गांव के गरीबों तक राहत पहुंचाने की सरकारी घोषणाएं हवा-हवाई : माले

माले ने लॉकडाउन में जाना आजमगढ़ के गरीब व मुसहर परिवारों का हाल.

कहा, गांव के गरीबों तक राहत पहुंचाने की सरकारी घोषणाएं हवा-हवाई.

लखनऊ, 30 मार्च। भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (माले) ने कहा है कि लॉकडाउन लागू होने के बाद गांव के गरीबों तक राहत पहुंचाने की सरकारी घोषणाएं हवा-हवाई साबित हो रही हैं।पार्टी ने आजमगढ़ में गरीब और मुसहर बस्तियों में रहने वाले परिवारों से संपर्क साध कर बताया है कि उनके बीच राशन, भोजन के पैकेट, दवा, साबुन, सेनेटाइजर आदि अत्यावश्यक सामग्री से लेकर जीवन निर्वाह के लिए धनराशि भी नहीं पहुंच रही है। काम-धाम बंद होने से कई गांवों में भुखमरी जैसी स्थिति है।

पार्टी के राज्य सचिव सुधाकर यादव ने सोमवार को कहा कि लॉकडाउन में जरूरी मदद (Help needed in lockdown) उपलब्ध न होने के चलते मजदूरों-गरीबों की हालत दिन-प्रतिदिन बदतर होती जा रही है।

उन्होंने कहा कि माले की टीम ने आजमगढ़ जिले के सदर, महराजगंज, लालगंज, मार्टीनगंज, मेहनगर तहसील व तहबरपुर ब्लॉक के कई गांवों का जायजा लिया। सदर तहसील में सठियांव ब्लॉक के महुआ मुरारपुर, सरयां, तहबरपुर ब्लॉक के ओरा, गौरा, हरैया, रजथरिया व कोठिहार, महराजगंज तहसील के नौबरार, देवारा, जदीद प्रथम, लालगंज व मार्टीनगंज तहसीलों के सिकरौरा, नाऊपुर, बड़नपुर, बहादुरपुर, टिकरगाढ़, सोफीपुर, अबदह, सरावां व मेहनगर तहसील के गंजोर, धरनीपुर, बासूपुर, करौता, कटहन सिंहपुर, खरिहानी आदि गांवों के ग्रामीण गरीबों से बातचीत की गयी।

राज्य सचिव ने कहा, लोगों ने बताया कि कहीं भी राशन, दवा या अन्य जरूरी चीजें सरकार की तरफ से नहीं मिल रही है। गंजोर, करौता की मुसहर बस्ती में अधिकांश के पास राशनकार्ड भी नहीं है। कमोबेश यही स्थिति सिकरौरा-नाऊपुर की मुसहर बस्ती में भी है। काम-धाम बंद हो जाने से भुखमरी की स्थिति आ गयी है। पुलिस या प्रशासन भोजन का पैकेट तो दे नहीं रहा है, उल्टे उसने गांवों की छोटी-छोटी दुकानें को भी बंद करा दिया है। बाजार में निकलने पर पुलिस मारपीट कर रही है। लोगों के अनुसार प्रशासन के आतंक का माहौल है और गरीबों का जीवन बहुत ही तकलीफ में पड़ गया है।

राज्य सचिव ने कहा कि मेहनगर तहसील के गंजोर से स्थिति का जायजा लेकर माले कार्यकर्ताओं के वापस लौटने के बाद 29 मार्च की रात में कुछ चुनिंदा मुसहर परिवारों को बुलाकर प्रशासन द्वारा 10-15 किग्रा राशन दिया गया, वो भी महज कुछ ही को। कुछ गांवों से यह जानकारी मिली कि अप्रैल में राशन वितरण की बात कोटेदार कर रहे हैं। माले नेता ने कहा कि गरीबों की मौजूदा हालत जानने के लिए ग्रासरूट स्तर पर पार्टी कार्यकर्ताओं के जरिए पास-पड़ोस के गांवों व परिवारों से फीडबैक लिया गया।

उन्होंने कहा कि पार्टी के निर्देशानुसार, संकट में फंसे लोगों-परिवारों को माले कार्यकर्ता प्रदेश भर में अपने स्तर से भरसक मदद करने में लगे हैं और ऐसे मामलों की जानकारी प्रशासन को देकर सहायता पहुंचवाने की हर संभव कोशिश कर रहे हैं। पार्टी व जनसंगठनों के कार्यकर्ता लोगों से भी मदद इकट्ठा कर जरूरतमंद परिवारों तक पहुंचा रहे हैं।

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उपाध्याय अमलेन्दु:
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