विदेशी निवेश के नाम पर मजदूरों को बंधुआ बनाने की तैयारी में मोदी सरकार!

Government preparing to make laborers bonded in the name of foreign investment!

उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश औेर गुजरात श्रम कानून में बदलाव कर निजी संस्थान मालिकानों को थमा दिया गया है शोषण का हथियार

जो लोग प्रधानमंत्री के विदेशों में होने वाले दौरों को भारत में विदेशी निवेश से जोड़कर देख रहे थे। उसके पीछे बड़ा कारण प्रधानमंत्री का विदेशी निवेशकों को भारत में सस्ता श्रम और सस्ती जमीन देने का प्रलोभन माना जाता रहा है। मोदी के पहले कार्यकाल में भूमि अधिग्रहण और श्रम काननू में संशोधन का कवायद भी इसी रणनीति का हिस्सा रही है। इंडिस्ट्रयल रिलेशंस कोड बिल भी इसी रणनीति का बढ़ता कदम ही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तमाम प्रयास के बावजूद व श्रम कानून मामलों में अपनी मनमानी नहीं कर पा रहे थे। अब कोरोना के संक्रमण काल में जब देश पर रोजी-रोटी का बड़ा संकट आ गया है तो अब मोदी को श्रम कानून में बदलाव करने का अच्छा मौका मिल गया है।

फिलहाल उन्होंने केंद्र सरकार से कुछ नहीं कराया है, अपनी राज्यों सरकारों को यह हथियार जरूरत थमा दिया है। विदेशी निवेश के नाम पर उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और गुजरात में लेबर लॉ में किया गया बदलाव कर दिया गया है। नोएडा और ग्रेटर नोएडा में बड़े स्तर पर विदेशी निवेश की चर्चा सरकार ने बाजार में छोड़ दी है। हालांकि श्रम कानून में किया गया यह बदलाव तीन साल के लिए बताया जा रहा है पर पर इसमें मजदूरों का शोषण और दमन तय है।

उत्तर प्रदेश सरकार ने अध्यादेश लाकर श्रमिकों को शोषण से बचाने वाले कानून नियमों को तीन साल के लिए अस्थाई रूप से स्थगित कर दिया है। हालांकि विपक्ष  में बैठी समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव और कांग्रेस की उत्तर प्रदेश की प्रभारी प्रियंका गांधी ने  इस कानून के बदलाव को मजदूर विरोधी बताते हुए इसका जमकर विरोध किया है पर सरकार के कान पर कोई जूं नहीं रेंगी है।

इस लॉ के अनुसार वर्किंग ओवर 8 घंटे से बढ़ाकर 12 घंटे करने को मंजूरी मिल गई है। हालांकि, सरकार ने कहा है कि सिर्फ वही कर्मचारी या मजदूर 8 घंटे से अधिक काम करेंगे, जो करना चाहेंगे। क्या सरकारें नहीं जानती कि नौकरी जाने का भय दिखाकर निजी संस्थाओं में श्रमिकों का कितना शोषण होता है ? अब तो इन मालिकान को मजदूरों का शोषण ही नहीं बल्कि दमन करने का पूरा मौका मिल गया है।

दरअसल कोरोना कहर के समय जब देश में बड़े स्तर पर बेरोजगारी फैल रही है तो सरकार किसी भी तरह से इस माहौल को दबाना चाहती है।

मोदी सरकार तो मजदूर व किसान को अपना बंधुआ ही समझती है तो इस बारे में उन्हें न विपक्ष और न ही मजदूर संगठनों से कोई सलाह लेने की जरूरत है। लेबर लॉ बदलाव किया जा रहा है, जिससे विदेशी निवेशकों के लिए यहां पर माहौल बनाया जा सके। ज्ञात हो कि चीन में अधिकतर आईटी कंपनियों में 12 घंटे तक भी काम होता है पर भारत में यह नहीं देखा जाएगा कि इन बारह घंटे में 4 घंटे का ओवर टाइम होता है। यानी कि 12 घंटे काम करके श्रमिक डबल वेतन उठाता है। लेबर लॉ में बदलाव भारत में श्रमिकों के शोषण का एक हथियार मिल जाएगा। यहां 12 घंटे ड्यूटी लेकर कोई-कोई ही कंपनी ओवर टाइम देगी। देगी तो सिंगल ही देगी। मतलब श्रमिकों का शोषण और बढ़ेगा, यही वजह है कि ट्रेड यूनियनें इसके खिलाफ हैं।

मौजूदा समय में इतने सख्त नियमों के बावजूद बहुत सारी कंपनियां मजदूरों का शोषण करने से नहीं चूकती हैं तो फिर नियमों में ढील देने के बाद तो कंपनियों को शोषण करने का जैसे अधिकार ही मिल जाएगा। यह तब है जब सख्त कानून होने के बावजूद निजी संस्थाएं जमकर श्रमिकों का शोषण करती हैं।

चरण सिंह राजपूत, लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं।

उत्तर प्रदेश के साथ ही मध्य प्रदेश में भी बड़े स्तर पर प्रवासी मजदूरों को लाया जा रहा है। गुजरात में प्रवासी मजदूरों को रोकने की कवायद की जा रही है। यही वजह है कि गुजरात में घर जाने के लिए प्रवासी मजदूरों का हंगामा हो रहा है। इस विदेशी निवेश के लालच में मोदी सरकार के साथ ही भाजपा की प्रदेश सरकारों ने मजदूरों की जान पर भी दांव लगा दिया है। यदि उत्तर प्रदेश औेर मध्य प्रदेश को छोड़ दें तो कोई भाजपा शासित प्रदेश प्रवासी मजदूरों को लाने में दिलचस्पी नहीं दिखा रहा है।

एनडीए में शामिल नीतीश सरकार ने तो लॉक डाउन में ही मजदूरों के किराये से मना कर दिया था। हालांकि तमाम बवाल के बाद वह बैकफुट पर आई है। फिर दिल्ली सरकार ने बिहार के मजदूरों को उनके घरों को भेजने के लिए ट्रेन में आये खर्चे का हिस्सा नीतीश सरकार के न देने का आरोप लगाया है। उधर कर्नाटक में येदुयेरप्पा सरकार बिल्डरों के दबाव में प्रवासी मजदूरों  को रोकने पर आमादा है। उसने प्रवासी मजदूरों को उनके घरों को पहुंचाने के लिए चलाई जा रही ट्रेनों को रद्द तक करा दिया। कुल मिलाकर कोरोना का कहर में सबसे अधिक प्रभावित मजदूर हुआ है औेर अब उसको शोषण की भट्ठी में झोंकी की तैयारी भाजपा सरकारों ने कर ली है।

चरण सिंह राजपूत

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उपाध्याय अमलेन्दु:
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