लोगों के इकट्ठा होने से पुलिस को कोरोना के कारण लगाई पाबंदियों का पालन करने में मुश्किलें पेश आ रही है। अगर पुलिस जबरन लोगों को घाटों पर सोशल डिस्टेन्सिंग के नियमों का पालन (Following the rules of social distancing) करने के लिए कहती भगदड़ जैसी स्थिति पैदा हो सकती थी।

गौरतलब है कि कुंभ मेले से पहले सरकार ने कहा था कि मेले में उन्हीं को आने की अनुमति दी जाएगी जिनकी कोविड-19 रिपोर्ट नेगेटिव होगी और मेले में शिरकत करने वालों को कोरोना के कारण लागू किए गए सभी दिशानिर्देशों का पालन करना पड़ेगा। लेकिन मेले में आए कई साधु-संतों समेत कई लोग कोरोना पॉज़िटिव पाए गए हैं।

सोमवार को हुए गंगास्नान के बाद चिंता जताई जा रही है कोरोना संक्रमण श्रद्धालुओं के बीच तेज़ी से फैल सकता है और ये भी संभव है कि वायरस यहां से लौटने वाले श्रद्धालुओं के साथ उनके गांवों और शहरों तक पहुंचे।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने तो कुंभ मेले का आयोजन रद्द करने की अपील की थी। तब सरकार ने सभी दिशानिर्देशों के पालन की बात कही थी। पर अब दिख रहा है कि सरकार न दिशानिर्देशों का पालन करवा पा रही है, न अपनी जिम्मेदारी निभा पा रही है। इसलिए बेहतर है लोग खुद अपना ख्याल ऱखें।

आज का देशबन्धु का संपादकीय (Today’s Deshbandhu editorial) का संपादित रूप.

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